MP News : मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार भले ही अन्नदाता किसानों के हित में बड़े-बड़े फैसले ले रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सरकारी सिस्टम पर अफसरशाही पूरी तरह हावी है. ऐसा लगता है कि अफसरों ने कसम खा रखी है कि किसानों को राहत आसानी से नहीं मिलने देंगे. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर की बुधनी तहसील से लाइव टाइम्स की ग्राउंड रिपोर्टिंग ने प्रशासनिक मनमानी और भ्रष्ट कार्यशैली की पूरी पोल खोलकर रख दी है.
वेयरहाउसों को केंद्र बनाया गया
मूंग खरीदी समिति के सचिव व डीडीए कृषि विभाग सीहोर अशोक उपाध्याय और जिला विपणन अधिकारी (खरीदी एजेंसी प्रमुख) नीरज भार्गव की जुगलबंदी से ऐसे गोदामों को उपार्जन केंद्र बना दिया गया है, जो पहले से ही ठसाठस भरे पड़े हैं. लाइव टाइम्स की ऑन द स्पॉट पड़ताल में सामने आया कि मालीबाया और मोगरा स्थित जिन वेयरहाउसों को केंद्र बनाया गया है. वे गेहूं से पटे पड़े हैं और उनकी भंडारण क्षमता शून्य के बराबर है, जब तक गेहूं उठेगा नहीं, तब तक मूंग की तुलाई संभव नहीं है. हद तो यह है कि जब खाली गोदामों के संचालक केंद्र बनाने की गुहार लेकर अधिकारियों के पास पहुंचते हैं तो उन्हें साफ टाल दिया जाता है और भरे हुए गोदामों पर ही खास मेहरबानी बरसाई जा रही है.
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बारदाने का अकाल और खुले में सड़ती उपज
अधिकारियों की अकलमंदी का आलम यह है कि स्टेट हाइवे के किनारे स्थित फुल वेयरहाउसों को केंद्र बनाया गया है, जिससे रोजाना चक्काजाम की स्थिति बन रही है. तुलाई पूरी तरह ठप होने के कगार पर है. उपार्जन केंद्रों पर बारदाने का भारी अकाल है और जो माल खरीदा जा चुका है, उसका समय पर उठाव न होने के कारण हजारों क्विंटल मूंग खुले आसमान के नीचे डंप पड़ी है.
100 प्रतिशत खरीदी पर अड़े किसान
शुरुआत में सरकार ने कुल उत्पादन का महज 25 प्रतिशत मूंग खरीदने की सीमा तय की थी, जिसके विरोध में किसानों ने उग्र आंदोलन किया. दबाव में आकर सरकार ने कोटा बढ़ाकर 60 प्रतिशत और स्लॉट बुकिंग की तारीख 10 अगस्त तक जरूर कर दी, लेकिन किसान अब भी 100 प्रतिशत खरीदी की मांग पर अड़े हैं. किसानों का तर्क है कि बाकी 40 प्रतिशत उपज को व्यापारी मंडियों में समर्थन मूल्य से 2000 से 3000 रुपये कम दाम पर लूट रहे हैं.
बारिश की मार और भुगतान में अटका पैसा
- किसानों की मुसीबतें यहीं खत्म नहीं होतीं, किसानों के सामने नित नई परेशानी हैं, जिनमें ई.उपार्जन पोर्टल का सर्वर लगातार ठप रहने, बायोमेट्रिक और फेस ऑथेंटिकेशन फेल होने के कारण किसानों के स्लॉट जनरेट नहीं हो पा रहे हैं.
- मानसून की बारिश से मूंग में नमी बढ़ गई है. केंद्रों पर 12 प्रतिशत से ज्यादा नमी होने पर सीधे माल रिजेक्ट किया जा रहा है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश है.
- तुलाई के हफ्तों बाद भी किसानों के खातों में पैसे नहीं पहुंच रहे हैं. आगामी खरीफ फसलों की बोवनी के लिए खाद-बीज खरीदने का संकट खड़ा हो गया है. कुल मिलाकर कागजी दावों और जमीनी हकीकत के इस बड़े अंतर ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जब तक गेहूं से भरे वेयरहाउसों.
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