Haryana ATS: हरियाणा सरकार ने राज्य की आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य में एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) के गठन को मंजूरी दे दी गई है. इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है. सरकार का मानना है कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य और आतंकवादी गतिविधियों के नए तौर-तरीकों को देखते हुए राज्य को एक ऐसी विशेष एजेंसी की जरूरत थी, जो आतंकवाद, कट्टरपंथ और संगठित आतंकी नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर सके.
हरियाणा पुलिस के महानिदेशक (DGP) अजय सिंघल ने इस फैसले को राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिए ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बताया है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की स्पष्ट सोच है कि राज्य की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता. आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को और प्रभावी बनाने के लिए एटीएस का गठन किया गया है.
मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में सुरक्षा सबसे ऊपर
डीजीपी अजय सिंघल ने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी लगातार कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और सुरक्षा एजेंसियों को आधुनिक संसाधनों से लैस करने पर जोर दे रहे हैं. इसी सोच के तहत एटीएस का गठन किया गया है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद केवल किसी एक राज्य या क्षेत्र की समस्या नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है. ऐसे में हरियाणा जैसे तेजी से विकसित हो रहे राज्य के लिए एक विशेष आतंकवाद निरोधी इकाई का होना बेहद जरूरी था.
क्या होगा एटीएस का मुख्य काम?
नई गठित एंटी टेररिज्म स्क्वॉड का दायरा केवल आतंकी घटनाओं तक सीमित नहीं रहेगा. यह इकाई आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच, अभियोजन, खुफिया सूचनाओं का संग्रहण, विश्लेषण और विभिन्न एजेंसियों के साथ साझा करने का कार्य करेगी. इसके अलावा आतंकवादी संगठनों, उनके नेटवर्क और वित्तीय गतिविधियों पर निगरानी रखी जाएगी. एटीएस आतंकवाद से संबंधित एक व्यापक डेटाबेस भी तैयार करेगी. इस डेटा का विश्लेषण कर भविष्य के संभावित खतरों का आकलन किया जाएगा. साथ ही अधिकारियों और जवानों के कौशल उन्नयन के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे.
सीआईडी के अधीन करेगी काम
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार एटीएस का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक (IG) स्तर का अधिकारी करेगा. यह पूरी इकाई सीआईडी के कमांड और नियंत्रण में कार्य करेगी. इसकी संरचना आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बहुस्तरीय रखी गई है, ताकि आतंकवाद के हर स्वरूप से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एटीएस के भीतर राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) की तर्ज पर एक विशेष कमांडो फोर्स का गठन किया जाएगा. यह कमांडो यूनिट उच्च जोखिम वाले अभियानों, बंधक मुक्ति, संवेदनशील ऑपरेशन और त्वरित कार्रवाई के लिए प्रशिक्षित होगी.
विशेष पुलिस स्टेशन और जांच इकाइयां
एटीएस के तहत आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच के लिए एक समर्पित पुलिस स्टेशन भी स्थापित किया जाएगा. यहां कानूनी विशेषज्ञों, वित्तीय जांच अधिकारियों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की अलग-अलग टीमें काम करेंगी. इनका उद्देश्य आतंकी गतिविधियों के हर पहलू की गहन जांच करना होगा, चाहे मामला फंडिंग का हो, डिजिटल नेटवर्क का हो या किसी अंतरराज्यीय अथवा अंतरराष्ट्रीय संपर्क का.
साइबर निगरानी और डार्क वेब पर भी नजर
आधुनिक आतंकवाद का बड़ा हिस्सा डिजिटल माध्यमों से संचालित होता है. इसे देखते हुए एटीएस में साइबर एवं टेक्निकल इंटेलिजेंस यूनिट भी बनाई जाएगी. यह यूनिट ओपन सोर्स इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, डार्क वेब और संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखेगी. इसके अलावा डेटा एनालिसिस एवं इंटरसेप्शन यूनिट अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से सूचनाओं का संग्रहण और विश्लेषण करेगी. इससे संभावित खतरों की समय रहते पहचान कर कार्रवाई की जा सकेगी.
युवाओं को कट्टरपंथ से बचाने पर भी फोकस
एटीएस केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने का भी काम करेगी. इसके लिए डि-रेडिकलाइजेशन यूनिट बनाई जाएगी, जो युवाओं को कट्टरपंथी विचारधाराओं से दूर रखने के लिए अभियान चलाएगी. यह यूनिट पुनर्वास और परामर्श कार्यक्रमों के माध्यम से उन लोगों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास करेगी जो किसी कारणवश कट्टरपंथी सोच की ओर आकर्षित हो रहे हैं.
राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप होगी तैयारी
डीजीपी अजय सिंघल ने कहा कि हरियाणा पुलिस आधुनिक तकनीक, विशेष प्रशिक्षण और मजबूत खुफिया तंत्र के जरिए राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप एक पेशेवर और सक्षम एटीएस तैयार करेगी. उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य सरकार के सहयोग और मार्गदर्शन से यह नई इकाई हरियाणा को और अधिक सुरक्षित, शांतिपूर्ण तथा भयमुक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. राजनीतिक और सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हरियाणा की भौगोलिक स्थिति, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से निकटता और तेजी से बढ़ती आर्थिक गतिविधियों को देखते हुए एटीएस का गठन एक रणनीतिक कदम है. आने वाले समय में यह इकाई राज्य की सुरक्षा व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा बन सकती है.
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