Home Latest News & Updates विंध्य के माथे पर लगेगा नर्मदा का तिलक! खत्म होने वाला है इंतजार, अंतिम पड़ाव पर जल-सुरंग का निर्माण

विंध्य के माथे पर लगेगा नर्मदा का तिलक! खत्म होने वाला है इंतजार, अंतिम पड़ाव पर जल-सुरंग का निर्माण

by Nitin Thakur 16 July 2026, 2:52 PM IST (Updated 16 July 2026, 2:53 PM IST)
16 July 2026, 2:52 PM IST (Updated 16 July 2026, 2:53 PM IST)
Narmada tilak adorn brow of Vindhyas

MP News : मध्य प्रदेश के सिंचाई इतिहास में बहुत जल्द एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है. विंध्य अंचल को खुशहाली और समृद्धि की नई सौगात देने के लिए कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र में निर्मित हो रही देश और प्रदेश की सबसे लंबी जल सुरंग 11.952 किलोमीटर का निर्माण कार्य अपने अंतिम पूर्णता पर पहुंच गया है. अब महज कुछ मीटर का काम ही शेष रह गया है, जिसे दिन-रात की मुस्तैदी से पूरा किया जा रहा है.

मुख्यमंत्री मोहन यादव की दृढ़ इच्छाशक्ति, प्रदेश सरकार के अटूट समर्थन और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की जुझारू टीम के अथक प्रयासों से यह नामुमकिन सा दिखने वाला प्रोजेक्ट अब हकीकत बन चुका है. नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की बरगी व्यपवर्तन परियोजना के इस सबसे अहम हिस्से के पूरा होने के बाद बरगी बांध का पानी बिना किसी पंप की सहायता के प्राकृतिक ग्रेविटी प्रवाह के माध्यम से सीधे विंध्य अंचल तक पहुंचेगा. आगामी अक्टूबर महीने से खेतों तक पानी पहुंचाने की युद्धस्तर पर तैयारी है.

नर्मदा-सोन का अमर सेतु

यह जल-सुरंग न सिर्फ इंजीनियरिंग की मिसाल है बल्कि एक सांस्कृतिक और पौराणिक स्वप्न का साकार रूप भी है. पौराणिक कथाओं के अनुसार मैकल पर्वत से निकलने वाली मां नर्मदा और सोनभद्र विपरीत दिशाओं में चले गए थे. स्लीमनाबाद टनल इस प्राचीन मिथकीय विरह को मिटाते हुए मां नर्मदा की अमृत धारा को सोन नदी की ओर जोड़ने का एक अमर सेतु बन रही है, जो विंध्य की प्यासी भूमि को सींचेगी.

1450 गांवों को वरदान

बरगी व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत जबलपुर स्थित बरगी बांध से निकलने वाली यह ट्रांस वैली कैनाल प्रदेश की सबसे ज्यादा 227 क्यूमेक डिस्चार्ज क्षमता वाली नहर है. 197 किलोमीटर लंबी इस दायीं तट मुख्य नहर के माध्यम से जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा जिले के 1450 गांवों की 2 लाख 45 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई की सुविधा मिलेगी.

जिलेवार सिंचाई का रोडमैप

  • सतना जिला: 1,04,970 हेक्टेयर
  • मैहर जिला: 54,227 हेक्टेयर
  • कटनी जिला: 21,823 हेक्टेयर
  • रीवा जिला: 3,532 हेक्टेयर
  • पन्ना जिला: 448 हेक्टेयर

इंजीनियरिंग के आगे झुका पहाड़ और थमीं बाधाएं

इस महापरियोजना का सबसे कठिन पड़ाव नर्मदा और सोन कछार को बांटने वाली विंध्य पर्वत श्रृंखला की रिज लाइन को पार करना था, जो जमीनी स्तर से 40 मीटर ऊंची है. यहां अत्यधिक गहराई और उच्च भूजल स्तर के कारण ओपन कटिंग असंभव थी. ऐसे में 10.14 मीटर व्यास वाली विशाल सुरंग का निर्माण शुरू हुआ.

साल 2011 में शुरू हुए इस कार्य में भूगर्भीय परिस्थितियों, सिंकहोल अचानक जमीन धंसना, कोरोना काल और निर्माण सामग्री की बढ़ती लागत के कारण कई चुनौतियां आईं. शुरुआती बजट 799 करोड़ रुपये से बढक़र लगभग 1442 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, लेकिन सरकार ने धन की कमी को आड़े नहीं आने दिया. जर्मनी की अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन का उपयोग कर लगभग 30 मीटर की गहराई पर खुदाई की गई. इस दौरान कठोर मार्बल, लाइमस्टोन, डोलोमाइट चट्टानों को काटते हुए मशीन के 56 कटरों को कई बार बदलना पड़ा.

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तकनीक और संवेदनशीलता का अनूठा संगम

चुनौतियां यहीं खत्म नहीं हुईं. खुदाई के दौरान 18000 से 25000 लीटर प्रति मिनट की दर से पानी का रिसाव, जहरीली कार्बन डाइऑक्साइड गैस का उत्सर्जन और अचानक मिट्टी धंसने जैसी जानलेवा परिस्थितियां सामने आईं. पूर्व में अपस्ट्रीम साइड पर काम कर रही रॉबिन्सन मशीन भी चट्टानों की कठोरता से टूट गई थी, जिसके बाद डाउनस्ट्रीम साइड से जर्मन तकनीक की टीबीएम मशीन लगाकर कार्य को पूर्णता की ओर ले जाया गया. एनवीडीए की टीम ने टैम ग्राउटिंग और उच्च क्षमता वाले डीवॉटरिंग सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रयोग कर इस पर विजय पाई.

विशेष बात यह रही कि यह सुरंग राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे लाइनों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के नीचे से सुरक्षित गुजरी और किसी भी बाहरी संरचना को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. सरकार ने प्रभावित परिवारों के अस्थायी पुनर्वास, उचित मुआवजे और सुरक्षित स्थानांतरण को पूरी संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ पूरा किया.

2027 तक हर खेत होगा सबल

  • मार्च 2026 तक: 44,160 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता निर्मित की जा चुकी है.
  • दिसंबर 2026 तक: कुल 87,433 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लक्ष्य है.
  • दिसंबर 2027 तक: कुल 1,54,693 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता पूर्ण रूप से निर्मित कर ली जाएगी.

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