Commonwealth Games : स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के समापन समारोह में रविवार को एक ऐतिहासिक पल देखने को मिलेगा. समापन समारोह के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स का ध्वज और होस्ट बैटन औपचारिक रूप से अहमदाबाद को सौंपा जाएगा. इसके साथ ही भारत के अहमदाबाद शहर की कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी की आधिकारिक शुरुआत हो जाएगी. यह अवसर इसलिए भी बेहद खास होगा क्योंकि वर्ष 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करेगी और इस ऐतिहासिक शताब्दी संस्करण की मेजबानी अहमदाबाद करेगा.
विभिन्न एजेंसियों ने तेज कर दी हैं तैयारियां
पहला कॉमनवेल्थ गेम्स वर्ष 1930 में कनाडा के हैमिल्टन शहर में आयोजित हुई थी. अब ठीक 100 वर्ष बाद भारत का अहमदाबाद इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय खेल महाकुंभ की मेजबानी करेगा. इसे लेकर गुजरात सरकार और विभिन्न एजेंसियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं. खेल अवसंरचना के साथ-साथ शहर के विकास, परिवहन, पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. ग्लासगो में आयोजित समापन समारोह में गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी शामिल होंगे. समापन समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, संगीत और पारंपरिक कार्यक्रमों के बीच आधिकारिक हैंडओवर सेरेमनी आयोजित की जाएगी.
अहमदाबाद 2030 की पहली झलक भी दिखाई
इसी दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स का ध्वज और होस्ट बैटन अहमदाबाद को सौंपा जाएगा. यह क्षण अहमदाबाद की वैश्विक खेल राजधानी बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है. समापन समारोह के दौरान ग्लासगो के दर्शकों को अहमदाबाद 2030 की पहली झलक भी दिखाई जाएगी. आयोजकों ने बताया है कि इस विशेष प्रस्तुति के जरिए दुनिया को यह संदेश दिया जाएगा कि भारत वर्ष 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स के शताब्दी संस्करण की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है.
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74 देशों की यात्रा करती है किंग्स बैटन
कॉमनवेल्थ गेम्स की सबसे खास परंपराओं में से एक किंग्स बैटन रिले है. यह केवल एक बैटन नहीं, बल्कि कॉमनवेल्थ देशों की एकता, संस्कृति और साझी विरासत का प्रतीक मानी जाती है. इस बार यह बैटन कॉमनवेल्थ के सभी 74 देशों और क्षेत्रों की यात्रा करेगी. कॉमनवेल्थ संगठन के अनुसार, इस बार प्रत्येक देश और क्षेत्र के लिए अलग बैटन तैयार किया जाएगा. सभी देश अपनी संस्कृति, कला और परंपरा के अनुसार बैटन को सजाएंगे और उसे अपनी पहचान का प्रतीक बनाएंगे. प्रत्येक बैटन में हिज मैजेस्टी किंग चार्ल्स तृतीय का विशेष संदेश भी शामिल रहेगा, जिसे खेलों के उद्घाटन अवसर पर पढ़ा जाएगा. बैटन को लेकर चलने वाले लोग भी विशेष रूप से चुने जाते हैं. ये ऐसे प्रेरणादायी व्यक्ति होते हैं जिन्होंने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया हो.
इतिहास में पहली बार सभी 74 देशों और क्षेत्रों को अपनी-अपनी सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप अलग बैटन तैयार करने और उसे प्रदर्शित करने का अवसर दिया गया है. कॉमनवेल्थ बैटन रिले की शुरुआत वर्ष 1958 में कार्डिफ से हुई थी. बैटन की ऊंचाई लगभग 470 मिलीमीटर और प्रत्येक दिशा में इसकी चौड़ाई करीब 70 मिलीमीटर होती है.
तीन एक्ट में दिखेगी भारत की सांस्कृतिक विरासत
ग्लासगो 2026 के समापन समारोह में होने वाला हैंडओवर सेगमेंट तीन विशेष एक्ट में प्रस्तुत किया जाएगा. पहला एक्ट ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में होगा. इस प्रस्तुति के जरिए भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय विरासत को सम्मान दिया जाएगा. दूसरे एक्ट में भारतीय सितार वादक ऋषभ रिखीराम शर्मा और स्कॉटिश पाइप वादक रॉस एन्सली की अनूठी जुगलबंदी देखने को मिलेगी. यह प्रस्तुति ग्लासगो 2026 और अहमदाबाद 2030 के बीच सांस्कृतिक सेतु का प्रतीक होगी. तीसरे और अंतिम एक्ट में पूरे भारत की सांस्कृतिक यात्रा प्रस्तुत की जाएगी, जिसमें विशेष रूप से गुजरात की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराएं, विरासत और आधुनिक विकास को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा.
ग्लासगो 2026 की चीफ मार्केटिंग एंड सेरेमनी ऑफिसर लुईसा मेहोन ने कहा कि यह हैंडओवर केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि दो देशों की संस्कृति और भावनाओं को जोड़ने वाला ऐतिहासिक अवसर है. उन्होंने कहा कि समापन समारोह के माध्यम से ग्लासगो के दर्शकों को पहली बार अहमदाबाद 2030 की भव्य झलक देखने को मिलेगी. वहीं, ग्लासगो 2026 के सेरेमनी डायरेक्टर चंदा सिंह ने कहा कि उनका उद्देश्य दुनिया के सामने ऐसा भारत प्रस्तुत करना है जो आत्मविश्वास से भरा हो, अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा हो और भविष्य की वैश्विक खेल मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार हो. उन्होंने कहा कि अहमदाबाद 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की शताब्दी का आयोजन करेगा और यह समापन समारोह उसी ऐतिहासिक यात्रा का पहला अध्याय साबित होगा.
