Patna Student Suicide: पटना में एक मैट्रिक की छात्रा को एग्जाम सेंटर लेट पहुंचने पर एंट्री नहीं मिली. निराश होकर उसने ट्रेन से कुदकर अपनी जान दे दी.
18 February, 2026
- पटना से अमरजीत सिंह की रिपोर्ट
देशभर में बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो गई हैं. बच्चों के ऊपर एग्जाम का प्रेशर तो है, लेकिन साथ में एग्जाम सेंटर समय पर पहुंचने का भी प्रेशर है. लेकिन अब यह सख्ती जानलेवा बन रही है. पटना के मसौढ़ी से इस से जुड़ी एक दर्दनाक घटना सामने आई है. जहां मैट्रिक की परीक्षा में देर से पहुंचने के कारण प्रवेश नहीं मिलने से आहत एक छात्रा ने चलती ट्रेन से कूदकर आत्महत्या कर ली. घटना मसौढ़ी थाना क्षेत्र के महाराजचक गांव की है. मृतका की पहचान मसौढ़ी के खरजमा गांव निवासी मंटू यादव की पुत्री कोमल कुमारी के रूप में हुई है.
10 मिनट लेट पहुंची थी छात्रा
बताया जाता है कि कोमल मैट्रिक की परीक्षार्थी थी और बुधवार को बरनी स्थित परीक्षा केंद्र पर उसकी परीक्षा थी. वह परीक्षा देने के लिए मंगलवार को ही अपने रिश्तेदार के गांव महाराजचक चली गई थी. परीक्षा केंद्र वहां से करीब 6 किलोमीटर दूर बरनी में था. जानकारी के अनुसार परीक्षा केंद्र पर सुबह 9 बजे तक रिपोर्टिंग का समय निर्धारित था, लेकिन कोमल 9:10 बजे पहुंची. ऐसे में प्रवेश बंद कर दिया गया. परीक्षा केंद्र पहुंचने पर गेट बंद मिला तो कोमल गेट खटखटाने लगी. वह बार-बार निवेदन कर रही थी, सर प्लीज गेट खोल दीजिए, परीक्षा 9:30 बजे शुरू होगी. मैं सिर्फ दस मिनट लेट हूं, अभी 20 मिनट बाकी हैं, मेरे करियर का सवाल है. लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी. काफी प्रयास के बाद भी जब गेट नहीं खुला तो वह निराश होकर घर लौट आई.
ट्रेन से कूदकर दी जान
कुछ देर बाद वह नदौल पहुंची और एक ट्रेन पर सवार हो गई. तरेगना और मसौढ़ी कोर्ट स्टेशन के बीच महाराजचक गांव के पास चलती ट्रेन से कूद गई. पुलिस उसे अस्पताल ले गई, जहां उसने दम तोड़ दिया. शुरुआत में उसकी पहचान नहीं हो सकी थी. बाद में मसौढ़ी थाना पुलिस ने उसका फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जिसके बाद ग्रामीणों ने उसकी पहचान की और परिजनों को सूचना दी. जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया. मां का रो-रोकर बेहाल हो गई. बताया जाता है कि कोमल दो बहनों और एक भाई में सबसे बड़ी थी. उसके पिता मंटू यादव बाहर मजदूरी करते हैं.
जिम्मेदार कौन?
इस घटना के बाद इलाके में शोक की लहर है और परीक्षा व्यवस्था की सख्ती को लेकर सवाल उठने लगे हैं. इस साल केंद्र और राज्य सरकारों बोर्ड परीक्षाओं के नियमों को और सख्त बना दिया है. बच्चों को एग्जाम सेंटर लेट पहुंचने पर एंट्री नहीं मिल रही है. कई ऐसी वीडियो सामने आए हैं, जहां एग्जाम सेंटर पर कुछ मिनट लेट पहुंचे बच्चों को एंट्री नहीं दी गई. उन बच्चों का पूरा साल खराब हो गया. साथ ही उन्हें मानसिक तनाव भी झेलना पड़ रहा है. पटना के आत्महत्या मामले के बाद सवाल है कि इन मासूम बच्चों की मौत का जिम्मेदार कौन है, उनकी लापरवाही या शिक्षा व्यवस्था के कड़े नियम.
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