MP Balaghat: मध्य प्रदेश के बालाघाट से आई मासूमों की मौत की दर्दनाक खबर अब सूबे की सबसे बड़ी सियासी जंग बन चुकी है. बीमारियों की चपेट में आकर जान गंवाने वाले 32 बैगा आदिवासी बच्चों का मुद्दा अब सीधे भोपाल से दिल्ली तक गूंज रहा है. इसी सिलसिले में आज यानी गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी खुद जमीनी हकीकत का मुआयना करने बालाघाट के बिरसा ब्लॉक स्थित जगला गांव पहुंच रहे हैं. तो वहीं दूसरी तरफ, बीजेपी राहुल गांधी पर इस हादसे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगा रही है.
32 मासूमों की मौत
बता दें बालाघाट के इस आदिवासी इलाके में मौतों का यह खौफनाक सिलसिला इस साल मई महीने में शुरू हुआ था, जब 3 साल की नन्हीं रूही परते ने दम तोड़ दिया. इसके बाद एक-एक कर 32 चिराग बुझ गए. मीडिया रिपोट में खुलासा हुआ कि सरकारी आंकड़ों और जमीन पर मौतों की गिनती में जमीन-आसमान का फर्क है. मामला तूल पकड़ते ही सरकार ने आनन फानन में हेल्थ कैंप लगाए और हालात कंट्रोल में होने का दावा किया, लेकिन सवाल वही है- आखिर इन मासूमों की मौत का जिम्मेदार कौन.
राहुल का हमला
राहुल गांधी इस मुद्दे को लेकर पहले भी आक्रामक रहे हैं. उन्होंने 5 सितंबर को कुपोषण और इलाज की कमी पर सरकार को घेरा. 17 सितंबर को तीखा तंज कसते हुए राहुल ने लिखा था मुख्यमंत्री जी, दीये जलाने और उत्सव मनाने से फुर्सत मिल गई हो तो जरा राज्य की जमीनी हालत भी देखिए. वहीं दूसरी तरहफ भारतीय जनता पार्टी ने राहुल के आज के इस दौरे पर हमला बोला है. बीजेपी का साफ कहना है कि कांग्रेस इस दुखद घटना पर सिर्फ और सिर्फ पॉलिटिकल माइलेज बटोरने की कोशिश कर रही है.
बड़े सवाल, जिनका जवाब आज तलाशा जाएगा
सवाल 1. सरकारी कागजों से 4 मृत बच्चों के नाम गायब क्यों.
सवाल 2. क्या वाकई स्वास्थ सुविधाएं और साफ पानी समय पर मिला.
सवाल 3. क्या राहुल के दौरे के बाद प्रशासनिक तंत्र में कोई बड़ा फेरबदल होगा.
आज जब राहुल गांधी जगला गांव की चौपाल पर पीडि़त परिवारों के आंसू पोंछने पहुंचेंगे तो देखने वाली बात यह होगी कि इस दौरे के बाद मध्य प्रदेश की सियासत क्या नया मोड़ लेती है और क्या इन आदिवासी परिवारों को इंसाफ मिल पाता है या नहीं.
News Source: ANI
