Women’s Reservation Bill: महिला कोटा और परिसीमन बिल को लेकर शनिवार को कांग्रेस और बीजेपी के बीच जमकर बहस हुई. राहुल गांधी ने कहा था कि कोई भी देश तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक उसकी महिलाएं अपनी बात न रख सकें. इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे सोच में आया साफ़ बदलाव बताया और उम्मीद जताई कि विपक्षी पार्टी प्रस्तावित कानून का समर्थन करेगी. रिजिजू की टिप्पणी का जवाब देते हुए गांधी ने पलटवार किया और कहा कि मिस्टर रिजिजू, संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर आपसे बेहतर कौन जान सकता है कि महिला आरक्षण बिल 2023 पहले ही कांग्रेस के पूरे समर्थन से सर्वसम्मति से पारित हो चुका है?
2023 का कानून अब तक लागू क्यों नहीं?
गांधी ने कहा कि सवाल यह है कि तीन साल बाद भी इसे लागू क्यों नहीं किया गया है, और अब आप इसे बेवजह परिसीमन से क्यों जोड़ना चाहते हैं? उन्होंने कहा कि 2023 के कानून को बिना किसी शर्त के लागू करें. गांधी के जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस नेता अच्छी तरह जानते हैं कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 में दिया गया है. रिजिजू ने कहा कि गांधी यह भी जानते हैं कि यह कानून 2023 के बाद प्रकाशित जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू होगा, जिसका मतलब है कि 2026 के बाद प्रकाशित जनगणना के आंकड़े.
बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि 2026 के बाद जनगणना के आंकड़े प्रकाशित करने की प्रक्रिया अभी चल रही है. हालांकि, जाति-आधारित जनगणना के अंतिम प्रकाशन के कारण इसमें काफी समय लग सकता है. इसे देखते हुए महिला आरक्षण को लागू करने में काफी देरी हो सकती है और कम से कम 2034 के आम चुनावों से पहले तो यह लागू नहीं हो पाएगा. उन्होंने कहा कि इसलिए 2029 में होने वाले अगले आम चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने के लिए हाल ही में जारी जनगणना के आंकड़ों के आधार पर जल्द से जल्द परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने की ज़रूरत है.
सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
रिजिजू ने कहा कि इसे लागू करने का तरीका ‘परिसीमन विधेयक 2026’ के तहत प्रस्तावित किया गया है, जिसे संविधान में संशोधन के साथ लोकसभा में पेश किया गया था. हालांकि, मंत्री ने कहा कि इस मकसद से पेश किया गया ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ गिर गया है. रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी को याद दिला दूं कि कर्नाटक में डीके शिवकुमार की कैबिनेट में कोई महिला नहीं है. इससे 33% महिला आरक्षण पर कांग्रेस के रुख पर गंभीर सवाल उठते हैं. इस आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि हमने ही (महिला आरक्षण विधेयक) पेश किया था, हमने ही (विधेयक) पास कराया था. सदन के सुचारु कामकाज के लिए मंत्री ने 10 दिनों में राहुल से दो बार मुलाक़ात भी की.
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News Source: PTI
