Home Religious सरस्वती पूजा के दिन जरूर पहनें पीले वस्त्र, जानें क्या है इसका महत्व और शुभ मुहूर्त

सरस्वती पूजा के दिन जरूर पहनें पीले वस्त्र, जानें क्या है इसका महत्व और शुभ मुहूर्त

by Neha Singh
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Saraswati Puja Yellow Colour

Yellow Colour Significance: सरस्वती पूजा के दिन पीले वस्त्र पहनने चाहिए. चलिए जानते हैं पीले रंग का क्या महत्व होता है बसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त कब है.

21 January, 2026

सनातन धर्म में बसंत पंचमी का बहुत महत्व है. बसंत पंचमी का त्योहार हर साल माघ महीने की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन ज्ञान, संगीत और कला की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है. इस दिन स्कूल और कला के संस्थानों में देवी सरस्वती की पूजा की जाती है और सभी लोग ज्ञान और कला पाने के लिए प्रार्थना करते हैं. सरस्वती पूजा के दिन पीले वस्त्र पहनने की मान्यता है, लेकिन कई लोग पीला रंग पहनना जरूरी नहीं समझते और काला या कोई और रंग पहन लेते हैं. आज हम आपको बताएंगे कि बसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र क्यों पहने जाते हैं, इसका महत्व क्या है और पूजा करने का शुभ मुहूर्त क्या है.

saraswati puja

बसंत पंचमी को क्यों पहनते हैं पीले वस्त्र

वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती को पीले रंग के वस्त्र पहनाए जाते हैं और उन्हें पीले ही फूल अर्पित किए जाते हैं. इस दिन भक्त पीला प्रशाद जैसे हलवा और लड्डू बनाते हैं. देवी सरस्वती को पीला रंग बहुत पसंद है. बसंत पंचमी के दिन से ही वसंत ऋतु की शुरुआत होती है और मौसम बदलने लगता है. वसंत ऋतु में फसले पकने लगती और पीले फूल खिलते हैं. इसके अलावा पीला रंग समृद्धि, ऊर्जा, प्रकाश और आशा का भी प्रतीक है, इसलिए बसंत पंचमी के दिन पीले रंग को मान्यता दी गई है. इसके अलावा हिंदू धर्म में पीले रंग को शुद्ध और सात्विक माना जाता है. इसलिए हर त्योहार और शुभ अवसर पर महिलाएं पीले वस्त्र ही पहनती हैं.

कब है बसंत पंचमी

पांचांग के अनुसार, बसंत पंचमी की तिथि 23 जनवरी को अर्धरात्रि 2 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगी और 24 जनवरी को अर्धरात्रि को 1 बजकर 46 मिनट पर खत्म होगी. इसलिए बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी. वहीं इसके शुभ मुहूर्त की बात करें तो सरस्वती पूजा के लिए सबसे शुभ समय सुबह 7 बजकर 13 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा. माना जाता है कि सही मुहूर्त में पूजा करने से सही फल मिलता है.

saraswati puja

वसंत पंचमी पर इन मंत्रों का करें जाप

  • या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
  • ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः॥
  • ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयंकरी. वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा॥
  • ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः॥
  • ॐ वाग्देव्यै च विद्महे कामराजाय धीमहि. तन्नो देवी प्रचोदयात्॥

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