Mohan Yadav: बीते 15 मई को मध्य प्रदेश की इंदौर हाई कोर्ट पीठ ने धार के भोजशाला को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. कोर्ट ने अपने आदेश में विवादित भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित कर दिया था. इसके बाद से भोजशाला में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है. हजारों की संख्या में श्रद्धालु मां वाग्देवी की पूजा करने के लिए भोजशाला जाते हुए दिख रहे हैं. इस बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. जी हां, राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव सोमवार 25 मई को भोजशाला में जाएंगे.
मिली जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के सियासी और धार्मिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आई है. प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को धार के ऐतिहासिक और चर्चित भोजशाला के दौरे पर जा रहे हैं. गौर करने वाली बात यह है कि बीते शुक्रवार को भोजशाला को लेकर आए एक बेहद महत्वपूर्ण फैसले के बाद मुख्यमंत्री पहली बार धार पहुंच रहे हैं. जाहिर है इस दौरे के कई बड़े सियासी और सामाजिक मायने निकाले जा रहे हैं.
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
मध्य प्रदेश की सियासत और धार्मिक आस्था के केंद्र धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर हलचलें एक बार फिर तेज हो गई हैं. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को धार के दौरे पर रहेंगे, जहां वे ऐतिहासिक भोजशाला परिसर जाएंगे. मुख्यमंत्री के इस हाई-प्रोफाइल दौरे को देखते हुए धार जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है. भोजशाला परिसर और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है. चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था और मुख्यमंत्री के रूट प्लान का जायजा ले रहे हैं, ताकि सोमवार को होने वाले इस दौरे में सुरक्षा की कोई चूक न होने पाए.
7 अप्रैल 2003 का आदेश रद्द
बता दें कि एमपी हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने अपने 15 मई के फैसले में भोजशाला को वाग्देवी मंदिर के रूप में धार्मिक दर्जा दिया था. इसने एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज और हिंदुओं को केवल मंगलवार को वहां पूजा करने की अनुमति दी गई थी. फैसले के बाद एएसआई ने 16 मई को हिंदुओं को पूजा और अन्य उद्देश्यों के लिए स्मारक में बीना किसी रोकटोक के प्रवेश की अनुमति दी थी.
वहीं, हाई कोर्ट के फैसला आते ही इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही गई थी. बीते दिनों मुस्लिम पक्ष ने उच्च न्यायालय के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की थी. वहीं, हिंदू पक्ष के एक याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय में एक आपत्ति दर्ज कराई, जिसमें अनुरोध किया गया कि भोजशाला विवाद मामले में उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ किसी भी अपील पर उनके पक्ष को सुने बिना कोई आदेश पारित न किया जाए.
