Datia By Election: दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है. गुरुवार यानी 16 जुलाई का दिन इस चुनावी समर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. एक तरफ जहां गुरुवार को नामांकन वापसी का आखिरी दिन है, तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस आज से ही अपने 15 दिनों के महा प्रचार अभियान का शंखनाद करने जा रही है. 30 जुलाई को होने वाले मतदान के लिए राजनीतिक दलों के साथ-साथ निर्वाचन आयोग ने भी अपनी तैयारियां पूरी तरह चाक-चौबंद कर ली हैं.
25 प्रत्याशी मैदान में
दतिया उपचुनाव के लिए नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. इस चुनाव के लिए कुल 29 उम्मीदवारों ने 32 नामांकन पर्चे दाखिल किए थे. भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी ने 2 सेट में और कांग्रेस प्रत्याशी ने 3 सेट में अपने नामांकन दाखिल किए हैं. स्क्रूटनी के दौरान 4 निर्दलीय और छोटे दलों के उम्मीदवारों के नामांकन खारिज कर दिए गए, जिसके बाद मैदान में 25 प्रत्याशी बचे हैं. 16 जुलाई को नाम वापसी का समय खत्म होने के बाद अंतिम चुनावी मुकाबला तय हो जाएगा.
उतरी 40 स्टार प्रचारकों की फौज
दतिया फतह करने के लिए कांग्रेस ने एक अभेद्य चक्रव्यूह तैयार किया है, जिस पर 16 जुलाई से मैदानी काम शुरू हो गया है. पार्टी ने 30 जुलाई को होने वाली वोटिंग को ध्यान में रखते हुए 40 स्टार प्रचारकों की फौज उतारी है. इसके साथ ही जातिगत समीकरणों को साधने के लिए शेष विधायकों और 30 जिला अध्यक्षों की सूची बनाई गई है, जो 30 जुलाई तक दतिया में ही डेरा डालेंगे.
जातिगत समीकरणों की कमान
विधायक फूल सिंह बैरया, सिद्धार्थ कुशवाह, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, प्रियव्रत सिंह और सचिन यादव समेत करीब 10 प्रमुख नेता दतिया में 10 अलग-अलग जातियों को साधने के लिए मोर्चा संभाल रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी गुरुवार से दतिया चुनाव में पूरी तरह सक्रिय हो रहे हैं. वहीं प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी पूरे समय मध्य प्रदेश में रहकर मॉनिटरिंग करेंगे. नेता प्रतिपक्ष भी विधानसभा सत्र की समाप्ति के बाद दतिया में ही समय बिताएंगे.
रैलियों का दौर
25 जुलाई से कांग्रेस के तमाम शीर्ष नेता दतिया में ही रुकेंगे, जहां वोटिंग से पहले 5 बड़ी रैलियां और दर्जनों आम सभाएं करने की योजना है. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव झा ने बुधवार को वर्चुअल बैठक के जरिए दतिया जिला प्रशासन को कड़े निर्देश जारी किए हैं. चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर ये बड़े कदम उठाए गए हैं. निष्पक्ष और सुचारु चुनाव संपन्न कराने के लिए दतिया के सभी सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी गई हैं.
रैली, आमसभा, जुलूस या लाउडस्पीकर के उपयोग के लिए अब रिटर्निंग अधिकारी से पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा. चुनावी खर्च और आदर्श आचार संहिता की सख्त निगरानी के लिए एसएसटी, वीएसटी, फ्लाइंग स्क्वाड और एमसीएमसी टीमें मैदान में मुस्तैद हैं. सी-विजिल ऐप पर मिलने वाली आचार संहिता उल्लंघन की किसी भी शिकायत पर प्रशासन महज 100 मिनट के भीतर एक्शन लेगा. 17 जुलाई को ईवीएम और वीवीपैट मशीनों का द्वितीय रैंडमाइजेशन किया जाएगा.
मध्य प्रदेश के बाहर के 3 बड़े अफसर बने ऑब्जर्वर
केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने दतिया चुनाव में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मध्य प्रदेश के बाहर के तीन वरिष्ठ अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को ऑब्जर्वर (पर्यवेक्षक) नियुक्त किया है. ये तीनों अधिकारी दतिया पहुंच चुके हैं और मतगणना पूरी होने तक दतिया सर्किट हाउस में रहकर सुरक्षा और खर्च पर पैनी नजर रखेंगे.
- जनरल ऑब्जर्वर: विजय भारती 2005 बैच के आईएएस अधिकारी पश्चिम बंगाल कैडर.
- पुलिस ऑब्जर्वर: के. थियागराजन 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी कर्नाटक कैडर.
- चुनावी खर्च निगरानी ऑब्जर्वर: विशाल मलानी 2015 बैच के आईआरएस अधिकारी, सेंट्रल सर्विस.
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