MP News : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 27 जून को बड़ी घोषणाएं कीं. उन्होंने कहा कि साल 2027 को राज्य सरकार ‘युवा वर्ष’ के रूप में मनाएगी. दूसरी ओर, ‘ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट’ (GIS) भी जनवरी में भोपाल में आयोजित की जाएगी. सीएम डॉ. यादव ने ये घोषणाएं अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस-2026 पर भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित ‘सशक्त उद्यमी-समृद्ध मध्यप्रदेश समिट’ में कीं. कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के सफल उद्यमियों की विकास गाथा पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से 760 से अधिक ईकाइयों को प्रोत्सान राशि दी। उन्होंने प्रदेश के 137 स्टार्टअप्स को 1.5 करोड़ की सहायता राशि भी दी.
1274 करोड़ की वित्तीय सहायता दी गई
मध्यप्रदेश निवेश प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत वृहद उद्योगों को 1274 करोड़ की वित्तीय सहायता दी गई. उद्यमियों को उद्योग स्थापना के लिए भूमि आवंटन पत्र और लोन स्वीकृति पत्र दिए गए. देवास, पांढुर्ना, टीकमगढ़, उज्जैन को एमएसएमई भवन की सौगात मिली. मंदसौर में मुल्तानपुरा औद्योगिक क्षेत्र में 288 भू-खंड, मंडला में 165 भू-खंड, जबलपुर में 61 भू-खंड, बैतूल में 50 भू-खंड, कटनी के नवीन औद्योगिक क्षेत्र में 68 भू-खंड, नीमच के सरगना औद्योगिक क्षेत्र में 127 भू-खंड, खरगोन के डाबरिया औद्योगिक क्षेत्र में 103 भू-खंड दिए गए. प्ले एंड प्लग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और एमएसएमई विभाग के बीच स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए एमओयू भी साइन किए गए. समिट में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कटनी और मंडला के उद्यमियों से संवाद भी किया.
माताओं-बहनों के हाथों में कमान
इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 4 लाख 41 हजार से अधिक एमएसएमई यूनिट्स की कमान माताओं-बहनों के हाथों में है. गत वर्षों के मुकाबले वर्ष 2024 से 2026 के बीच एमएसएमई में नारी शक्ति का प्रतिनिधित्व 59 प्रतिशत बढ़ा है. राज्य सरकार ने प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए 16 कलस्टर का निर्माण किया है और 14 नए कलस्टर पर काम चल रहा है. राज्य को ओडीओपी में उल्लेखनीय सफलता मिली है.वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश के 20 उत्पादों को जीआई टैग मिले हैं. राज्य सरकार सभी की कठिनाई को समझते हुए विकास की धारा में सरलता, सुचिता और अपने पारदर्शी निर्णयों के बूते आगे बढ़ रही है.
कृषक कल्याण वर्ष के रूप में घोषित किया
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लिए विकसित मध्यप्रदेश का निर्माण करना भी आवश्यक है. राज्य सरकार ने आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) को भोपाल में आयोजित करने का निर्णय लिया है. साथ ही वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में घोषित किया है. इस पूरे वर्ष में एग्रीकल्चर सेक्टर को आधुनिक तरीके से नई ऊंचाई पर लेकर जाएंगे. कृषक कल्याण वर्ष में किसानों को शून्य ब्याज दर पर लोन दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि किसानों को लोन चुकाने के लिए नई सौगात दी है. किसान जिस तारीख को लोन लेंगे, उसके 12 माह की अवधि में लोन भर सकेंगे. इसके लिए 31 मार्च की बाध्यता खत्म कर दी गई है. राज्य सरकार वर्ष 2027 को युवा कल्याण वर्ष के रूप में मनाएगी. सरकार गरीब, अन्नदाता, युवा और नारी कल्याण के लिए कार्य कर रही है. राज्य सरकार ने वर्ष 2024 को गरीब कल्याण, वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष के रूप में कार्य किया.
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एमपी में तेजी से बढ़ रहा विदेशी निवेश
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 200 से अधिक सांदीपनि विद्यालय खोले जा रहे हैं, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले. मध्यप्रदेश सबसे युवा प्रदेश है. स्वर्णिम मध्यप्रदेश के लिए युवा पीढ़ी को सभी सुविधाएं मिलनी चाहिए. राज्य में विदेशी निवेश भी तेजी से बढ़ता जा रहा है. अब तक जो एमओयू हुए उनमें से 9 हजार 300 करोड़ का निवेश धरातल पर आया है. कनाडा की मैकमैन कंपनी आगर मालवा, यूके की दो बड़ी कंपनियां पीथमपुर, जापान, चीन, आयरलैंड और दक्षिण कोरियाई कंपनियां प्रदेश में निवेश कर रही है. उन्होंने कहा कि कपास पर मंडी शुल्क घटाकर आधा करने की मांग 25 साल से की जा रही थी. ऐसा नहीं होने से हमारे कपास उत्पादक किसान महाराष्ट्र और अन्य पड़ोसी राज्यों में अपनी उपज बेचने को मजबूर थे. राज्य सरकार ने प्रदेश कपास उत्पादक किसानों को मंडी शुल्क कम कर सौगात दी है. इसी प्रकार से अरहर (तुअर) दाल के साथ भी यही परेशानी थी.उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक जिले के रेवेन्यू का मॉडल तैयार करने पर काम करेगी. जिले की अनुकूलता के आधार पर व्यापार-व्यवसाय को प्रोत्साहन देते हुए जिले को समृद्धि मिले.
उद्योग विकास में एमपी ने हासिल कीं नई उंचाइयां
कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री चेतन्य काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने उद्योग विकास के क्षेत्र में नई ऊंचाई हासिल कीं हैं. जब नेतृत्व में दृष्टि हो तो एमएमएमई विभाग का बजट 1100 करोड़ से बढ़कर 2100 करोड़ हो जाता है. राज्य सरकार ने विभाग का बजट बढ़ाकर सीधे तौर पर उद्यमियों को लाभ दिया है. उद्योग स्थापित करने के लिए सबसे पहले भूमि की आवश्यकता होती है और मध्यप्रदेश में पर्याप्त लैंड बैंक उपलब्ध है. पिछले एक साल में लगभग 1200 भूखंड उद्योग स्थापित करने के लिए आवंटित किए गए हैं। आगामी डेढ़ साल में 3000 और भूखंड आवंटित किए जाएंगे.
