US Market Update: अमेरिकी मार्केट में बुधवार को एक साथ कई ऐसे हिंट मिले, जिन्होंने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी. तेल की कीमतों में तेज उछाल, अमेरिका में मजबूत कारोबारी गतिविधियों और कमजोर ट्रेजरी यील्ड बॉन्ड ऑक्शन ने मिलकर बॉन्ड मार्केट को हिला दिया. इसका सीधा असर वॉल स्ट्रीट पर भी दिखाई दिया. यही वजह है कि प्रमुख अमेरिकी शेयर इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए. सबसे ज्यादा चर्चा अमेरिकी 10 साल के ट्रेजरी यील्ड की रही. ये कारोबार के दौरान 5.135 प्रतिशत तक पहुंच गया. यह जुलाई 2007 के बाद इसका सबसे हाई लेवल है. दिन के अंत में यील्ड करीब 14 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 5.11 फीसदी पर पहुंच गया.
5 साल और 30 साल वाले यील्ड
बॉन्ड मार्केट में बिकवाली का दबाव सिर्फ 10 साल वाले यील्ड तक नहीं रहा. 5 साल वाले ट्रेजरी यील्स भी करीब 15 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 4.99 प्रतिशत और 30 साल वाले 10 बेसिस प्वाइंट चढ़कर 5.40 प्रतिशत पर पहुंच गए. 2 साल वाले ट्रेजरी यील्ड भी बढ़कर 4.947 फीसदी हो गया, जो मई 2024 के बाद का सबसे ऊंचा लेवल है. अब सवाल है कि ट्रेजडी यील्ड बढ़ने से आम निवेशक को क्या फर्क पड़ता है? दरअसल, जब अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर यील्ड बढ़ती है तो अर्थव्यवस्था में कर्ज लेने की लागत भी बढ़ सकती है. इसका असर गिरवी रखने से लेकर कॉर्पोरेट लोन तक पर दिखाई दे सकता है. कंपनियों की भविष्य की कमाई का मौजूदा मूल्यांकन भी दबाव में आ सकता है.
तेल ने बढ़ाई महंगाई की चिंता
बाजार में सबसे बड़ा टेंशन फैक्टर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही. कच्चा तेल करीब 3.9 प्रतिशत उछलकर 103.08 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. वहीं, US WTI क्रूड करीब 1.8 फीसदी बढ़कर 92.16 डॉलर प्रति बैरल रहा. तेल महंगा होने का मतलब है कि ट्रांसपोर्ट और एनर्जी कोस्ट का बढ़ना. इससे महंगाई पर दबाव लंबे समय तक बने रहने की चिंता बढ़ती है.
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मजबूत PMI ने भी बढ़ाई चिंता
अमेरिका के उत्पाद और सेवा PMI आंकड़ों ने भी कारोबारी गतिविधियों में मजबूती का संकेत दिया. मजबूत अर्थव्यवस्था सामान्य तौर पर अच्छी खबर होती है, लेकिन जब महंगाई पहले से ऊपर हो, तो निवेशकों को डर रहता है. यानी मजबूत मांग के कारण कीमतों पर दबाव बना रह सकता है. इसी बीच ट्रेजरी ऑक्शन कमजोर रहने से भी यील्ड को ऊपर जाने की वजह मिली. निवेशकों ने अमेरिकी सरकारी कर्ज खरीदने के लिए ज्यादा रिटर्न की मांग की.
वॉल स्ट्रीट में गिरावट
बॉन्ड यील्ड की तेज बढ़ोतरी का असर शेयर बाजार पर साफ नजर आया. S&P 500 में 0.75 फीसदी की गिरावट रही और ये 7,706.03 पर बंद हुआ. नैस्डैक कम्पोजिट 1.13 फीसदी गिरकर 26,936.04 पर पहुंच गया. इसके साथ नैस्डैक की लगातार चार कारोबारी सत्रों की तेजी का सिलसिला टूट गया. डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज भी 352.10 अंक यानी 0.68 फीसदी गिरकर 51,511.59 पर बंद हुआ.
Fed की अगली चाल
मजबूत आर्थिक गतिविधियों और लगातार बनी हुई महंगाई ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर नीति को लेकर बाजार की चिंता बढ़ा दी है. फ़ेडरल रिज़र्व के गवर्नर माइकल बार ने भी कहा कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए आगे और नीतिगत बदलाव की जरूरत पड़ सकती है. उन्होंने मजबूत आर्थिक वृद्धि और ठोस लेबर मार्केट के साथ-साथ महंगाई के केंद्रीय बैंक के 2 फीसदी लक्ष्य से ऊपर बने रहने की ओर इशारा किया. यानी फिलहाल अमेरिकी बाजार के लिए कहानी सीधी है. तेल महंगा, महंगाई की चिंता ज्यादा, बॉन्ड यील्ड ऊपर और शेयर बाजार पर दबाव. अब आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर फेड की अगली चाल, तेल की कीमतों और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर बनी रहेगी.
Source: ANI
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