India France Trade: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस की यात्रा पर हैं. वे फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों के आमंत्रण पर जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पहुंचे हुए हैं. बता दें कि ये लगातार आठवीं बार है, जब भारत को जी7 समिट में शामिल होने के लिए निमंत्रित किया गया है. यह खास इसलिए है क्योंकि भारत जी7 का सदस्य नहीं है. इसमें फ्रांस, अमेरिका, यूनाइडेट किंगडम (ब्रिटेन), जर्मनी, कनाडा, इटली और जापान शामिल हैं.
जी7 समिट का आयोजन फ्रांस में 15 से 17 जून तक हुआ है. पीएम मोदी इस सम्मेलन के अलावा फ्रांस और भारत की मजबूती को लेकर कई बैठकें भी करते हुए दिख रहे हैं. रविवार को उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की. इस दौरान दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर चर्चाएं हुईं और फिर पीएम मोदी और प्रेसिडेंट मैक्रों के बीच हुई वार्ता में करीब 13 अहम बड़े मुद्दों पर फैसले लिए गए. इनमें राफेल लड़ाकू विमान को भारत में बनाने की भी बात हुई. इसके अलावा फ्रांस और भारत के व्यापार को अगले पांच वर्षों में दोगुना करने के लिए रणनीति बनी.
दुनिया में फ्रांस, भारत का एक ऐसा ट्रेड पार्टनर है, जो रक्षा से लेकर अन्य इंडस्ट्रीज और सांस्कृतिक क्षेत्र में भी देश का साथ देता है. इतना ही नहीं दोनों ही देश एक-दूसरे के राष्ट्र के युवाओं के लिए शैक्षणिक योग्यताओं और क्षेत्रों में भी बहुत कुछ करते हुए दिखे हैं. विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने यह जानकारी दी कि दोनों नेताओं ने प्रतिभाओं की आवाजाही और शैक्षणिक योग्यताओं की आपसी मान्यता का दायरा बढ़ाने पर भी चर्चा की.
अब आइए जानते हैं कि पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में किन 13 मुद्दों पर बात बनी है. उसके बाद हम यह जानेंगे कि भारत और फ्रांस के बीच कुल कितने करोड़ रुपये का ट्रेड है और पिछले 5 वित्त वर्षों के इसके आंकड़े क्या कुछ कहते हैं. भारत-फ्रांस रिश्तों के बाद आखिरी में हम जी7 की कुछ खास बातों को भी जानेंगे.

मोदी-मैक्रों मीटिंग में 13 बड़े फैसले
- फ्रांस में यूपीआई विस्तार का फैसला. जानकारी के अनुसार, आने वाले कुछ हफ्तों में फ्रांस की राजधानी पेरिस के चार्ल्स डी गाल एयरपोर्ट और नीस के एयरपोर्ट पर UPI उपलब्ध कराने पर सहमति बनी है.
- दोनों दिग्गज नेताओं के बीच वार्ता में इंडिया-फ्रांस इनोवेशन रोडमैप 2030 पेश किया गया. इसका मकसद अकादमिक मोबिलिटी व इंडस्ट्री-अकादमिक लिंकेज को बढ़ावा देना और उभरती तकनीकी के साथ स्टार्टअप में सहयोग को गहरा करना है.
- जैतापुर में प्रोजेक्ट सहित असैन्य परमाणु क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बातचीत हुई.
- भारत और फ्रांस ने अगले पांच वर्षों में आपसी व्यापार को दोगुना करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक उच्चस्तरीय तंत्र बनाने की भी घोषणा की. आंकड़ों के मुताबिक, अभी दोनों देशों के बीच करीब 16 अरब डॉलर का व्यापार होता है.
- संयुक्त एआइ कार्यसमूह बनाने पर सहमति बनी. इसका मकसद एआइ गवर्नेस, संयुक्त रिसर्च व विकास, क्षमता निर्माण व उद्योगों के बीच वार्ता में मदद करना है.
- दोनों देशों ने कानपुर में एयरोनाटिक्स और उससे जुड़े सेक्टर में स्किल डेवलपमेंट के लिए एक नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने की घोषणा की.
- दोनों देशों के बीच संग्रहालयों और सांस्कृतिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी. इसमें गुजरात के लोथल में स्थित नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कांप्लेक्स भी शामिल है.
- 114 राफेल विमानों की डील पर भी चर्चा और बात बनी. बातचीत में यह बात सामने आई कि 24 राफेल फ्रांस से भारत आएंगे और 90 राफेल भारत में ही बनाए जाएंगे. बताया गया कि भारत चाहता है कि राफेल 60 फीसदी स्वदेशी रहे.
- हेल्थ सेक्टर में आईसीएमआर और फ्रांस का हेल्थ डेटा हब मिलकर काम करेंगे.
- फ्रांस में भारतीय यात्रियों को बिना वीजा एयरपोर्ट ट्रांजिट सुविधा देने पर बात बनी है.
- नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत फ्रांसीसी यूनिर्सिटीज को भारत में कैंपस खोलने के लिए आमंत्रित किया गया है.
- डिफेंस सेक्टर में सैन्य हथियारों के को-डिजाइन, को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन पर काम करने पर बात आगे बढ़ी है.
- भारत-यूरोपियन यूनियन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को जल्द से जल्द लागू करने पर सहमति बनी है.

भारत-फ्रांस डिफेंस बाजार और रिश्ते
भारत दुनिया के कई देशों से डिफेंस सेक्टर में हथियारों की खरीदारी करता है. एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत रूस से सबसे अधिक हथियारों को खरीदता है. SIPRI की 2019-23 की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस से भारत करीब 36 फीसदी हथियार का आयात होता है. दूसरे स्थान पर फ्रांस है. फ्रांस से भारत करीब 33 फीसदी हथियारों की खरीदारी करता है. उसके बाद अमेरिका से 13 फीसदी और इजरायल से 9 फीसदी की खरीदारी है. फ्रांस के साथ भारत का डिफेंस सेक्टर का बाजार और डील खास रही है. जानकारी के अनुसार, फ्रांस और भारत के सीक्रेट और डिफेंस फोर्स एक-दूसरे को आतंकवाद के खिलाफ काफी मदद करते हैं.
दोनों देशों के बीच रिश्ते काफी पुराने और मजबूत हैं. 1974 में फ्रांस की मदद से भारत ने पहला परमाणु परीक्षण किया था. इससे 10 साल पहले यानी कि 1964 में भारत और फ्रांस के बीच पहला अंतरिक्ष समझौता हुआ था. दोनों देशों के सैनिकों ने कई बार आपस में अभ्यास किया है. साल 2019 में फ्रांस ने यूएन में कश्मीर के मुद्दे पर अपना वीटो का इस्तेमाल भारत के समर्थन में किया था. उसने पाकिस्तान के प्रस्ताव को वीटो किया था. दोनों देशों में हथियार, संस्कृति, व्यापार, शिक्षा, सुरक्षा, तकनीकी समेत कई मुद्दों पर बात बनती रही है और एक-दूसरे का सहयोग जारी रहता है.
भारत और फ्रांस के बीच व्यापार
भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हम यहां सबसे पहले वित्त वर्ष 2025-26 में फ्रांस-भारत के व्यापार आंकड़ों को बता रहे हैं. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने फ्रांस को कुल 62 हजार 782.52 करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट (निर्यात) किया था. वहीं, फ्रांस से भारत में कुल 77 हजार 260.50 करोड़ रुपये का आयात हुआ था. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और फ्रांस के बीच कुल ट्रेड 1 लाख 40 हजार 43.02 करोड़ रुपये का रहा. इसमें पिछले वित्त वर्ष यानी कि 2024-25 के कुल 1 लाख 28 हजार 311.10 करोड़ रुपये के ट्रेड से अधिक की बढ़ोतरी दिखी.

2021 से 2025 तक भारत-फ्रांस के ट्रेड
सबसे पहले बात हम वित्त वर्ष 2021-22 की करते हैं. इस वित्त वर्ष में भारत और फ्रांस के बीच कुल ट्रेड 92 हजार 658.36 करोड़ रुपये का रहा. इनमें भारत का एक्सपोर्ट 49 हजार 605.10 करोड़ रुपये और फ्रांस से भारत में इंपोर्ट 43 हजार 53.26 करोड़ रुपये का रहा. अब बात वित्त वर्ष 2022-23 की करेंगे. इस वित्त वर्ष में भारत-फ्रांस का कुल ट्रेड 1 लाख 11 हजार 67.24 करोड़ रुपये का था. इसमें भारत का एक्सपोर्ट 61 हजार 48.59 रुपये और इंपोर्ट 50 हजार 18.65 करोड़ रुपये का रहा.
वित्त वर्ष 2023-24 में भारत और फ्रांस का कुल व्यापार बढ़कर 1 लाख 25 हजार 163.13 करोड़ रुपये का हो गया. इसमें भारत का एक्सपोर्ट 59 हजार 124.06 करोड़ रुपये का और इंपोर्ट 66 हजार 39.07 करोड़ रुपये का था. अब बात वित्त वर्ष 2024-25 के व्यापार की. भारत और फ्रांस के बीच 2024-25 में कुल ट्रेड 1 लाख 28 हजार 311.10 करोड़ रुपये का था. इसमें भारत का एक्सपोर्ट 67 हजार 292.86 करोड़ रुपये का और इंपोर्ट 61 हजार 18.25 करोड़ रुपये का रहा.

जी7 की कुछ खास बातें
- सन् 1975 में G6 (जो अब G7 है) का गठन हुआ था. तब तेल के पहले संकट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर आर्थिक सहयोग की जरूरत को उजागर किया था. यह तेल संकट 1973 में आया था. इस ग्रुप के गठन के बाद पहला शिखर सम्मेलन फ्रांस के रामबौइलेट में हुआ था.
- साल 1975 में जी6 का गठन हुआ था, लेकिन अगले साल ही यानी कि इसके गठन के एक साल बाद ही कनाडा भी इसका सदस्य हो गया, जिसके बाद जी6 से जी7 बन गया.
- G7 देश हर साल शांति और सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि और उसकी स्थिरता, विकास, पर्यावरण में बदलाव और नई तकनीकों जैसे अहम मुद्दों पर मिलकर काम करने के लिए बैठक करते हैं.
- इस बार का जी7 का सालाना बैठक फ्रांस की अध्यक्षता में हो रहा है. यह शिखर सम्मेलन 15 से 17 जून को रूस के एवियन-लेस-बैंस शहर में आयोजित किया गया है.
- साल 1998 में रूस के शामिल होने से जी7 को जी8 कहा जाने लगा. लेकिन साल 2014 में रूस ने क्रीमिया पर कब्जा कर लिया. इसके बाद अमेरिका सहित कई पश्चिमी देश रूस के खिलाफ हो गए. रूस पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करने के भी आरोप लगे. इन सभी वजहों से रूस को जी8 से एक तरह से हटा दिया गया. उसके बाद जी8 फिर से जी7 हो गया.
- G7 को ‘ग्रुप ऑफ 7’ कहते हैं. इनमें 7 देश कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका शामिल हैं. 1977 से ही यूरोपीय संघ G7 के कामकाज में पूरी तरह से शामिल रहा है.
- जी7 की खासियत यह है कि इसका कोई कानूनी अस्तित्व, स्थायी सचिवालय या पदेन सदस्य नहीं हैं. इसका एकमात्र नियम यह है कि हर साल सात देशों में से कोई एक देश इसकी अध्यक्षता करता है.
- अध्यक्ष देश ही समूह के कामकाज के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराता है और अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं तय करता है. इस व्यवस्था को ‘रोटेटिंग प्रेसिडेंसी’ (बारी-बारी से अध्यक्षता) कहा जाता है.
- G7 की ताकत इसका छोटा आकार और आपसी भरोसे का वह रिश्ता है जो सालों-साल बना है. इसी भरोसे की वजह से अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख खुलकर और सीधे बातचीत कर पाते हैं, भले ही उनके बीच असहमति हो.
