Home Latest News & Updates Dollar की धमाकेदार एंट्री के बावजूद रुपये को नहीं मिल रही राहत! आने वाले दिनों में इतना रह सकता है भाव

Dollar की धमाकेदार एंट्री के बावजूद रुपये को नहीं मिल रही राहत! आने वाले दिनों में इतना रह सकता है भाव

by Preeti Pal 26 September 2026, 1:39 PM IST
26 September 2026, 1:39 PM IST
Dollar की धमाकेदार एंट्री के बावजूद रुपये को नहीं मिल रही राहत! आने वाले दिनों में इतना रह सकता है भाव

Dollar Vs Rupee: भारतीय रुपये के लिए आने वाले दिन अभी बहुत ज्यादा राहत वाले नजर नहीं आ रहे हैं. एक नई रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले टाइम में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.5 से 96 रुपये के दायरे में कारोबार कर सकता है. खास बात ये है कि देश में डॉलर की अच्छी-खासी एंट्री के बावजूद रुपये में वैसी मजबूती देखने को नहीं मिली है, जिसकी उम्मीद की जा सकती थी. बैंक ऑफ बड़ौदा रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, FCNR डिपॉजिट और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग यानी ECB के जरिए बड़ी मात्रा में डॉलर भारत आए हैं. हालांकि, इन डॉलर को बड़े पैमाने पर बाजार में उतारने के बजाय भारतीय रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार में जोड़ा गया है. यही वजह है कि डॉलर के आने के बावजूद रुपये की तेजी सीमित रही.

इतना रह सकता है रुपया के भाव

रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियों में आने वाले दियों में रुपये का भाव 94.5 से 96 रुपये प्रति डॉलर के बीच रह सकता है. यानी फिलहाल रुपये में अचानक बड़ी मजबूती की संभावना सीमित दिखाई दे रही है. रिपोर्ट के मुताबिक रुपये की चाल अब सिर्फ डॉलर की मांग और सप्लाई से तय नहीं होती. इसमें आर्थिक बुनियादी स्थितियों के साथ-साथ RBI का हस्तक्षेप और बाजार का सेंटीमेंट भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

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28 प्रतिशत कमजोर हुआ रुपया

रिपोर्ट में रुपये की लंबी अवधि की चाल पर भी नजर डाली गई है. जनवरी 2022 में रुपया औसतन 74.44 रुपये प्रति डॉलर था, जो अगस्त 2026 में बढ़कर 95.47 रुपये प्रति डॉलर हो गया. यानी इस अवधि में रुपये में करीब 28 फीसदी की गिरावट आई. इसी दौरान अमेरिकी डॉलर यूरो के मुकाबले करीब 2.4 प्रतिशत मजबूत हुआ. वहीं, जापानी येन में 38 प्रतिशत, इंडोनेशियाई रुपिया में 24 प्रतिशत और दक्षिण कोरियाई वॉन में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.

RBI की भूमिका

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिसर्च ने जनवरी 2022 से जून 2026 के बीच रुपये की चाल का अध्ययन किया. इसमें विदेशी मुद्रा भंडार में बदलाव, RBI के स्पॉट और फ़ॉरवर्ड मार्केट ऑपरेशन, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश यानी FPI और डॉलर-यूरो विनिमय दर जैसे कई फैक्टर शामिल किए गए. रिपोर्ट के मुताबिक, RBI की स्पॉट और फ़ॉरवर्ड दोनों तरह की गतिविधियों का रुपये की चाल से संबंध दिखाई दिया. दोनों को एक साथ देखने पर रुपये की हलचल को समझाने की क्षमता करीब 34 प्रतिशत रही. वहीं, स्पॉट इन्वेस्टिगेशन की क्षमता 25 फीसदी और फ़ॉरवर्ड ऑपरेशन की 19 प्रतिशत रही. हालांकि, दूसरे फैक्टर्स के साथ देखने पर उसका असर कम हो गया. रिपोर्ट के मुताबिक रुपये की चाल कई रास्तों से प्रभावित होती है और किसी एक कारण को इसका सबसे बड़ा ड्राइवर बताना मुश्किल है. यानी आने वाले समय में रुपये की दिशा तय करने में RBI की नीतियों के साथ-साथ आयातकों-निर्यातकों की डॉलर खरीद, रेमिटेंस और बाजार का सेंटीमेंट भी अहम भूमिका निभाएगा.

News Source: ANI

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