Commonwealth Games: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हरियाणा के मुक्केबाजों ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है. खिलाड़ियों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय बॉक्सिंग की असली ताकत हरियाणा की धरती पर बसती है. भारत ने बॉक्सिंग में 10 पदक (7 गोल्ड और 3 सिल्वर) जीते, जिनमें हरियाणा के मुक्केबाजों ने अकेले 7 पदक (6 गोल्ड और 1 सिल्वर) अपने नाम किए. सबसे बड़ी बात यह रही कि भिवानी की चारों महिला बॉक्सर साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, जैसमीन लांबोरिया और प्रिया घनघस ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया.
पुरुष वर्ग में सचिन सिवाच (भिवानी) और अंकुश पंघाल (हिसार) ने स्वर्ण पदक जीते, जबकि नरेंद्र बेरवाल (हिसार) ने रजत पदक हासिल किया. यह सफलता केवल पदकों की कहानी नहीं है, बल्कि उस शहर की पहचान का विस्तार है जिसे आज पूरा देश “मिनी क्यूबा” के नाम से जानता है. जिस तरह क्यूबा दुनिया में मुक्केबाजी की महाशक्ति माना जाता है, उसी तरह भारत में भिवानी ने बॉक्सिंग की राजधानी के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है. यहां की बॉक्सिंग संस्कृति अनुशासन और लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को तैयार करने की परंपरा के कारण भिवानी को वर्षों से “मिनी क्यूबा” कहा जाता है.
यहां से शुरू हुआ भिवानी का स्वर्णिम सफर
भिवानी की बॉक्सिंग में अंतरराष्ट्रीय पहचान की शुरुआत कैप्टन हवा सिंह से मानी जाती है. अंतरराष्ट्रीय खेलों में लगातार स्वर्ण पदक जीतने वाले हवा सिंह ने भिवानी में बॉक्सिंग की मजबूत नींव रखी. उनके बाद जगत सिंह, धर्मेंद्र सिंह यादव, जितेंद्र कुमार, विजेंदर सिंह, अखिल कुमार, विकास कृष्ण, जैसमीन लांबोरिया, साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, प्रिया घनघस और अब सचिन सिवाच जैसे खिलाड़ियों ने इस विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. विशेष रूप से विजेंदर सिंह ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर भारतीय मुक्केबाजी को नई पहचान दिलाई. उनकी सफलता के बाद भिवानी बॉक्सिंग क्लब देशभर के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया. इसके बाद हर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भिवानी के खिलाड़ी लगातार पदक जीतते रहे और जिले को “मिनी क्यूबा” की पहचान और मजबूत होती गई.
मेहनत, अनुशासन और गांवों से निकलती प्रतिभाएं
भिवानी की सबसे बड़ी ताकत उसके गांव हैं. यहां के युवा सुबह चार-पांच बजे से अभ्यास शुरू कर देते हैं. घंटों फिटनेस, तकनीकी प्रशिक्षण और स्पैरिंग के बाद ही उनका दिन पूरा होता है. परिवारों का सहयोग, कोचों का मार्गदर्शन और जीत का जुनून इन खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाता है. यही कारण है कि छोटे गांवों से निकलने वाले खिलाड़ी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाजों को चुनौती देते हैं.
हरियाणा की खेल नीति भी बनी मजबूत आधार
हरियाणा सरकार की खेल नीति ने भी खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. आधुनिक खेल सुविधाएं, अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण, नकद पुरस्कार, सरकारी नौकरियों में अवसर और खिलाड़ियों के लिए बेहतर माहौल ने प्रदेश को देश का खेल पावरहाउस बना दिया है. यही वजह है कि ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप, एशियाई खेल और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में भी हरियाणा के खिलाड़ियों का दबदबा लगातार बढ़ रहा है.
हरियाणा के पदक विजेता बॉक्सर
महिला वर्ग
- साक्षी चौधरी (भिवानी)
- प्रीति पवार (भिवानी)
- जैसमीन लांबोरिया (भिवानी)
- प्रिया घनघस (भिवानी)
पुरुष वर्ग
- सचिन सिवाच (भिवानी)
- अंकुश पंघाल (हिसार)
- नरेंद्र बेरवाल (हिसार) सिल्वर
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का यह प्रदर्शन केवल पदकों की संख्या नहीं है, बल्कि यह उस खेल संस्कृति की जीत है जिसने भिवानी को “मिनी क्यूबा” बनाया. एक बार फिर साबित हो गया कि जब बात मुक्केबाजी की होती है तो हरियाणा, खासकर भिवानी, भारत की सबसे मजबूत ताकत बनकर सामने आता है.
