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छत्तीसगढ़ में पेपर लीक रोकने को बना देश का सबसे कठोर कानून, 10 साल की जेल और 1 करोड़ का जुर्माना

by Sanjay Kumar Srivastava 20 March 2026, 5:52 PM IST (Updated 23 March 2026, 1:18 PM IST)
20 March 2026, 5:52 PM IST (Updated 23 March 2026, 1:18 PM IST)
छत्तीसगढ़ में पेपर लीक रोकने को बना देश का सबसे कठोर कानून, 10 साल की जेल और 1 करोड़ का जुर्माना, संपत्ति भी होगी कुर्क

Exam Bill: छत्तीसगढ़ में अब युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ नहीं हो पाएगा. सूबे में भर्तियां निष्पक्ष और पारदर्शी हो, इसके लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं.

Exam Bill: छत्तीसगढ़ में अब युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ नहीं हो पाएगा. सूबे में भर्तियां निष्पक्ष और पारदर्शी हो, इसके लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं. छत्तीसगढ़ विधानसभा ने पेपर लीक और परीक्षाओं में धोखाधड़ी रोकने हेतु देश का सबसे कड़ा कानून पारित किया है. इसके तहत दोषियों को 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि इसका उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है. उन्होंने भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) जैसे घोटालों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने युवाओं के सपनों को कुचल दिया. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने और पारदर्शी बनाने का वादा किया था. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ अपराधियों को दंडित करने वाला कानून नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना है.

पेपर माफियाओं के हौसले होंगे पस्त

विपक्ष के नेता चरण दास महंत ने विधेयक के लिए समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि धोखाधड़ी को बढ़ावा देने या संगठित अपराध में सहायता करने वालों के खिलाफ सख्त प्रावधान आवश्यक हैं. हालांकि, उन्होंने राज्य में पिछले शासन को बार-बार दोषी ठहराने के लिए सरकार की आलोचना की. सीएम साय ने कहा कि सख्त विधेयक से उम्मीदवारों के बीच विश्वास पैदा होगा और वे मेहनत से परीक्षा में सफल होने की कोशिश करेंगे. इस सख्त कानून से पेपर माफियाओं के हौसले पस्त होंगे. सीएम साई ने कहा कि प्रस्तावित कानून में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को उजागर करने वाले मुखबिरों की सुरक्षा, उनकी पहचान की गोपनीयता और ऐसे अपराधों की रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करने के लिए कानूनी सुरक्षा देने के प्रावधान भी शामिल हैं. इस कानून से किसी भी सार्वजनिक परीक्षा में अनुचित साधनों के उपयोग पर सख्ती से रोक लगेगी. परीक्षा केंद्रों में अनधिकृत प्रवेश और परीक्षा के संचालन में हस्तक्षेप भी निषिद्ध माना गया है.

पेपर लीक में संस्थान भी होंगे जिम्मेदार

विधेयक में यह भी कहा गया है कि केवल अनुमोदित परीक्षा केंद्रों का ही उपयोग किया जाएगा. प्रस्तावित कानून के तहत अपराधों में शामिल व्यक्तियों और संस्थानों दोनों को जवाबदेह ठहराया जाएगा. इसके अलावा कदाचार का दोषी पाए जाने वाले उम्मीदवारों के परिणाम रोक दिए जाएंगे और उन्हें कम से कम एक वर्ष के लिए सार्वजनिक परीक्षाओं में बैठने से रोक दिया जाएगा, जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है. पेपर लीक में शामिल अन्य लोगों के लिए विधेयक में कठोर दंड का प्रावधान है, जिसमें तीन से 10 साल तक की कैद और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना शामिल है.

मूल्यांकन रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ पर भी कैद

परीक्षा केंद्रों में अवैध प्रवेश, स्थानों का दुरुपयोग या मूल्यांकन रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ जैसे उल्लंघनों पर एक से पांच साल की कैद और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना होगा. दोषी पाए गए सेवा प्रदाताओं और संस्थानों को 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना और कम से कम तीन साल के लिए सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने से प्रतिबंधित किया जा सकता है. आरोपियों की संपत्तियों को कुर्क और जब्त भी किया जा सकता है. विधेयक में यह भी कहा गया है कि अपराधों की जांच उप-निरीक्षक के पद से नीचे के अधिकारियों द्वारा नहीं की जाएगी.

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News Source: PTI

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