Delhi Fire Accident: सबसे ज्यादा दर्दनाक मौत आग लगने से होती है. हम मोमबत्ती या चूल्हे की आंच बर्दाश्त नहीं कर पाते, जरा सोचिए, जिनके शरीर के हर अंग में आग लग जाती है, उनके दर्द की सीमा क्या होगी. आज सुबह राष्ट्रीय राजधानी के मालवीय नगर में एक रेस्टोरेंट में भीषण आग लग गई. जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई है. इनमें से ज्यादातर विदेशी नागरिक थे. पुलिस ने तीन लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाया है, जिनकी हालत गंभीर है. वहीं 40 लोगों को बचा लिया गया है. हादसे में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. आग लगने की तस्वीरें बेहद भयानक हैं. तस्वीरों में देखा जा सकता है कि आसमान में काला धूंआ छाया हुआ है और अफरा-तफरी मची हुई है.
पूरी बिल्डिंग जलकर राख हो गई है. इस हादसे ने इलाके में दहशत पैदा कर दी है. 21 लोगों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. एक अन्य वीडियो में देखा गया कि एक महिला अपने बच्चे को गोद में लेकर तीन मंजिल से नीचे कूद रही है. एक बार जब आग विक्राल रूप ले लेती है, तो उसे बचके निकलना मुश्किल होता है. धूएं और आग की लपटों के बीच लोग फंस कर रह जाते हैं और उनकी दर्दनाक मौत हो जाती है. कभी एसी ब्लास्ट तो कभी सिलेंडर ब्लास्ट के कारण अक्सर घरों में आग लग जाती है, जो किसी न किसी लापरवाही का नतीजा है. गर्मियों में ऐसी घटनाएं ज्यादातर सामने आती हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) और नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के सालाना आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में हर साल आग की घटनाओं में औसतन 75 से 100 लोगों की जान जाती है. चलिए एक नजर डालते हैं दिल्ली के उन भयानक अग्निकांड पर, जो पिछले दस साल में हुए.

पिछले दस सालों में हुई 800 से ज्यादा मौतें
दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) और नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के डेटा के मुताबिक, पिछले दस सालों में दिल्ली में केवल आग लगने के कारण 800 लोगों की जान गई है. सिर्फ इस साल की बात करें तो, यह आंकड़ा आज की घटना के बाद 65 मौतों तक पहुंच गया है. मार्च का महीना सबसे जानलेवा साबित हुआ, जिसमें आग की घटनाओं में 15 लोगों की मौत हुई. अकेले मई के शुरुआती 27 दिनों में ही 13 लोगों की मौत दर्ज की गई. आग की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी देखी गई, जिसका मुख्य कारण गर्मी और शुष्क मौसम की स्थितियां थीं.
पूर्व आईएएस की मौत
28 मई को, साउथ दिल्ली के पॉश हौज खास इलाके में एक घर में आग लगने से 80 साल के रिटायर्ड IAS ऑफिसर धनेंद्र कुमार की मौत हो गई. उनके बेटे भी आग में फंस गए, और दोनों को हॉस्पिटल ले जाया गया. इलाज के दौरान पूर्व ऑफिसर की मौत हो गई, जबकि बेटे की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है. माना जा रहा है कि आग एयर कंडीशनर (AC) के इनडोर यूनिट में धमाके की वजह से लगी थी.
विवेह विहार में 9 लोगों की मौत
3 मई को विवेक विहार इलाके के B ब्लॉक में एक चार मंजिला बिल्डिंग के सबसे ऊपरी फ्लो पर सुबह करीब 3:00 बजे आग लग गई. इस हादसे में 9 लोगों की जान चली गई, लेकिन 12 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया. कुछ लोग घायल भी हुए. दमकल गाड़ियों ने आग बुझाने के लिए कड़ी मशक्कत की.
मार्च में आग से परिवार तबाह
18 मार्च को, पालम इलाके में रामफल चौक के पास एक पांच मंजिला इमारत में भीषण आग लग गई, जिसमें एक ही परिवार के नौ लोगों की मौत हो गई, जिसमें तीन बच्चे भी शामिल थे. बिल्डिंग में 22 लोगों का परिवार रहता था और उनमें से 10-12 लोग उस समय गोवा घूमने गए हुए थे. बाकी बचे लोग आग में फंस गए. आग इतनी भयानक थी कि 30 से ज्यादा फायर इंजन बुलाए गए.

साल 2025 की घटनाएं
2025 में नॉर्थवेस्ट दिल्ली के रिठाला (रोहिणी) इलाके में पांच मंजिला केमिकल फैक्ट्री के ग्राउंड फ्लोर पर भीषण आग लग गई. केमिकल होने की वजह से आग ने तेजी से पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया. इस दर्दनाक हादसे में चार लोगों की मौत हो गई. इसके अलावा, रिठाला झुग्गी में आग लगने से एक व्यक्ति की मौत हो गई. 2025 के शुरुआती महीनों में आग से बारह मौतें दर्ज की गईं.
2024 में विवेक विहार बेबी केयर सेंटर हादसा
मई 2024 में पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार में एक नियोनेटल हॉस्पिटल में आग लग गई. वहां भर्ती कई नवजात बच्चे धुएं और आग की लपटों में घिर गए. इस घटना में सात बच्चों की मौत हो गई. इस घटना से पूरे देश में गुस्सा फैल गया, जिससे हॉस्पिटल की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे. इसके अलावा, पूरे साल फैक्ट्रियों, घरों और बाजारों में कई आग लगने की घटनाएं हुईं. 2024 में दिल्ली में आग लगने की घटनाओं में कुल 116 लोगों की मौत हुई.
15 फरवरी, 2024 को नॉर्थ दिल्ली के अलीपुर इलाके में एक पेंट फैक्ट्री में आग लगने से 11 लोगों की मौत हो गई और 4 लोग घायल हो गए. यह धमाका एक गैर-कानूनी केमिकल और पेंट मिक्सिंग फैक्ट्री में वेल्डिंग की चिंगारी से हुआ था.
2023 में 59 मौतें
2023 में, दिल्ली फायर सर्विस को आग से जुड़ी 15,000 से ज्यादा कॉल आईं. इस दौरान, कई रिहायशी इमारतों, दुकानों और इंडस्ट्रियल इलाकों में आग लग गई. हालांकि किसी एक घटना में बड़ी संख्या में मौतें नहीं हुईं, लेकिन पूरे साल छोटी-बड़ी घटनाएं होती रहीं. 2023 में आग लगने की घटनाओं में कुल 59 लोगों की मौत हुई.
2022 में मुंडका फैक्ट्री में आग
13 मई, 2022 को वेस्ट दिल्ली के मुंडका इलाके में एक चार मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में भीषण आग लग गई. बिल्डिंग में एक इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली कंपनी थी. आग इतनी तेजी से फैली कि सभी कर्मचारी अंदर फंस गए. कई लोग अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूद गए. इस घटना में 27 लोगों की मौत हो गई, जिससे यह दिल्ली की सबसे भयानक आग में से एक बन गई.

2021 में महामारी के बीच अस्पतालों में आग
COVID-19 महामारी के दौरान अस्पतालों पर बहुत ज्यादा दबाव था. राजधानी दिल्ली में कई अस्पतालों और COVID सुविधाओं में आग लग गई. कई मामलों में, मरीजों को रातों-रात शिफ्ट करना पड़ा. हालांकि, समय पर बचाव अभियान से जान-माल का बड़ा नुकसान टल गया. 2021 में आग लगने की घटनाओं में कई लोगों की मौत हुई.
2019 और 2020 में अनाज मंडी में लगी भयानक आग
दिल्ली के इतिहास के सबसे दुखद हादसों में से एक 8 दिसंबर, 2019 को हुआ. पुरानी दिल्ली के अनाज मंडी इलाके में एक फैक्ट्री में आग लग गई. बड़ी संख्या में मजदूर बिल्डिंग के अंदर सो रहे थे. बिल्डिंग में धुआं भर गया, जिससे वे बाहर नहीं निकल पाए. इस हादसे में 43 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए. इसे दिल्ली की सबसे भयानक आग में से एक माना जाता है. अकेले 2019 में अनाज मंडी हादसे में 43 लोगों की जान चली गई थी.

2020 में दिल्ली भर के गोदामों, झुग्गियों और बाजारों में भी कई आग लगने की घटनाएं हुईं. लॉकडाउन के दौरान, बंद इमारतों में शॉर्ट सर्किट से आग लगने के कई मामले सामने आए.
2018 में बवाना फैक्ट्री में लगी आग
जनवरी 2018 में बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में एक पटाखा और प्लास्टिक फैक्ट्री में भीषण आग लग गई थी. आग लगने के बाद मजदूर भाग नहीं पाए और 17 लोगों की मौत हो गई. कई मजदूर घायल भी हुए थे. जांच में सुरक्षा उल्लंघन का पता चला. बवाना फैक्ट्री में आग 2018 की सबसे बड़ी आपदा थी.
2016 और 2017 में बाजारों और फैक्ट्रियों में लगी आग
2017 में नरेला, बवाना और ओखला जैसे इंडस्ट्रियल एरिया में कई आग की घटनाएं सामने आईं. ज्यादातर घटनाओं में फैक्ट्रियां और गोदाम प्रभावित हुए. फायर डिपार्टमेंट को हजोरों कॉल आए और कई मजदूर घायल हुए. 2016 में दिल्ली के कई बाजारों, गोदामों और फैक्ट्रियों में आग लगी. चांदनी चौक, सदर बाजार और इंडस्ट्रियल एरिया में आग लगने से बिजनेस को काफी नुकसान हुआ। हालांकि उस साल कोई बड़ी आग नहीं लगी.
| वर्ष / वित्तीय वर्ष | केवल आग के हादसों में हुई मौतें |
|---|---|
| 2016–17 | 68 |
| 2017–18 | 82 |
| 2018–19 | 89 |
| 2019–20 | 123 |
| 2020–21 | 62 |
| 2021–22 | 94 |
| 2022–23 | 78 |
| 2023 | 63 |
| 2024 | 113 |
| 2025 | 76 |
| कुल | 848 |
आग लगने पर क्या करें
अगर आपके घर में या आसपास आग लग जाती है, तो ऐसे में घबराएं नहीं. 101 या आपातकालीन नंबर 112 तुरंत कॉल करके फायर ब्रिगेट को सूचना दें. साथ ही पुलिक को भी कॉल करें. अगर आग छोटी-मोटी है तो उसे फायर अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher) से बुझाएं. अगर ज्यादा आग लग गई है तो तुरंत वहां से निकलने की कोशिश करें. अगर किसी के कपड़ों में आग लग जाए तो तुरंत रुकें, जमीन पर लेट जाएं और अपने हाथों से अपना चेहरा ढक लें. आग बुझाने के लिए जमीन पर लोटें. अगर पास में कोई कंबल या भारी कोट हो, तो उसे पीड़ित के शरीर पर लपेट दें. बिजली से लगी आग को पानी से बुझाने की कोशिश न करें. उसे मिट्टी डालकर बुझाएं.
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