Home Latest News & Updates योगी सरकार का बड़ा कदम! न्यूनतम मजदूरी दरों को मिली मंजूरी, जानें कितनी होगी नई सैलेरी?

योगी सरकार का बड़ा कदम! न्यूनतम मजदूरी दरों को मिली मंजूरी, जानें कितनी होगी नई सैलेरी?

by Rajeev Ojha
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Minimum Wage Rates Approved Yogi Government

UP News : योगी सरकार ने बड़ा हस्तक्षेप करते हुए न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन का फैसला लिया. अब नई न्यूनतम मजदूरी दरें कानूनी रूप से प्रभावी हो गई हैं और पूरे प्रदेश में लागू होंगी.

UP News : नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हालिया घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ा हस्तक्षेप करते हुए न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन का फैसला लिया. सरकार के निर्णय पर प्रदेश की राज्यपाल ने भी अपनी मुहर लगाते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिसके बाद सरकार द्वारा निर्धारित नई न्यूनतम मजदूरी दरें कानूनी रूप से प्रभावी हो गई हैं. अब यह पूरे प्रदेश में बाध्यकारी रूप से लागू होंगी.

उच्च स्तरीय समिति की गई थी गठित

उल्लेखनीय है कि घटनाक्रम के बाद श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच वेतन वृद्धि को लेकर गतिरोध खत्म करने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय समिति गठित की थी, जिसने अपनी सिफारिश में के 3 श्रेणियां में वेतन की दरें निर्धारित की हैं. इसके आधार पर राज्य सरकार ने अंतरिम राहत के रूप में नई मजदूरी दरें लागू करते हुए प्रदेश को 3 श्रेणियों में विभाजित किया है. इससे क्षेत्रीय परिस्थितियों और जीवन-यापन की लागत के अनुसार संतुलित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके.

सिफारिशों को तीन श्रेणियों में बांटा गया

समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रदेश को तीन श्रेणियों में बांटा गया. प्रथम श्रेणी में गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद को रखा गया, जहां जीवन-यापन की लागत अपेक्षाकृत अधिक है. यहां अकुशल श्रमिकों के लिए 13,690 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,868 रुपये मासिक न्यूनतम मजदूरी तय किया गया है.

द्वितीय श्रेणी में नगर निगम वाले अन्य जिलों को शामिल किया गया है, जहां अकुशल श्रमिकों के लिए 13,006, अर्द्धकुशल के लिए 14,306 और कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये मानक तय किया गया है. वहीं, तृतीय श्रेणी में शेष जिलों को रखा गया है, जहां मजदूरी दरें क्रमशः 12,356 रुपये, 13,590 रुपये और 15,224 रुपये तय की गई हैं. इन सभी दरों में मूल वेतन के साथ परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (VDA) शामिल है.

श्रमिकों को मिलेगी इस फैसले से राहत

दरअसल, वर्ष 2019 और 2024 में प्रस्तावित मजदूरी संशोधन लागू नहीं हो पाए थे, जिसके चलते यह अंतर बढ़ता गया. अब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर लंबित पुनरीक्षण को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है. सरकार का कहना है कि यह निर्णय न केवल श्रमिकों को राहत देने के लिए है, बल्कि औद्योगिक शांति बनाए रखने और उत्पादन चक्र को सुचारु रखने के लिए भी आवश्यक है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि नई दरें लागू होने के बाद श्रमिकों के हितों में किसी प्रकार की कटौती या अनियमितता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

बढ़ती महंगाई के चलते बढ़नी चाहिए सैलेरी

यह निर्णय उस समय लिया गया जब श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच वेतन वृद्धि को लेकर गतिरोध की स्थिति बनी और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित होने लगी. श्रमिकों का कहना था कि बढ़ती महंगाई और किराए के दबाव के कारण जीवनयापन कठिन हो गया है, जबकि नियोक्ताओं ने वैश्विक आर्थिक दबाव, बढ़ती लागत और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं का हवाला दिया. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार को सौंपी गई. इसके बाद अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, श्रम एवं सेवायोजन विभाग एवं श्रमायुक्त के सदस्य और सदस्य सचिव के रूप में नामित किया गया. समिति में कर्मकारों के 5 प्रतिनिधि और नियोक्ताओं के तीन प्रतिनिधि भी सम्मिलित थे. समिति ने मौके पर जाकर श्रमिकों, उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों से चर्चा की और संतुलित समाधान का प्रस्ताव तैयार किया.

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