Home Top News Gen Z और Gen Alpha की चिंताओं पर एक्शन! राजस्थान HC ने मांगा सरकार से प्लान

Gen Z और Gen Alpha की चिंताओं पर एक्शन! राजस्थान HC ने मांगा सरकार से प्लान

by Sachin Kumar 25 August 2026, 2:13 PM IST (Updated 25 August 2026, 2:18 PM IST)
25 August 2026, 2:13 PM IST (Updated 25 August 2026, 2:18 PM IST)
Rajasthan HC takes Gen Z Gen Alpha concerns

Rajasthan High Court: राजस्थान हाई कोर्ट ने Gen Z, Gen Alpha और Gen Beta से जुड़ी समस्याओं पर स्वतः संज्ञान लिया है. जस्टिस अनूप कुमार की पीठ ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर पेपर लीक, ग्रामीण स्कूलों में खराब बुनियादी ढांचे, रोजगार के अवसरों में अंतर, मानसिक स्वास्थ्य और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभाव जैसी समस्याओं से निपटने के लिए स्टेटस रिपोर्ट और एक्शन प्लान पेश करने का निर्देश दिया है.

स्कूल के बाहर नहीं बिकेंगी ये चीजें

जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने सोमवार को स्कूल कैंटीन और स्कूल के 50 मीटर दायरे में ज्यादा फैट, ज्यादा शुगर और ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थों पर रोक लगा दी. वहीं, जिन चीजों पर प्रतिबंध लगाया गया है उनमें कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, चिप्स, ट्रांस-फैट शामिल हैं. कोर्ट ने हर स्कूल को चार हफ्ते के अंदर ‘स्कूल फूड सेफ्टी एंड न्यूट्रिशन कमिटी’ बनाने का निर्देश दिया है. इसमें टीचर, माता-पिता और स्टूडेंट रिप्रेजेंटेटिव हो सकेंगे. कमिटी की सभी जानकारी एजुकेशन डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी. साथ ही 8 हफ्तों के भीतर स्कूल कैंटीन में मैन्यू बोर्ड लगाना जरूरी होगा, जिसमें खाने की चीजों की कैलोरी, उसमें इस्तेमाल सामग्री और न्यूट्रिशनल वैल्यू की जानकारी शामिल होगी.

मिड-डे मील को लेकर भी कोर्ट सख्त

इसके अलावा कोर्ट ने स्वास्थ्य, शिक्षा और उपभोक्ता मामलों के विभागों के साथ-साथ राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया. अब इन सभी अथॉरिटी को 8 हफ्तों के भीतर हाई कोर्ट में जवाब दाखिल करना होगा. राज्य सरकार से कहा गया है कि वह 6 हफ्तों के भीतर हलफनामा दायर करें, जिसमें सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में संतुलित भोजन से जुड़े 2020 के नियमों को लागू किया गया था या नहीं. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि मिड-डे मील और अन्य पोषण योजनाएं FSSAI के संतुलित आहार संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुरूप हों. खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों के लिए समर्पित पोर्टल और हेल्पलाइन भी बनाई जानी चाहिए.

टेक्नोलॉजी पर नहीं होनी चाहिए अत्यधिक निर्भरता

कोर्ट ने मोबाइल स्क्रीन टाइम बढ़ने और टेक्नोलॉजी के अत्यधिक इस्तेमाल पर भी चिंता जाहिर की है. हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा की तैयारी करने के लिए AI और डिजिटल लर्निंग जरूरी हैं लेकिन उसको बुनियादी जरूरतों के लिए पूरी तरह तकनीक पर निर्भर नहीं होना चाहिए. न्यायालय ने डिजिटल शिक्षा और सीखने के पारंपरिक तरीकों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए हस्तलेखन, किताबें पढ़ने, नोट्स बनाने, स्वतंत्र सोच और लिखित परीक्षाओं को बनाए रखने पर जोर दिया.

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News Source: PTI

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