Home Top News खाड़ी में महासंग्राम की आहट? ट्रंप का अल्टीमेटम और वो ‘समुद्री रास्ता’ जिसपर टिकी हैं नजरें!

खाड़ी में महासंग्राम की आहट? ट्रंप का अल्टीमेटम और वो ‘समुद्री रास्ता’ जिसपर टिकी हैं नजरें!

by Sanjay Kumar Srivastava 21 June 2026, 8:43 PM IST (Updated 21 June 2026, 8:58 PM IST)
21 June 2026, 8:43 PM IST (Updated 21 June 2026, 8:58 PM IST)
खाड़ी में महासंग्राम की आहट? ट्रंप का अल्टीमेटम और वो 'समुद्री रास्ता' जिसपर टिकी हैं सबकी नजरें!

Trump Threatens: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 60 दिनों के भीतर ईरान के साथ अंतिम समझौता पूरा नहीं हुआ, तो अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों से खुद टोल (Toll) वसूलना शुरू कर देगा. एक कड़े बयान में ट्रंप ने साफ किया कि शुरुआती युद्धविराम समझौते के तहत इस वैश्विक जलमार्ग से अगले 60 दिनों तक बिना किसी टोल के जहाजों को गुजरने की अनुमति है. लेकिन अगर तय सीमा में फाइनल डील नहीं हुई, तो अमेरिका इस क्षेत्र में ‘गार्जियन एंजल’ (रक्षक) के रूप में दी गई अपनी सैन्य सेवाओं के बदले में यह शुल्क वसूलेगा.

ट्रंप का हमेशा से यह रुख रहा है कि अमेरिका दुनिया की सुरक्षा का ठेका मुफ्त में नहीं ले सकता. उनका कहना है कि अगर 60 दिनों के भीतर शांति वार्ता के तहत कोई फाइनल एग्रीमेंट नहीं हुआ, तो अमेरिका इस रूट की सुरक्षा करने (गार्जियन एंजेल बनने) के बदले में सभी देशों के जहाजों से टोल वसूलेगा. नई धमकी के पीछे ये तीन मुख्य कारण हैं.

1.ईरान द्वारा होर्मुज को दोबारा बंद करने का ऐलान

दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए युद्धविराम समझौते के तहत ईरान को होर्मुज जलमार्ग पूरी तरह खोलना था. लेकिन शनिवार को अचानक ईरानी सैन्य कमांड ने दावा किया कि इजराइल द्वारा लेबनान में किए जा रहे हमलों के विरोध में वह इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से बंद कर रहा है. इस कदम से अमेरिकी प्रशासन बेहद नाराज हो गया. अमेरिकी सैन्य कमांड (CENTCOM) ने ईरान के इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि होर्मुज पर ईरान का कोई नियंत्रण नहीं है और अमेरिकी सेना वहां नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित कर रही है.

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2. ईरान द्वारा अवैध रूप से शुल्क वसूलने की रिपोर्ट

ट्रंप को ऐसी खुफिया रिपोर्ट मिली थी कि ईरान चुपके से जलमार्ग से गुजरने वाले तेल टैंकरों से ‘सर्विस फीस’ या टोल वसूलने की कोशिश कर रहा है. इस पर सख्त रुख अपनाते हुए ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि वे तुरंत इसे रोकें.

3. घरेलू स्तर पर ट्रंप की तीखी आलोचना

अमेरिका और ईरान के बीच हस्ताक्षरित सहमति पत्र (MOU) में टोल के मुद्दे को जिस तरह से रखा गया है, उसे लेकर अमेरिका के भीतर ही ट्रंप की काफी आलोचना हो रही है. आलोचकों का कहना है कि यह समझौता केवल 60 दिनों के लिए टोल-फ्री आवाजाही की गारंटी देता है. इसके बाद ईरान द्वारा भविष्य में शुल्क लगाने या इस जलमार्ग पर अपना नियामक नियंत्रण हासिल करने का रास्ता खुला रह जाता है.

आगे क्या होगा?

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड पहुंच चुका है. कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता के साथ 21 जून से दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू हो रही है.इस वार्ता में अगले 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों को हटाने और होर्मुज जलमार्ग के स्थायी नियंत्रण जैसे जटिल मुद्दों पर अंतिम मुहर लगनी है. बहरहाल, यदि ईरान ने अपने अड़ियल रुख में बदलाव नहीं किया, तो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग (जहां से दुनिया का 20% कच्चा तेल गुजरता है) पर अमेरिका और ईरान के बीच फिर से एक बड़ा सैन्य या आर्थिक टकराव देखने को मिल सकता है.

लेबनान पर हमले से ईरान नाराज

शनिवार को ईरान ने कहा कि उसने लेबनान में इज़राइल के हमलों की वजह से होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है. साथ ही, उसने चेतावनी दी कि भले ही बातचीत करने वाले अमेरिका के साथ अंतरिम समझौते पर चर्चा के लिए स्विट्ज़रलैंड जा रहे हैं, लेकिन अगर लड़ाई नहीं रुकी तो शायद ही कोई नतीजा निकले. इसके जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी कि अगर 60 दिनों के भीतर ईरान के साथ कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ, तो वे इस अहम समुद्री रास्ते पर अमेरिकी टोल (शुल्क) लागू करेंगे. उन्होंने कहा कि यह पैसा मध्य पूर्व के देशों के लिए ‘गार्जियन एंजेल’ (रक्षक) के तौर पर दी गई सेवाओं के लिए होगा. समझौते के तहत 60 दिनों तक टोल-फ्री यात्रा की व्यवस्था है. इन घोषणाओं से संकेत मिलता है कि अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत की शुरुआत मुश्किल भरी हो सकती है.

अमेरिका पर उल्लंघन का आरोप

मुख्य मध्यस्थ पाकिस्तान ने कहा है कि यह बातचीत रविवार को शुरू होगी और इसमें कतर के मध्यस्थ भी शामिल होंगे. ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने कहा कि जलडमरूमध्य को इसलिए बंद किया गया क्योंकि अमेरिका युद्ध खत्म करने में नाकाम रहा और उसने अपने वादों का स्पष्ट उल्लंघन किया. इस अंतरिम समझौते का मकसद सभी मोर्चों पर लड़ाई को रोकना है.

इसके कुछ ही समय बाद ईरान के सरकारी प्रसारक ने बताया कि बातचीत करने वाली टीम स्विट्ज़रलैंड के लिए रवाना हो रही है. इस यात्रा में शुक्रवार से ही देरी हो रही थी. सरकारी मीडिया के अनुसार, इस टीम में संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर कलिबाफ़, विदेश मंत्री अब्बास अरागची और केंद्रीय बैंक व तेल विभाग के अधिकारी समेत अन्य लोग शामिल हैं.

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समझौते में ईरान की फ्रीज़ की गई संपत्ति को बहाल करने की बात कही गई है.अमेरिका ने जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) को लेकर ईरान की घोषणा पर आपत्ति जताई. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण नहीं है. वहां आवाजाही जारी है और अमेरिकी सेना स्थिति पर नज़र रख रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि स्थिति ऐसी ही बनी रहे. सेना ने बताया कि शनिवार को 55 व्यापारिक जहाज़ 1.7 करोड़ बैरल से ज़्यादा तेल लेकर वहां से गुज़रे.

अनिश्चितता के बीच गई ईरान की टीम

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि मुख्य वादे पूरे होने के बाद ही अंतिम समझौते के लिए बातचीत शुरू होगी. अगर ऐसा नहीं हुआ तो पूरा समझौता ज्ञापन खतरे में पड़ जाएगा. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पुष्टि की कि मुख्य वार्ताकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकोफ स्विट्जरलैंड में हैं और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर होने वाली संभावित बातचीत की तकनीकी बारीकियों पर काम कर रहे हैं. अंतरिम समझौते के तहत वार्ताकारों को परमाणु समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है, लेकिन इसे बढ़ाया जा सकता है. वेंस ने फॉक्स न्यूज़ को बताया कि वे भी स्विट्जरलैंड पहुंचेंगे.

अभी भी कई सवाल अनुत्तरित

इस्लामाबाद के अधिकारियों के अनुसार, सीधी बातचीत फिर से शुरू करने की कोशिशों के तहत पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने शनिवार को तेहरान में अरागची से मुलाकात की. मामले की संवेदनशीलता के कारण इन अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर यह जानकारी दी. इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद जहाजों की आवाजाही शुरू हो गई. यह एक ऐसी अहम घटना थी जिसके बाद भी कई सवाल अनुत्तरित रह गए. अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटा ली है और अब तेहरान को अपना तेल स्वतंत्र रूप से बेचने की अनुमति दे दी है. इन शर्तों ने अमेरिकी कांग्रेस में कुछ लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या यह युद्ध उचित था.

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लेबनान में इजरायली हमलों में 16 लोगों की मौत

हिज़्बुल्लाह के एक अधिकारी ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि ईरान ने इस मिलिटेंट ग्रुप को जानकारी दी है कि तेहरान तब तक जलडमरूमध्य (strait) को फिर से नहीं खोलेगा, जब तक इज़राइल सार्वजनिक रूप से यह घोषणा नहीं करता कि वह लेबनान में व्यापक युद्धविराम का पालन करेगा और वहां सैन्य अभियान बंद कर देगा. अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर यह बात कही क्योंकि उन्हें सार्वजनिक रूप से बोलने की इजाज़त नहीं थी. अधिकारी ने कहा कि अगर इज़राइल युद्धविराम के लिए तैयार होता है, तो हिज़्बुल्लाह भी इसके लिए प्रतिबद्ध होगा. बाद में नियमों के अनुसार नाम न बताने की शर्त पर बात करते हुए इज़राइली सेना के एक अधिकारी ने कहा कि सेना को राजनीतिक नेतृत्व से युद्धविराम के लिए नए निर्देश मिले हैं.

इजरायली सेना हिज़्बुल्लाह को देगी जवाब

अधिकारी ने कहा कि सेना लेबनान में रक्षात्मक तरीके से काम कर रही है, जिसमें हिज़्बुल्लाह के हमलों का जवाब देने का अधिकार भी शामिल है.अधिकारी ने यह भी बताया कि पिछले 48 घंटों में दक्षिणी लेबनान में इज़राइल के पांच सैनिक मारे गए हैं. शनिवार को इससे पहले, दक्षिणी लेबनान में इज़राइली हमलों में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल थे. ये हमले वहां सीज़फ़ायर समझौते की ख़बरें आने के कुछ ही घंटों बाद हुए. लेबनान की नेशनल न्यूज़ एजेंसी ने बताया कि दक्षिणी शहर नबातिह और आस-पास के गांवों पर हमलों के बाद सात लोग मलबे में दब गए. बाद में लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने घोषणा की कि हालिया इज़राइल-हिज़्बुल्लाह युद्ध में मरने वालों की संख्या 4,000 से ज़्यादा हो गई है.

हिज़्बुल्लाह सीजफायर के लिए तैयार

इज़राइली सेना के एक अधिकारी ने बताया कि हिज़्बुल्लाह ने रात भर दक्षिणी लेबनान में इज़राइली सेना पर 50 से ज़्यादा प्रोजेक्टाइल दागे. इज़राइली सेना ने कहा कि उसने हिज़्बुल्लाह के दर्जनों ठिकानों और चरमपंथियों पर हमले किए. शुक्रवार को वाशिंगटन में इज़राइल के राजदूत येचिएल लीटर ने कहा कि अगर हिज़्बुल्लाह समझौते का पालन करता है और हमले बंद करता है, तो इज़राइल तत्काल सीज़फ़ायर के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. शनिवार को इससे पहले, हिज़्बुल्लाह ने कहा कि वह सीज़फ़ायर के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन उसने शुक्रवार रात समझौते का उल्लंघन करने के लिए इज़राइल को ज़िम्मेदार ठहराया और कहा कि वह इज़राइली सैनिकों के हमलों का जवाब देगा.

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