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Madhya Pradesh में ‘नारी शक्ति’ पर सियासत, कांग्रेस का पैदल मार्च और BJP का विशेष सत्र

by Nitin Thakur
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MP में ‘नारी शक्ति’ पर सियासी आर-पार, 131वां संशोधन गिरने के बाद BJP का विशेष सत्र, कांग्रेस का पैदल मार्च

Madhya Pradesh News: 131वें संविधान संशोधन विधेयक गिरने की आवाज अब देश भर में गूंज रही है. ऐसे में मध्य प्रदेश की सियासत भी अछूती नहीं रही.

25 April, 2026

दिल्ली की संसद में 131वें संविधान संशोधन विधेयक के गिरने की गूंज अब मध्य प्रदेश की सियासत में जबरदस्त तरीके से सुनाई दे रही है. महिला आरक्षण के मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति में एक नया उबाल पैदा कर दिया है. जहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने विपक्ष को घेरने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है, वहीं कांग्रेस ने भी भाजपा के इस कदम को छलावा करार देते हुए सडक़ों पर उतरने का निर्णय लिया है.

भाजपा ने बनाया मुद्दा

बता दें केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने और बिना पुरुषों की सीटों में कटौती किए महिला आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव गिर जाने को भाजपा ने बडा मुद्दा बना लिया है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 27 अप्रैल को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आहूत किया है. भाजपा का मानना है कि विपक्ष ने संसद में महिलाओं के हक पर डाका डाला है. सूत्रों के अनुसार इस विशेष सत्र में सरकार कांग्रेस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव ला सकती है. मुख्यमंत्री का स्पष्ट कहना है कि नारी अपना अपमान कभी नहीं भूलती और विपक्षी दलों ने वोटिंग के दौरान विधेयक का विरोध कर महिलाओं के अधिकारों का हनन किया है. भाजपा इस मुद्दे को केवल विधानसभा तक ही सीमित नहीं रखेगी, बल्कि इसे नगरीय निकायों और पंचायतों तक ले जाने की तैयारी में है.

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भोपाल में महा मार्च

भाजपा के विशेष सत्र से ठीक एक दिन पहले यानी कल 26 अप्रैल को कांग्रेस अपनी ताकत का प्रदर्शन करेगी. पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में भोपाल के माता मंदिर से रोशनपुरा तक एक विशाल पैदल मार्च निकाला जाएगा. इसमें मालवा-निमाड़ और मध्य भारत के हजारों कार्यकर्ताओं के जुटने की संभावना है. कांग्रेस का तर्क है कि भाजपा परिसीमन और जनगणना के नाम पर महिलाओं को गुमराह कर रही है. कांग्रेस की मुख्य मांग है कि आरक्षण के लिए किसी नई संख्या या परिसीमन का इंतजार न किया जाए, बल्कि वर्तमान 543 सीटों पर ही तत्काल 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए.

क्यों हुआ टकराव

इस पूरे विवाद की जड़ 17 अप्रैल को लोकसभा में हुई वोटिंग है. सरकार 131वें संविधान संशोधन के जरिए सीटों की संख्या बढ़ाना चाहती थी, ताकि किसी भी वर्ग का नुकसान न हो. लेकिन सदन में इसे दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका. जहां पक्ष में वोट 298 पड़े, वहीं विपक्ष में वोट 230, जबकि जरूरतरू 352 वोट की थी, इस तरह विधेयक 54 वोटों की कमी से गिर गया.

सदन में घमासान

कांग्रेस न केवल सडक़ों पर बल्कि सदन के भीतर भी सरकार को घेरने की योजना बना रही है. खबर है कि कांग्रेस विधायक दल की ओर से बिना शर्त आरक्षण लागू करने का संकल्प पेश किया जा सकता है. इसके साथ ही विधानसभा घेराव की रणनीति भी तैयार की जा रही है. 27 अप्रैल का सत्र हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं.

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