Gujarat News : गुजरात में अच्छी बारिश के बाद खरीफ सीजन 2026 की बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली है. कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार राज्य में अब तक सामान्य बुवाई क्षेत्र का करीब 70 प्रतिशत यानी 59.26 लाख हेक्टेयर क्षेत्र बुवाई के दायरे में आ चुका है. इस बार भी किसानों का सबसे अधिक रुझान कपास और मूंगफली जैसी नकदी एवं तिलहनी फसलों की ओर देखने को मिला है. कुल बुवाई में इन दोनों फसलों की हिस्सेदारी 63 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है.
20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई
आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में सबसे अधिक 20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई है, जबकि 17.50 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में मूंगफली की खेती की गई है. इससे साफ संकेत मिलता है कि गुजरात के किसान इस बार भी नकदी और तिलहनी फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं. वहीं, सोयाबीन की बुवाई में इस वर्ष उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सामान्य बुवाई क्षेत्र की तुलना में अब तक 99 प्रतिशत यानी 2.79 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई पूरी हो चुकी है. इसके अलावा सामान्य क्षेत्र की तुलना में मूंगफली की 91 प्रतिशत, मक्का की 90 प्रतिशत, उड़द की 86 प्रतिशत और कपास की 84 प्रतिशत बुवाई पूरी हो चुकी है.
मक्का की खेती दूसरे स्थान पर
वहीं, दलहनी फसलों की बात करें तो इस वर्ष पिछले साल की तुलना में सुधार देखने को मिला है. पिछले वर्ष इसी अवधि तक दलहनी फसलों की बुवाई 2.52 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जो इस वर्ष बढ़कर 2.85 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है. यह सामान्य बुवाई क्षेत्र का लगभग 68 प्रतिशत है. दलहनी फसलों में अरहर की बुवाई 1.94 लाख हेक्टेयर यानी 76 प्रतिशत और उड़द की 70,772 हेक्टेयर यानी 86 प्रतिशत क्षेत्र में हुई है. हालांकि, मूंग की बुवाई फिलहाल केवल 11,900 हेक्टेयर यानी 21 प्रतिशत क्षेत्र तक ही सीमित है. राज्य में धान की फसल की कुल 8.39 लाख हेक्टेयर यानी 61 प्रतिशत क्षेत्र में बुवाई दर्ज की गई है. इनमें 4.63 लाख हेक्टेयर के साथ धान पहले स्थान पर है, जबकि 2.54 लाख हेक्टेयर में मक्का की खेती दूसरे स्थान पर है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि धान रोपाई आधारित फसल होने के कारण आने वाले दिनों में इसके रकबे में और बढ़ोतरी होने की संभावना है. ज्वार की खेती में भी इस वर्ष उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. इस बार ज्वार की बुवाई 10,301 हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा केवल 4,319 हेक्टेयर था.
तिल की बुवाई 7,597 हेक्टेयर क्षेत्र में हुई
इसके अलावा राज्य में फिलहाल अरंडी (कैस्टर) की बुवाई 52,655 हेक्टेयर तथा तिल की बुवाई 7,597 हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है. अरंडी की बुवाई मुख्य रूप से अगस्त महीने में होती है, इसलिए आगामी दो सप्ताह में इसके रकबे में तेजी से वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है. अन्य फसलों की बात करें तो गुजरात में इस वर्ष 5.21 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में चारा फसलों की बुवाई हुई है. वहीं, 1.71 लाख हेक्टेयर में सब्जियों और 1.06 लाख हेक्टेयर में बाजरे की बुवाई पूरी हो चुकी है. कृषि विभाग का मानना है कि यदि आगामी दिनों में मानसून की स्थिति अनुकूल बनी रहती है तो खरीफ सीजन की बुवाई निर्धारित लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है. अच्छी वर्षा और किसानों की सक्रियता को देखते हुए इस वर्ष गुजरात में खरीफ फसलों के बेहतर उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है.
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