Home Top News भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा 400 करोड़ी ब्रिज, जबलपुर-भोपाल NH-45 पर ओवरब्रिज का बड़ा हिस्सा धंसा

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा 400 करोड़ी ब्रिज, जबलपुर-भोपाल NH-45 पर ओवरब्रिज का बड़ा हिस्सा धंसा

by Live Times
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Jabalpur Bhopal NH Caved

NH 45 Bridge Collapse: जबलपुर-भोपाल नेशनल हाईवे-45 पर एक बड़ा हिस्सा रविवार को धंस गया. 400 करोड़ की लागत से बने इस ब्रिज ने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है.

23 February, 2026

  • भोपाल से नितिन ठाकुर की रिपोर्ट

विकास के दावों और गुणवत्ता की पोल खोलते हुए जबलपुर-भोपाल नेशनल हाईवे-45 पर शहपुरा के पास बना एक बड़ा रेलवे ओवरब्रिज रविवार की शाम अचानक धंस गया। महज तीन साल पहले 400 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हुए इस ब्रिज के क्षतिग्रस्त होने से प्रशासन में हडक़ंप मच गया है। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने तत्काल प्रभाव से मार्ग को बंद कर दिया है, जिससे मध्य प्रदेश के दो बड़े शहरों का सीधा सडक़ संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हैरानी की बात यह है कि इस ब्रिज का निर्माण अभी 3 साल पहले ही पूरा हुआ था। यह ब्रिज पहले से ही विवादों में था।

बाल बाल बची लोगों की जान

जिस स्थान पर ब्रिज का हिस्सा धंसा है, उसके ठीक 50 मीटर के दायरे में नीचे से मुख्य रेल ट्रैक गुजरता है। जानकारों का कहना है कि यदि क्षतिग्रस्त हिस्सा सीधे ट्रैक पर गिरता या उस समय नीचे से कोई ट्रेन गुजर रही होती तो एक बड़ी रेल त्रासदी हो सकती थी। फिलहाल रेलवे और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर तैनात हैं और स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। यह दो लेन का ब्रिज 3 साल पहले ही बना है। बीते दिसंबर माह में भी इसकी दूसरी लेन का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ था, जिसकी मरम्मत का कार्य अभी चल ही रहा था। तब से ट्रैफिक को एक ही लेन से निकाला जा रहा था, लेकिन रविवार को चालू लेन का हिस्सा भी धंस गया। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और संबंधित एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

कंपनी ब्लैकलिस्ट, एनएचएआई ने झाड़ा पल्ला

मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने सख्त रुख अपनाया है। एमआरडीसी जबलपुर के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर राकेश मोरे ने पुष्टि की है कि ब्रिज का निर्माण बांगड़ कंपनी द्वारा किया गया था। लापरवाही और घटिया निर्माण के चलते कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। अनुबंध के अनुसार क्षतिग्रस्त हिस्से का पुनर्निर्माण अब वही कंपनी अपने खर्च पर करेगी। दूसरी ओर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने स्पष्ट किया है कि यह मार्ग उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और इसकी देखरेख की पूरी जिम्मेदारी एमआरडीसी की है।

डाइवर्ट किया गया ट्रैफिक, टोल वसूली पर विवाद

ब्रिज बंद होने के कारण शहपुरा-खामलिया मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पुलिस ने हल्के वाहनों को शहपुरा बस्ती के अंदरूनी रास्तों से डाइवर्ट किया है, जबकि भारी वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इस बीच टोल प्लाजा पर भी विवाद की स्थिति बनी। प्रशासन ने मार्ग बाधित होने के कारण टोल फ्री निकासी के निर्देश दिए थे, लेकिन कई वाहन चालकों ने शिकायत की है कि उनसे जबरन टोल वसूला गया।

तकनीकी जांच के बाद ही खुलेगा रास्ता

फिलहाल तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ब्रिज की संरचनात्मक मजबूती की जांच कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक पूरे ब्रिज की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक भारी वाहनों की आवाजाही शुरू करना खतरे से खाली नहीं है। प्रशासन ने यात्रियों से वैकल्पिक मार्गों का प्रयोग करने की अपील की है।

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