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इंटरनल सर्वे के बाद एक्शन में BJP: 2027 से पहले फ्रंटफुट पर योगी, विपक्ष पर बढ़ा चुनावी दबाव

by Dheeraj Tripathi 1 August 2026, 7:32 PM IST (Updated 1 August 2026, 7:33 PM IST)
1 August 2026, 7:32 PM IST (Updated 1 August 2026, 7:33 PM IST)
इंटरनल सर्वे के अलर्ट के बाद एक्शन में भाजपाः 2027 से पहले फ्रंटफुट पर योगी, विपक्ष पर बढ़ाया चुनावी दबाव

BJP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन सियासी तैयारी अपने चरम पर पहुंचती दिख रही है. भाजपा के एक आंतरिक सर्वे में पार्टी को करीब 70 सीटों तक नुकसान और करीब 35 फीसदी विधायकों के टिकट बदलने के सुझावों की खबरों के बीच भाजपा ने चुनावी मोर्चे पर पूरी ताकत झोंक दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक सहित प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी लगातार प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा कर रहे हैं, तो प्रदेश संगठन और पूरी सरकार भी बूथ से लेकर विधानसभा स्तर तक सक्रिय नजर आ रही है. दूसरी ओर समाजवादी पार्टी इसे भाजपा की घबराहट बता रही है.

सर्वे में कई विधायकों के खिलाफ नाराजगी

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भाजपा ने चुनावी तैयारियों की रफ्तार तेज कर दी है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना भाजपा का कथित आंतरिक सर्वे अब पार्टी की रणनीति को भी प्रभावित करता दिख रहा है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 403 विधानसभा सीटों पर कराए गए फीडबैक सर्वे में संकेत मिला है कि मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव होने पर भाजपा को करीब 70 सीटों तक का नुकसान हो सकता है. सर्वे रिपोर्ट में कई मौजूदा विधायकों के खिलाफ स्थानीय नाराजगी और एंटी इनकम्बेंसी का असर सामने आने की बात कही गई है.

इसी आधार पर करीब 35 प्रतिशत मौजूदा विधायकों के टिकट बदलने की सिफारिश भी बताई जा रही है. सूत्रों के अनुसार सर्वे में संगठन, सरकार और जनप्रतिनिधियों के प्रदर्शन का अलग-अलग मूल्यांकन किया गया. बूथ स्तर से लेकर विधानसभा स्तर तक फीडबैक लेने के बाद कमजोर सीटों की पहचान और स्थानीय मुद्दों के समाधान पर जोर देने की रणनीति बनाई जा रही है. इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार चुनावी मोड में दिखाई दे रहे हैं. पिछले करीब दो महीनों में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 18 मंडलों की 100 से अधिक विधानसभा सीटों तक पहुंचकर जनसभाएं, संवाद और जनसंपर्क अभियान चलाया है. लगभग 45 दिनों में पूर्वांचल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड तक व्यापक दौरे किए गए.

फिर सरकार बनाने का दावा

केवल मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, मंत्रिमंडल के सदस्य और भाजपा संगठन भी जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में लगातार सक्रिय हैं. बूथ प्रबंधन, संगठन विस्तार, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और स्थानीय समस्याओं के समाधान पर विशेष फोकस किया जा रहा है. राजनीतिक संदेश भी साफ है कि भाजपा किसी भी संभावित एंटी-इनकम्बेंसी को चुनाव से पहले ही कम करने की कोशिश में जुटी है. भाजपा प्रवक्ता हीरो बाजपेई कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी लगातार जनता के बीच रहती है. मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्री और संगठन लगातार फीडबैक लेते हैं. जहां कमी मिलती है, उसे दूर करने का प्रयास होता है. भाजपा ही ऐसी पार्टी है जो लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद जनता के बीच जाने का साहस रखती है. 2027 में भी योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनेगी.

सरकार के खिलाफ जनता में नाराजगीः एसपी

हालांकि विपक्ष भाजपा की इस सक्रियता को चुनावी दबाव का परिणाम बता रहा है. समाजवादी पार्टी का कहना है कि भाजपा सरकार के खिलाफ जनता में नाराजगी बढ़ रही है और मुख्यमंत्री जनसभाओं में सरकार की उपलब्धियों के बजाय धार्मिक और सांप्रदायिक मुद्दों पर ज्यादा जोर दे रहे हैं. सपा का दावा है कि पेपर लीक, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और महंगाई जैसे मुद्दों पर जनता सरकार से जवाब चाहती है.
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आजम खान कहते हैं कि भाजपा की लोकप्रियता लगातार घट रही है. पेपर लीक, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं से जनता परेशान है. मुख्यमंत्री फ्रंटफुट पर जरूर हैं, लेकिन जनता अब बुनियादी मुद्दों पर जवाब चाहती है. केवल धार्मिक मुद्दों से चुनाव नहीं जीता जा सकता.

कमजोर क्षेत्रों पर विशेष फोकस

वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के कुछ विवादों और स्थानीय मुद्दों का असर भाजपा की छवि पर पड़ा है. ऐसे में पार्टी समय रहते संगठन और सरकार दोनों को सक्रिय कर नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर रही है. विश्लेषकों के अनुसार भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका कैडर और बूथ नेटवर्क रहा है, इसलिए पार्टी चुनाव से पहले फीडबैक के आधार पर रणनीति बदलने और कमजोर क्षेत्रों पर विशेष फोकस करने की कोशिश कर रही है. वरिष्ठ पत्रकार राजनीतिक विश्लेषक रतिभान त्रिपाठी कहते हैं कि हाल के कुछ मुद्दों से भाजपा की छवि प्रभावित हुई है.

पार्टी ने इसे गंभीरता से भी लिया है और मुख्यमंत्री लगातार विधानसभा क्षेत्रों में जा रहे हैं. भाजपा की संगठनात्मक ताकत उसकी सबसे बड़ी पूंजी है और चुनाव से पहले वह कमजोरियों को काफी हद तक दूर करने की कोशिश करेगी. भाजपा का आंतरिक सर्वे अभी आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन पार्टी की बढ़ी हुई सक्रियता यह संकेत जरूर देती है कि संगठन चुनाव 2027 को लेकर कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है. दूसरी ओर विपक्ष इसे भाजपा की घबराहट बता रहा है. ऐसे में आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता के बीच बढ़ी राजनीतिक सक्रियता का फायदा किस दल को मिलता है.

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