Mayawati on EVM: बहुजन समाज पार्टी (BSP) चीफ मायावती ने सोमवार को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के इस्तेमाल पर चिंता जताई. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि वोटरों के मन में यह संदेह नहीं होना चाहिए कि उनके वोट किसी दूसरे कैंडिडेट को दिए जा सकते हैं या उनके लिए गिने जा सकते हैं, क्योंकि ऐसी घटना से डेमोक्रेटिक सिस्टम में भरोसा कम होगा. इसके साथ ही मायावती ने नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पर धांधली करके जीतने का आरोप लगाया.
बैलेट पेपर वापस लाने की मांग
मायावती ने कहा कि वोटरों का चुनावी प्रक्रिया में भरोसा पक्का करना लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने के लिए बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि देश के पहले चुनाव के बाद लगभग पांच दशकों तक वोटिंग के लिए बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता रहा, इसके बाद इलेक्शन कमीशन ने उन्हें EVM से बदल दिया. मायावती ने याद दिलाया कि जब कांग्रेस केंद्र में सत्ता में थी, तो BJP ने EVM का विरोध किया था और आरोप लगाया था कि कांग्रेस मशीनों का गलत इस्तेमाल करके चुनाव जीतती है. उन्होंने कहा, “हालांकि, हैरानी की बात है कि चुनाव जीतने और केंद्र सरकार बनाने के बाद, BJP ने EVM को खत्म नहीं किया; इसके बजाय, उसने इन्हीं मशीनों से वोटिंग और गिनती का काम जारी रखा है.” उन्होंने कहा, BSP हमेशा से EVM के खिलाफ रही है. हम मांग करते हैं कि EVM को चुनावी प्रक्रिया से हटाया जाए और इसकी जगह बैलेट पेपर से चुनाव करवाए जाएं.
चंद्रशेखर आजाद पर धांधली का आरोप
पहली बार मायावती ने नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद पर सीधा हमला किया है. मायावती ने आरोप लगाया कि चंद्रशेखर आजाद को BJP ने जिताने में मदद की और उनका अपना कोई आधार नहीं है. इसके बावजूद वे चुनाव जीत जाते हैं. मायावती ने आरोप लगाया कि BJP ने उन्हें जिताने के लिए EVM में गड़बड़ी की. चंद्रशेखर BJP के इशारे पर काम करते हैं. मायावती ने आरोप लगाया कि चंद्रशेखर अधिकारियों से बात करने के बाजाय युवाओं को आगे करके विरोध प्रदर्शन करते हैं, जिससे उन पर एफआईआर दर्ज हो जाती है और वे कोर्ट के चक्कर काटते रहते हैं. इसलिए दलित समाज उनके बहकावे में न आए.
SIR विवाद
बसपा प्रमुख मायावती की यह टिप्पणी चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज और वोटर रोल के SIR पर चल रही राजनीतिक बहस के बीच आई है. एक मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद यह ताजा राजनीतिक विवाद और बढ़ गया, जिसमें कहा गया था कि इलेक्शन कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR एक्सरसाइज और दूसरे चुनावी मामलों से जुड़े फैसलों और प्रक्रिया के बारे में पिछले 10 महीने में 14 बार आपत्तियां उठाई थीं. बताई गई आपत्तियों में फॉर्म 6, वोटर डिलीट करने और वोटर-रोल डेटाबेस तक पहुंच से जुड़े मुद्दे शामिल थे. अब विपक्ष इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहा है.
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News Source: ANI
