Farmers March: किसानों के पैदल मार्च को देखते हुए हरियाणा में खनौरी अंतरराज्यीय बॉर्डर को सील कर दिया गया. हरियाणा पुलिस ने रविवार को अंतरराज्यीय बॉर्डर पर कई लेयर वाली बैरिकेडिंग की और इसे सील कर दिया, क्योंकि संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के बैनर तले किसान खनौरी-दाता सिंह वाला बॉर्डर से हरियाणा में घुसने के लिए इकट्ठा हुए थे.संयुक्त किसान मोर्चा ने हरियाणा-पंजाब बॉर्डर पर दाता सिंह वाला गांव से दिल्ली के जंतर-मंतर तक 228 किलोमीटर लंबी ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ का आह्वान किया था, जो 29 अगस्त को राष्ट्रीय राजधानी में किसानों की पंचायत के साथ खत्म होगी.
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध
यह पदयात्रा प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीद की कानूनी गारंटी की मांग के लिए आयोजित की गई है. किसानों के आह्वान को देखते हुए हरियाणा पुलिस ने हरियाणा-पंजाब बॉर्डर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. खनौरी अंतर-राज्यीय बॉर्डर के हरियाणा वाले हिस्से में अधिकारियों ने कंक्रीट के बैरिकेड लगाए हैं. दंगा-रोधी वाहन तैनात किए हैं और कंटीले तार भी लगाए हैं. जींद जिले के एक पुलिस अधिकारी ने रविवार को कहा कि किसानों के पास मार्च निकालने की अनुमति नहीं है. मोर्चा नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने अंतर-राज्यीय बॉर्डर के पंजाब वाले हिस्से में पत्रकारों को बताया कि देश के अलग-अलग हिस्सों से 51 किसान इस मार्च में हिस्सा लेंगे. उन्होंने कहा कि पैदल मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण और अनुशासित रहेगा.
सरकार को बताया किसान विरोधी
किसान मोर्चा के लगभग 200 स्वयंसेवक और समर्थक भी उनके साथ होंगे. हरियाणा में सुरक्षा व्यवस्था के बारे में पूछे जाने पर डल्लेवाल ने कहा कि इस बैरिकेडिंग ने BJP सरकार की असलियत उजागर कर दी है. पहले भी उन्हें तब दिक्कत होती थी जब किसान ट्रैक्टर लेकर आते थे. अब, जब किसानों का एक छोटा समूह पैदल दिल्ली जाना चाहता है, तब भी उन्हें दिक्कत हो रही है और वे हमें आगे नहीं बढ़ने दे रहे हैं. इससे सरकार का किसान-विरोधी चेहरा सामने आता है. उन्होंने कहा कि हमारी योजना शांतिपूर्वक आगे बढ़ने की थी, लेकिन उन्होंने बहुत भारी बैरिकेडिंग कर दी है. अब सभी को पता होना चाहिए कि सड़कें किसान नहीं, बल्कि सरकार रोकती है. डल्लेवाल ने यह भी दावा किया कि खनौरी से शुरू होने वाले मार्च से पहले हरियाणा पुलिस ने संगठन के कुछ नेताओं को अलग-अलग जगहों पर हिरासत में ले लिया.
ट्रेड डील पर उठाए सवाल
प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बारे में उन्होंने कहा कि इसका भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र पर बुरा असर पड़ेगा. उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित व्यापार समझौते से भारत में सस्ता कृषि आयात हो सकेगा, जिससे घरेलू किसानों की आय और देश की कृषि अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी. डल्लेवाल ने कहा कि सरकार को लगता है कि अगर किसान दिल्ली पहुंच गए, तो वे ट्रेड डील पर ऐसे सवाल उठाएंगे जिनका सरकार के पास कोई जवाब नहीं होगा. यह मार्च ‘दाता सिंह वाला’ से शुरू होगा और जंतर-मंतर पहुंचने से पहले नरवाना, उचाना, खटकर टोल, जींद, लुदाना, गोहाना, इसराना, समालखा और सिंघु बॉर्डर से होकर गुज़रेगा. इस मार्च की मुख्य मांगों में खेती, डेयरी, पोल्ट्री, मछली पालन और इससे जुड़े दूसरे सेक्टर को प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट से बाहर रखना है.
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News Source: PTI
