Home Religious जया एकादशी पर व्रत करने से मिलेगी भय से मुक्ति, जानें महत्व, शुभ मुहूर्त और जरूरी नियम

जया एकादशी पर व्रत करने से मिलेगी भय से मुक्ति, जानें महत्व, शुभ मुहूर्त और जरूरी नियम

by Neha Singh
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Jaya Ekadashi 2026

Jaya Ekadashi 2026: माघ महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली जया एकादशी को विशेष रूप से फलदायी और शुभ माना जाता है. यहां जाने इसका शुभ मुहूर्त कब है.

25 January, 2026

सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बहुत महत्व है. एकादशी महीने में दो बार आती है. माघ महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली जया एकादशी को विशेष रूप से फलदायी और शुभ माना जाता है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, 2026 में जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी को रखा जाएगा. हालांकि, अनजाने में की गई गलतियां कभी-कभी व्रत के लाभ को कम कर सकती हैं, इसलिए इन नियमों का पालन करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां आपको जया एकादशी का महत्व, शुभ मुहूर्त और किन गलतियों को नहीं करना चाहिए, इसके बारे में बताया गया है.

जया एकादशी का शुभ मुहूर्त

जया एकादशी 28 जनवरी को शाम 4 बजकर 35 मिनट पर शुरू होगी और 29 जनवरी को दोपहर 1 बजकर 55 मिनट पर खत्म होगी. इसलिए व्रत 29 जनवरी को ही रखा जाएगा. वहीं पूजा करने का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 11 मिनट से 8 बजकर 58 मिनट तक रहेगा. इसी के साथ पारण के लिए 30 जनवरी को सुबह 7 बजकर 10 मिनट से 9 बजकर 20 मिनट तक का मुहूर्त शुभ है.

एकादशी पर क्या न करें

  • शास्त्रों में कहा गया है कि एकादशी के दिन चावल खाना सख्त मना है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन चावल खाने से अगले जन्म में रेंगने वाले जीव के रूप में जन्म होता है. चाहे कोई व्रत रख रहा हो या नहीं, इस दिन चावल से परहेज किया जाता है.
  • इसके साथ ही, वाणी और व्यवहार में संयम बनाए रखना चाहिए. झूठ बोलना, दूसरों की बुराई करना, या गुस्सा करना व्रत के पुण्य को नष्ट कर सकता है. शांत रहना और “ओम नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना इस दिन विशेष रूप से फायदेमंद माना जाता है.
  • जया एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना भी मना है. तुलसी भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है, लेकिन एकादशी के दिन इसके पत्ते तोड़ना वर्जित है. इसलिए, दशमी (एकादशी से एक दिन पहले) को तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लेने चाहिए.
  • इसके अलावा, व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. इसके अलावा प्याज, लहसुन, मांस और शराब जैसे तामसिक भोजन, साथ ही दाल और शहद का सेवन भी इस दिन वर्जित है.

जया एकादशी का महत्व

जया एकादशी का महत्व एक पौराणिक कहानी से भी जुड़ा है जिसमें पुष्पवंत नाम के एक गंधर्व और पुष्पवंती नाम की एक अप्सरा को श्राप मिला और वे राक्षस बन गए. हालांकि, अनजाने में जया एकादशी का व्रत रखने से वे अपने दुखों से मुक्त हो गए. यही वजह है कि इस एकादशी को डर, रुकावटों और नकारात्मक शक्तियों से बचाने वाला व्रत माना जाता है. जया एकादशी के दिन व्रत रखने से मनुष्य को प्रेत-पिशाच के भय से मुक्ति मिलती है.

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