Hospital Surprise Inspection: राजधानी रांची में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच क्लीनिकल पीसीपीएनडीटी के सहायक नोडल पदाधिकारी डॉ. रचित और उनकी टीम द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं. हाल ही में लाइव टाइम्स ने सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी और निजी अस्पतालों में व्याप्त अनियमितताओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था. इसके बाद लगातार निरीक्षण अभियान चलाया गया, जिसमें तीन अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं.
मरीजों को परोसा जा रहा था एक्सपायर्ड खाना
निरीक्षण के दौरान खरसिदाग स्थित पुनःस्थापना नशा मुक्ति केंद्र में नियमों की खुलेआम अनदेखी मिली. केंद्र में न तो अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे और न ही प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध था. डॉक्टरों के नियमित विजिट का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला. मरीजों को एक्सपायरी खाद्य सामग्री से बना भोजन परोसे जाने की बात सामने आई. 50 बेड होने का दावा करने वाले केंद्र में मरीज फर्श पर सोते और बैठे मिले. रसोई और खाद्य भंडारण क्षेत्र में कीड़े पाए गए तथा स्वच्छ पेयजल और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था का भी अभाव मिला. आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से संबंधित दस्तावेज और आवश्यक एनओसी भी प्रस्तुत नहीं किए जा सके.
दस्तावेज गायब
इसके बाद टीम ने चुटिया स्थित अमित मेडिकल हॉल का निरीक्षण किया. यहां क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट पंजीकरण, अग्नि सुरक्षा और बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे. निरीक्षण के दौरान एक व्यक्ति स्वयं को अपोलो ग्रुप का चिकित्सक बताकर मरीजों का इलाज करता मिला, लेकिन वह झारखंड मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण अथवा अपोलो ग्रुप से जुड़े होने का कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका. टीम ने इसे गंभीर मामला मानते हुए विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है.
आपातकालीन सेवाओं के नंबर गायब
वहीं 5 सितंबर को किए गए निरीक्षण में भगवान महावीर मणिपाल अस्पताल में भी कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं. अस्पताल में विभिन्न सेवाओं की शुल्क सूची, डॉक्टरों की ड्यूटी टाइमिंग और रक्त बैंक, पुलिस, अग्निशमन एवं एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं के संपर्क नंबर प्रदर्शित नहीं थे. ग्राउंड फ्लोर के शौचालय गंदे पाए गए. कैंटीन में खाद्य पदार्थों की दर सूची नहीं थी और कई खाद्य सामग्री की निर्माण एवं एक्सपायरी संबंधी जानकारी भी उपलब्ध नहीं थी. फार्मेसी में दवा के डिब्बे फर्श पर रखे मिले तथा गैर-फार्मासिस्ट द्वारा मरीजों को दवाएं वितरित किए जाने का मामला भी सामने आया. अस्पताल की रसोई, ब्लड डोनेशन रूम और अन्य विभागों में भी स्वच्छता और रखरखाव संबंधी कई कमियां मिलीं. मरीजों के परिजनों ने नर्सिंग और बिलिंग व्यवस्था को लेकर भी शिकायतें दर्ज कराईं.
रिपोर्ट तैयार कर की जाएगा कार्रवाई
निरीक्षण के बाद डॉ. रचित ने कहा कि जिन संस्थानों की जांच की गई, उनमें मरीजों की सुरक्षा, स्वच्छता, अग्नि सुरक्षा, रिकॉर्ड संधारण और चिकित्सा मानकों से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं मिली हैं. क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट का उल्लंघन किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है. सभी मामलों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है तथा दोषी पाए जाने वाले संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी, ताकि मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें.
-शौर्य विशाल की रिपोर्ट
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