Middle East Tension: 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद से ही मध्य पूर्व में तनाव बना हुआ है. अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में 45 दिनों के अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी थी. हालांकि, यह युद्धविराम तीन दिन भी नहीं टिक सका और दोनों देशों के बीच फिर से हमले शुरू हो गए. राहत की बात यह रही कि ये हमले बड़े स्तर पर नहीं हुए. युद्धविराम समाप्त होने के बाद ईरान ने एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान कर दिया. इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के बंद होने की आशंका से क्षेत्र में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया. इसी बीच ईरान ने दावा किया कि कतर ने उसके तीन पायलटों को हिरासत में लिया है, जो मार्च से लापता थे. कतर ने इस दावे से इनकार किया है. वहीं, संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने एक जहाज पर दोबारा हमला करने का आरोप लगाया है.
इसके अलावा ईरान समर्थित हूतियों ने यमन में लाल सागर के एक बंदरगाह पर फिर से हमला किया. वहीं, दक्षिणी लेबनान में इजरायली हवाई हमलों में 11 लोगों की मौत हो गई. ये हमले 20 जून को इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच हुए संघर्षविराम के बाद के सबसे घातक हमलों में से एक बताए जा रहे हैं.
कतर ने आरोपों को किया खारिज
ईरान की आर्म्ड फोर्सेज जनरल स्टाफ की ‘मिसिंग पर्सन्स कमिटी’ का कहना है कि कतर की सेना ने उन तीन पायलटों को पकड़कर रखा था जो मार्च में अपने जेट्स के गिराए जाने के बाद लापता हो गए थे. हालांकि, कतर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. अभी तक तेहरान का कहना था कि उसे उनके हाल-चाल के बारे में कोई जानकारी नहीं है. युद्ध के दौरान यह पहला ऐसा मामला सामने आया है जिसमें ईरान ने कहा है कि किसी पड़ोसी देश ने उसके लड़ाकों को हिरासत में रखा है. कतर ने 2 मार्च को कहा था कि उसकी वायु सेना ने ईरान के दो बॉम्बर विमानों को मार गिराया था, जब युद्ध के शुरुआती दिनों में तेहरान ने उन देशों की आलोचना की थी जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद थे. ईरान ने एक बयान जारी करके शनिवार को आरोप लगाया कि कतर ने पायलटों को उनके परिवारों या उनके मामलों को देख रहे ईरानी अधिकारियों से मिलने की इजाजत नहीं दी. इस मुद्दे को लेकर ईरान ने इंटरनेशनल कमिटी ऑफ द रेड क्रॉस के प्रेसिडेंट से मदद मांगी. सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पत्र में कहा गया है कि कतर में दुश्मन के सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने के मिशन के दौरान एक चौथा पायलट मारा गया था.
गिराए गए थे पायलटों के विमान
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने ईरान के दावे को खारिज कर दिया है. मंत्रालय ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि पायलटों के विमान मार गिराए गए थे और कतर की सर्च एंड रेस्क्यू टीमों को उनमें से एक के अवशेष मिले थे. उन्होंने कहा कि अप्रैल में ईरान को इन कोशिशों के बारे में जानकारी लेने और देखने के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला. वहीं, अमीरात की सरकारी समाचार एजेंसी WAM ने शनिवार को बताया कि अबू धाबी की सरकारी तेल और गैस कंपनी ADNOC के टैंकर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरते समय हमला किया गया. एजेंसी ने बताया कि शुक्रवार शाम हुए इस हमले में कोई घायल नहीं हुआ. पिछले एक हफ्ते में इस अहम समुद्री रास्ते पर ADNOC द्वारा संचालित किसी जहाज पर हुआ यह तीसरा हमला था. संयुक्त अरब अमीरात ने एक बयान में ईरान से बिना उकसावे के किए जा रहे इन हमलों को रोकने की मांग की. यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स सेंटर ने बताया कि शुक्रवार को एक बल्क कैरियर के निचले हिस्से पर किसी अज्ञात जगह से हमला हुआ.
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इजरायली हमले में 11 लोगों की हुई मौत
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के साथ शुरू हुई जंग के बाद ईरान ने इस जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण कर लिया. शनिवार को दक्षिणी लेबनान में इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि एक हमले में अंसार गांव के किनारे पर स्थित एक घर को निशाना बनाया गया, जिसमें तीन बच्चों समेत 7 लोगों की मौत हो गई और दो लोग घायल हो गए. दूसरा हमला में देर अल-ज़हरानी गांव पर हुआ. यहां पर चार लोगों की मौत हो गई और करीब 17 लोग बुरी तरह घायल हुए. इजरायली सेना ने कहा कि उसने दक्षिणी लेबनान में एक मुख्यालय पर हिज्बुल्लाह बटालियन के कमांडर और कई अन्य चरमपंथियों को मार गिराया. यह कार्रवाई वहां तैनात इजरायली सैनिकों के खिलाफ समूह की गतिविधियों के जवाब में की गई थी. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने एक अलग बयान में कहा कि तीन सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं. सेना ने इसके लिए एक विस्फोटक ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया. सेना ने कहा कि कमांडर का परिवार उसके साथ था और इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए कि परिवार के सदस्य हमले का निशाना नहीं थे.
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मानव ढाल के तौर पर इस्तेमाल किया
सेना और नेतन्याहू के कार्यालय ने आरोप लगाया कि कमांडर ने परिवार के सदस्यों का इस्तेमाल ‘ह्यूमन शील्ड’ के तौर पर किया था. यह उन दिनों में से एक सबसे घातक दिन था जब लेबनान सरकार और इजरायल ने एक ‘फ्रेमवर्क समझौते’ की घोषणा की थी. इस समझौते में हिज्बुल्लाह के हथियार छोड़ने के बदले दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की वापसी की योजना बनाई गई थी. चरमपंथी समूह ने सीधी बातचीत से इनकार कर दिया था और वह इस समझौते का हिस्सा नहीं था. दूसरी ओर यमन की सेना ने बताया कि हूथी विद्रोहियों ने रेड सी में स्थित मोखा बंदरगाह पर हमला किया. वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के नियंत्रण में हैं. बंदरगाह के डायरेक्टर अब्दुल-मलिक अल-शराबी ने मीडिया को बताया कि शुक्रवार शाम हुए इस हमले में दो मरीन समेत तीन लोगों की मौत हो गई और बंदरगाह का कामकाज रोक दिया गया है. सेना के प्रवक्ता कर्नल माजिद अल-नजिली ने एक बयान में कहा कि हूथी विद्रोहियों ने छह बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. सरकारी नियंत्रण वाले इलाकों और पड़ोसी देश सऊदी अरब पर हूथी विद्रोहियों का यह हमला हालिया घटनाओं में से एक है. यह तनाव बढ़ने का संकेत है जिससे यमन के फिर से गृहयुद्ध में फंसने का खतरा पैदा हो गया है. जानकारों का मानना है कि तनाव में यह बढ़ोतरी दिखाती है कि ईरान किस तरह अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों पर दबाव बढ़ा रहा है.
हथियार छुड़वाने की कही बात
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 10 अगस्त को कहा था कि जब तक हमास पूरी तरह से हथियार नहीं छोड़ देता, तब तक इजरायली सेना गाजा में अपनी मौजूदा जगहों से पीछे नहीं हटेगी. सोशल मीडिया पर नेतन्याहू ने कहा कि चरमपंथी गुट के हथियार छोड़ने के लिए हाल ही में घोषित समझौते को लेकर इजरायल और ट्रंप प्रशासन के बीच मतभेद थे. इस समझौते में हमास से हथियार छोड़ने की शुरुआत करने और इजरायल से हमले रोकने और गाजा से पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई थी. यह अक्टूबर में हुए उस युद्धविराम समझौते का हिस्सा था, जिसने बड़े सैन्य अभियानों को तो खत्म कर दिया था, लेकिन अन्य मोर्चों पर यह समझौता रुका हुआ है.
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नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि
नेतन्याहू ने कहा कि हथियारों को खत्म करना सबसे जरूरी है और इजरायली सेनाएं अपने इलाके और अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए जो भी जरूरी होगा. नेतन्याहू ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने हमें एक ड्राफ्ट भेजा था. हम उससे सहमत नहीं थे. वह हमारा ड्राफ्ट नहीं है. हमने अपनी राय भेजी है. यही हमारा रुख है. हम अपने हितों के लिए मजबूती से खड़े हैं और मेरा मानना है कि हम समझदारी और दृढ़ता के साथ ऐसा कर रहे हैं. इससे पहले फिलिस्तीनी लोग 2023 में गाजा में हुए एक घातक इजरायली हमले में मारे गए 100 से ज्यादा लोगों के शवों के सामूहिक अंतिम संस्कार के लिए इकट्ठा हुए. हमास के साथ युद्ध शुरू होने के कुछ हफ्ते बाद 22 नवंबर 2023 को गाजा शहर के सबरा इलाके में लड़ाकू विमानों ने रिहायशी इमारतों के एक ब्लॉक को पूरी तरह तबाह कर दिया था, जिसमें 300 से ज्यादा लोग मारे गए थे.
7 अक्टूबर 2023 को हमास ने किया था हमला
गौरतलब हो कि पीएम नेतन्याहू के बयान पर व्हाइट हाउस की ओर से तुरंत कोई टिप्पणी नहीं आई. वहीं, हमास के पॉलिटिकल ब्यूरो के सदस्य बासेम नईम ने कहा कि हम रोडमैप के लिए प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने आगे कहा कि समूह को उम्मीद है कि मध्यस्थ और अमेरिका नेतन्याहू पर दबाव डालेंगे, नेतन्याहू को घरेलू तनाव का भी सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वह 27 अक्टूबर को होने वाले अगले चुनावों से पहले सत्ता बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. बता दें कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में इजरायल पर हुए हमले से गाजा में युद्ध शुरू हुआ था. अभी भी एक नाजुक युद्धविराम लागू है. हमास के इस हमले में 1200 से अधिक लोगों की जान गई थी. फिलहाल इजरायली सेना गाजा के कई हिस्सों में मौजूद है और वह हमास को हर तरीके से जवाब देने के लिए तैयार है.
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