Delhi Diwali: दीवाली पर पटाखे जलाने का इंतजार कर रहे दिल्ली वालों के लिए एक बड़ी खबर है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने इस बार दिल्ली-NCR में कुछ शर्तों के साथ ग्रीन पटाखों की बिक्री और उन्हें जलाने की परमिशन दे दी है. यानी त्योहार पर आतिशबाजी का मौका मिलेगा, लेकिन इसके लिए तारीख और समय का खास ध्यान रखना होगा. नियमों का उल्लंघन करने पर परेशानी हो सकती है. नॉर्थ दिल्ली की डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) निहारिका भट्ट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि राजधानी में सिर्फ प्रमाणित यानी सर्टिफाइड ग्रीन पटाखे ही बेचे और जलाए जा सकेंगे. इन पटाखों के पैकेट पर QR कोड होना जरूरी है. इस कोड को स्कैन करके खरीदार पटाखों का सर्टिफिकेशन और बैच नंबर जांच सकेंगे.
कब खरीदें और कब जलाएं?
DCP निहारिका भट्ट के मुताबिक, दिल्ली में ग्रीन पटाखों की बिक्री सिर्फ 4, 5 और 6 नवंबर को की जा सकेगी. वहीं, इन्हें जलाने की परमिशन सिर्फ 7 और 8 नवंबर को होगी. यानी दीवाली के दिन. पटाखे जलाने के लिए सुबह और रात का समय भी तय किया गया है. सुबह 6 बजे से 7 बजे तक और रात 8 बजे से 10 बजे तक ही आतिशबाजी की जा सकेगी. यानी दिनभर या देर रात तक पटाखे जलाने की छूट नहीं होगी. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी क्लियर किया है कि 9 नवंबर, 2026 से दिल्ली-NCR में पटाखों पर पूरी तरह से फिर बैन लागू हो जाएगा. इसलिए लोगों को तय तारीखों और समय का पालन करना होगा.
फैसले का किया स्वागत
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और दिल्ली के पूर्व विधायक आरपी सिंह ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में दीवाली के टाइम प्रदूषण का लेवल पहले के मुकाबले कम रहा है. उनके मुताबिक, ग्रीन पटाखों की परमिशन मिलने से लोगों को त्योहार मनाने का मौका मिलेगा. वहीं, दिल्ली सरकार में मंत्री आशीष सूद ने भी फैसले का स्वागत किया. उन्होंने दिल्ली के लोगों से अपील की कि वे पर्यावरण का ध्यान रखते हुए जिम्मेदारी से दीवाली मनाएं. उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि पर्यावरण की सुरक्षा के साथ त्योहार और दूसरे कार्यक्रम भी सामान्य तरीके से चलते रहें. कुल मिलाकर, इस दीवाली दिल्ली में पटाखों को लेकर नियम साफ हैं. ग्रीन पटाखे ही खरीदें, QR कोड से उनकी प्रमाणिकता जांचें और तय समय के अंदर ही आतिशबाजी करें. त्योहार की खुशियां भी बनी रहें और हवा पर भी कम से कम असर पड़े, यही इस फैसले का मकसद है.
News Source: ANI
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