Marriage Fraud: दिल्ली पुलिस ने शादी के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड प्रदीप सिंह उर्फ प्रदीप साहू (30) को मध्य प्रदेश के ग्वालियर से गिरफ्तार किया है. छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चंपा का रहने वाला यह आरोपी सोशल मीडिया पर फर्ज़ी मैट्रिमोनियल सर्विस के विज्ञापन देकर लोगों को ठगता था. पुलिस ने बताया कि आरोपी कई शहरों में धोखाधड़ी करने वाले कॉल सेंटरों का एक बड़ा नेटवर्क चला रहा था. पुलिस ने उसके पास से कई मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड और बैंक खाते बरामद किए हैं.
अन्य सदस्यों की तलाश में जगह-जगह दबिश
पुलिस ने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जगह-जगह दबिश दी जा रही है. ठगी गई राशि का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है. यह कार्रवाई दिल्ली के पूर्वी आजाद नगर के एक पीड़ित की शिकायत और अक्टूबर 2025 में BNS की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज होने के बाद की गई. शिकायतकर्ता ने बताया कि सोशल मीडिया पर शादी-ब्याह से जुड़ी सेवाओं का विज्ञापन देखने के बाद उसने उन लोगों से संपर्क किया. पुलिस ने बताया कि उन पर भरोसा करके पीड़ित ने ठगों द्वारा दिए गए QR कोड के ज़रिए लगभग 81,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए, लेकिन बाद में उसे एहसास हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है.
‘रिश्ते गाइड सर्विसेज’ के नाम से चलता था सेंटर
जांच के दौरान पुलिस को धोखाधड़ी से ठगा गया पैसा शालिनी शिवरे नाम की महिला के बैंक खाते में मिला. आगे की जांच में पता चला कि ग्वालियर में राजकुमारी नाम की महिला एक कॉल सेंटर चलाती थी. राजकुमारी ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि प्रदीप साहू उस कॉल सेंटर का असली मालिक और उसे चलाने वाला व्यक्ति था, जो ‘रिश्ते गाइड सर्विसेज’ के नाम से चलता था. वह उसके कहने पर काम कर रही थी. प्रदीप ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि वह लगभग पांच साल से धोखाधड़ी वाले कॉल सेंटर चला रहा था और उसने ग्वालियर, गुना, अयोध्या और आज़मगढ़ में करीब 14 कॉल सेंटर खोले थे.
फोन, सिम कार्ड और डिजिटल उपकरण बरामद
आरोपी ने कथित तौर पर विज्ञापनों के जरिए कर्मचारियों को काम पर रखा और उन्हें शादी के लिए रिश्ते ढूंढ रहे लोगों को टारगेट करने की ट्रेनिंग दी. पुलिस ने बताया कि पीड़ितों को झूठे वादे करके फंसाया जाता था और उनसे रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोफ़ाइल एक्टिवेशन चार्ज और दूसरी मनगढ़ंत सर्विस फीस ली जाती थी. पुलिस ने बताया कि यह गैंग आमतौर पर हर पीड़ित से 5,000 से 10,000 रुपये के बीच की छोटी रकम वसूलता था, ताकि शिकायत दर्ज होने की संभावना कम रहे. पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान मिले मोबाइल फोन, सिम कार्ड और दूसरे डिजिटल सबूतों से इस रैकेट के दायरे के बारे में अहम सुराग मिले हैं. पुलिस ने बताया कि अब तक उन्होंने इस रैकेट से जुड़े आठ धोखाधड़ी वाले ट्रांज़ैक्शन का पता लगाया है.
UP पुलिस में नौकरी देने वाले गिरोह का भंडाफोड़ः जौनपुर से STF ने दो को दबोचा, वसूल रहे थे मोटी रकम
News Source: PTI
