Home Latest News & Updates कर्नाटक में बढ़ा प्रदूषण नियंत्रण फीस, जानिए किस गाड़ी के लिए अब देने होंगे कितने पैसे? बीजेपी ने सरकार को घेरा

कर्नाटक में बढ़ा प्रदूषण नियंत्रण फीस, जानिए किस गाड़ी के लिए अब देने होंगे कितने पैसे? बीजेपी ने सरकार को घेरा

by Sanjay Kumar Srivastava 16 August 2026, 7:34 PM IST
16 August 2026, 7:34 PM IST
कर्नाटक में बढ़ा प्रदूषण नियंत्रण फीस, जानिए किस गाड़ी के लिए अब देने होंगे कितने पैसे? बीजेपी ने सरकार को घेरा

Fee Hike: कर्नाटक सरकार ने ऑपरेशन और मेंटेनेंस की लागत में काफी बढ़ोतरी का हवाला देते हुए प्रदूषण नियंत्रण टेस्टिंग फीस बढ़ा दी है. सरकारी आदेश के अनुसार, दो पहिया वाहनों के लिए टेस्टिंग फीस 65 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये कर दी गई है, जबकि तीन पहिया वाहनों के लिए फीस 75 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये कर दी गई है. पेट्रोल, LPG या CNG से चलने वाले चार-पहिया वाहनों के लिए फीस 115 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये कर दी गई है, जबकि डीजल से चलने वाले वाहनों के लिए फीस 160 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये कर दी गई है.

फीस बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेने की मांग

इस बढ़ोतरी पर कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए वरिष्ठ BJP नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि वाहनों के लिए अनिवार्य नियमों का पालन मेहनती कन्नड़ लोगों से पैसे वसूलने का एक और ज़रिया नहीं बनना चाहिए. जन-विरोधी फीस बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि कर्नाटक के लोग इस लगातार बढ़ते बोझ से तंग आ चुके हैं. यह बदलाव बेंगलुरु स्थित ‘कर्नाटक पॉल्यूशन टेस्टिंग सेंटर ओनर्स एसोसिएशन’ के अनुरोध पर ट्रांसपोर्ट और रोड सेफ्टी कमिश्नर के प्रस्ताव के बाद किया गया है. एसोसिएशन ने मौजूदा फीस में बदलाव की मांग की थी. उन्होंने कच्चे माल, पेट्रोल और डीजल, रोज़मर्रा की चीज़ों, टेस्टिंग सेंटर के किराए, इंटरनेट सुविधाओं, उपकरणों के रखरखाव, प्रिंटर कार्ट्रिज, बिजली और कर्मचारियों की सैलरी जैसी ऑपरेशनल लागतों में बढ़ोतरी का हवाला दिया था.

कंप्यूटराइज्ड सिस्टम लगे सेंटर ही मान्य

हालांकि, बदली हुई फीस लेने के लिए सिर्फ़ वही प्रदूषण टेस्टिंग सेंटर योग्य होंगे जिनमें कंप्यूटराइज्ड सिस्टम लगे हों. नई फीस सिर्फ़ एमिशन टेस्टिंग पर लागू होगी. सरकार ने टेस्टिंग सेंटरों के लिए कई शर्तें तय की हैं.सेंटरों को ट्रेंड कर्मचारी रखने होंगे और यह पक्का करना होगा कि गैस एनालाइज़र की समय-समय पर और सही तरीके से री-कैलिब्रेशन (फिर से कैलिब्रेट) की जाए.लेटेस्ट री-कैलिब्रेशन की तारीख और वैलिडिटी की अवधि ऐसी जगह पर साफ़-साफ़ दिखनी चाहिए जहां आम लोग उसे देख सकें. सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि तय सर्टिफिकेट पर हाथ से लिखी हुई कोई एंट्री नहीं होनी चाहिए. प्रदूषण सर्टिफिकेट सिर्फ़ उन्हीं गाड़ियों को जारी किए जाने चाहिए जिनका एमिशन लेवल सेंट्रल मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 115 के तहत तय सीमाओं के मुताबिक हो. लाइसेंस रखने वालों को टेस्टिंग सेंटरों पर आम लोगों के देखने के लिए अपने लाइसेंस साफ़-साफ़ दिखाने होंगे और ऑनलाइन जारी किए गए प्रदूषण सर्टिफिकेट पर होलोग्राम लगाना होगा.

आम आदमी की जेब काट रही कांग्रेस सरकार

कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए अशोक ने कहा कि एक और दिन, आम आदमी पर एक और बोझ! उन्होंने कहा कि पहले दूध की कीमतें, बिजली के दाम, बस का किराया, मेट्रो का किराया, स्टाम्प ड्यूटी और प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन चार्ज बढ़ाए गए. अब सरकार ने सभी तरह की गाड़ियों के लिए एमिशन टेस्टिंग चार्ज बढ़ा दिए हैं, जिससे सीधे तौर पर दोपहिया वाहन मालिकों, ऑटो ड्राइवरों, डिलीवरी करने वालों और रोज़ाना सफर करने वालों पर असर पड़ेगा. अशोक ने कहा कि अपनी वित्तीय गड़बड़ियों को ठीक करने के बजाय, कांग्रेस सरकार हर कदम पर आम आदमी की जेब काट रही है. उन्होंने कहा कि गाड़ियों के नियमों का पालन अनिवार्य करना, मेहनती कन्नड़ लोगों से पैसे वसूलने का एक और ज़रिया नहीं बनना चाहिए. यही कांग्रेस के ‘गारंटी’ मॉडल का असली चेहरा है.

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News Source: PTI

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