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UP में 2027 की सियासी बिसात! दलित वोटबैंक पर नजर, मायावती ने आकाश आनंद को मैदान में उतारा

by Dheeraj Tripathi 25 August 2026, 6:09 PM IST
25 August 2026, 6:09 PM IST
Mega-battle Dalit vote bank 2027

UP Politics : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ दलित वोटबैंक को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. पश्चिमी यूपी में भीम आर्मी के बढ़ते प्रभाव के बीच बहुजन समाज पार्टी ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है. बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को चुनावी मोर्चे पर उतारा है. आकाश आनंद ने गौतमबुद्ध नगर के जेवर विधानसभा क्षेत्र के दनकौर में जनसभा कर युवाओं और दलित समाज को बसपा के साथ जोड़ने की अपील की.

PM मोदी पर है दलित समाज का विश्वास

दलित वोटबैंक की इस सियासत का दायरा सिर्फ बसपा और भीम आर्मी तक सीमित नहीं है. कांग्रेस आरक्षण और संवैधानिक अधिकारों के मुद्दे को लेकर बीजेपी पर हमलावर है, तो बीजेपी का दावा है कि दलित समाज का भरोसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पर कायम है. वहीं, समाजवादी पार्टी दलित वोटरों को अपने PDA गठजोड़ के साथ मजबूती से जोड़ने का दावा कर रही है यानी 2027 से पहले दलित वोटबैंक और आरक्षण बड़ा सियासी अखाड़ा बनता दिख रहा है.

दलित वोट बैंक पर कई राजनीतिक दलों की नजर

पश्चिमी यूपी में दलित राजनीति को लेकर तस्वीर तेजी से बदल रही है. कभी बसपा का मजबूत आधार रहे दलित वोटबैंक पर अब कई राजनीतिक दलों की नजर है. भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के प्रभाव के बीच बसपा भी अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश में जुटी है. इसी रणनीति के तहत आकाश आनंद लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं.

गौतमबुद्ध नगर के जेवर विधानसभा क्षेत्र के दनकौर में जनसभा के दौरान आकाश आनंद ने युवाओं और दलित समाज को जोड़ने का आह्वान किया. संदेश साफ है कि बसपा अपने पुराने सामाजिक आधार को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है. लेकिन दलित सियासत का दूसरा बड़ा मुद्दा है आरक्षण और संविधान है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया है कि सरकार SC, ST, OBC और EWS वर्गों के आरक्षण को कमजोर करने की साजिश कर रही है. खड़गे का आरोप है कि सरकारी पद खाली रखे जा रहे हैं और कॉन्ट्रैक्ट पर कर्मचारियों की भर्ती बढ़ाई जा रही है. कांग्रेस इसे बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के दिए संवैधानिक अधिकारों से जोड़कर बीजेपी पर हमला कर रही है.

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बसपा को सभाएं करने का पूरा अधिकार

बीजेपी इन आरोपों को विपक्ष की चुनावी रणनीति बता रही है. बीजेपी प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि बसपा को अपनी सभाएं और सम्मेलन करने का पूरा अधिकार है, लेकिन चुनाव के समय सक्रिय होने वाली पार्टियों पर सवाल भी उठाया. बीजेपी का दावा है कि योगी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार ने बिना भेदभाव सभी वर्गों के लिए काम किया है और इसी वजह से दलित समाज समेत सभी वर्गों का रुख बीजेपी की ओर है. बीजेपी का तर्क है कि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की नीति के जरिए सरकार ने सामाजिक समीकरणों से ऊपर उठकर काम किया है.

ओमप्रकाश राजभर ने भी साधा विपक्ष पर निशाना

आरक्षण के मुद्दे पर योगी सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने भी विपक्ष पर निशाना साधा. राजभर ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी संविधान और आरक्षण खत्म होने का डर दिखा रहे थे, लेकिन मोदी सरकार बनने के बाद संविधान और आरक्षण सुरक्षित हैं. राजभर ने विपक्ष पर सत्ता हासिल करने के लिए भ्रम फैलाने का आरोप लगाया.

बीजेपी की रणनीति साफ है आरक्षण को लेकर विपक्ष के हमले का जवाब देकर दलित और पिछड़े वर्गों के बीच अपनी पकड़ बनाए रखना. वहीं, समाजवादी पार्टी बसपा की मौजूदा भूमिका पर ही सवाल उठा रही है. सपा प्रवक्ता आजम खान का दावा है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में बसपा की प्रासंगिकता खत्म हो चुकी है. उनका आरोप है कि बसपा को वोट देने का सीधा फायदा बीजेपी को होगा. सपा का दावा है कि दलित समाज अब PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक गठजोड़ के साथ मजबूती से खड़ा है.

सामाजिक समीकरण में स्थायी तौर पर जोड़ा जाए

सपा की कोशिश है कि दलित वोटरों को PDA के सामाजिक समीकरण में स्थायी तौर पर जोड़ा जाए, जबकि बसपा अपने पुराने दलित आधार को वापस हासिल करने की कोशिश कर रही है. 2027 की चुनावी लड़ाई अभी दूर है, लेकिन यूपी में सामाजिक समीकरणों की बिसात अभी से बिछने लगी है. खासतौर पर दलित वोटबैंक को लेकर मुकाबला बहुकोणीय होता दिख रहा है. बसपा अपने पुराने किले को बचाने की कोशिश में है, आकाश आनंद को पश्चिमी यूपी में सक्रिय किया गया है, सपा PDA के जरिए दलितों को अपने साथ जोड़ने का दावा कर रही है. कांग्रेस संविधान और आरक्षण के मुद्दे को धार दे रही है और बीजेपी अपने शासन व कल्याणकारी योजनाओं के जरिए दलित समर्थन बरकरार रखने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है.
सवाल यही है कि 2027 में दलित वोटबैंक किसके साथ जाएगा, क्या आकाश आनंद बसपा की खोई जमीन वापस दिला पाएंगे या सपा का PDA और बीजेपी का सामाजिक समीकरण बसपा के सामने बड़ी चुनौती बना रहेगा.

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