Gujarat News: अहमदाबाद सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने एक 31 वर्षीय महिला की बेहद जटिल लैप्रोस्कोपिक सर्जरी सफलतापूर्वक की है. महिला के पित्ताशय में गंभीर सूजन थी और वह आसपास के कई महत्वपूर्ण अंगों से बुरी तरह चिपक गया था. ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में भी डॉक्टरों ने दूरबीन पद्धति से पित्ताशय को सुरक्षित बाहर निकाल दिया. सर्जरी के दौरान पित्ताशय से लगभग 400 छोटी पथरियां और 60 से 70 मिलीलीटर मवाद निकाला गया. सर्जरी के बाद महिला की स्थिति अच्छी बताई जा रही है. अहमदाबाद सिविल अस्पताल के जनरल सर्जरी विभाग की टीम ने यह जटिल ऑपरेशन 10 अक्टूबर 2026 को किया. इस सर्जरी में डॉ. प्रशांत मेहता और डॉ. विक्रम मेहता के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम शामिल रही.
मरीज की आवश्यक जांच और तैयारियां पूरी कीं
वहीं, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. चिराग पटेल और उनकी टीम ने ऑपरेशन से पहले मरीज की आवश्यक जांच और तैयारियां पूरी कीं. मरीज को 5 अक्टूबर को पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में तेज दर्द, बुखार और उल्टी की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जांच के दौरान पता चला कि महिला के पित्ताशय में गंभीर सूजन थी. पित्ताशय काफी फूल गया था और उसकी दीवार मोटी हो गई थी. इसके अंदर कई छोटी-छोटी पथरियां मौजूद थीं. इसके अलावा, आसपास की आंतों पर भी सूजन का असर दिखाई दे रहा था. महिला की मेडिकल हिस्ट्री भी काफी जटिल थी. अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, भर्ती होने से पहले महिला को पित्ताशय में पथरी के कारण अग्न्याशय यानी पैंक्रियाज में सूजन की समस्या हुई थी. इसी दौरान उनका आठ सप्ताह का गर्भ मिस्ड एबॉर्शन के कारण समाप्त करना पड़ा था.
आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया की गई थी
उपचार के दौरान 1 सितंबर को एंडोस्कोपिक रेट्रोग्रेड कोलैंजियोपैंक्रिएटोग्राफी (ERCP) प्रक्रिया के माध्यम से पित्त नली से पथरी निकाली गई थी और उसमें स्टेंट लगाया गया था. इसके बाद 7 सितंबर को मिस्ड एबॉर्शन के लिए आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया की गई थी. कुछ दिनों बाद महिला को फिर से पेट में परेशानी होने लगी. इसके बाद उन्हें अहमदाबाद सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया. यहां सोनोग्राफी और सीटी स्कैन सहित आवश्यक जांच की गई. जांच में पित्ताशय की गंभीर स्थिति सामने आने के बाद डॉक्टरों ने सर्जरी करने का निर्णय लिया.
सर्जरी के दौरान डॉक्टरों के सामने बड़ी चुनौतियां
ऑपरेशन से पहले महिला में खून की कमी पाई गई थी. इसे देखते हुए सर्जरी से पहले उन्हें दो यूनिट पैक्ड सेल वॉल्यूम (PCV) चढ़ाए गए. इसके बाद एनेस्थीसिया विभाग की टीम ने मरीज की स्थिति का आकलन किया और ऑपरेशन के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी कीं. सर्जरी के दौरान डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पित्ताशय का आसपास के अंगों से बुरी तरह चिपक जाना था. गंभीर सूजन के कारण पित्ताशय ओमेंटम, ड्यूओडेनम, बड़ी आंत और छोटी आंत से जुड़ गया था. ऐसी स्थिति में ऑपरेशन करते समय आसपास के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है. इसलिए डॉक्टरों को बेहद सावधानी के साथ पित्ताशय को अलग करना पड़ा.
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पित्ताशय से निकलीं 40 छोटी पथरियां
सर्जिकल टीम ने आधुनिक लैप्रोस्कोपिक तकनीक और चिकित्सकीय कौशल का इस्तेमाल करते हुए आसपास के अंगों को सुरक्षित रखते हुए पित्ताशय को अलग किया. इसके बाद पित्ताशय की नली और रक्त वाहिका को क्लिप करके उसे दूरबीन पद्धति से बाहर निकाल लिया गया. ऑपरेशन के दौरान पित्ताशय से लगभग 400 छोटी पथरियां और 60 से 70 मिलीलीटर मवाद निकला. निकाले गए पित्ताशय को आगे की हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए भेजा गया है. सर्जरी के बाद महिला की स्थिति में सुधार हुआ. अस्पताल के अनुसार, ऑपरेशन के अगले ही दिन उन्हें तरल आहार देना शुरू कर दिया गया था. फिलहाल मरीज की स्थिति अच्छी है और वह स्वस्थ बताई जा रही है.
सर्जिकल तकनीक से ऑपरेशन सफल किया
इस सफल ऑपरेशन को लेकर अहमदाबाद सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. राकेश जोशी ने कहा कि अस्पताल की टीम जटिल बीमारियों से पीड़ित मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के माध्यम से बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने बताया कि मरीज के मामले में पहले अग्न्याशय में सूजन, पित्त नली में स्टेंट और पित्ताशय का आसपास के अंगों से चिपकना जैसी कई जटिलताएं थीं. इसके बावजूद डॉक्टरों ने उचित योजना और आधुनिक सर्जिकल तकनीक की मदद से सफल ऑपरेशन किया. डॉ. राकेश जोशी ने लोगों से अपील की कि पेट में बार-बार दर्द होने, उल्टी, बुखार या पाचन संबंधी समस्याओं को सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें. ऐसे लक्षण पित्ताशय में पथरी, पित्ताशय में सूजन, अग्न्याशय की समस्या या दूसरी गंभीर बीमारियों के संकेत हो सकते हैं. समय पर चिकित्सकीय सलाह और उचित उपचार लेने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है.
