Home Top News ‘इस्तीफा देने में ही भलाई…’ SIR विवाद के बीच पवन खेड़ा ने साधा निशाना; तो BJP ने किया पलटवार

‘इस्तीफा देने में ही भलाई…’ SIR विवाद के बीच पवन खेड़ा ने साधा निशाना; तो BJP ने किया पलटवार

by Sachin Kumar 26 September 2026, 1:12 PM IST
26 September 2026, 1:12 PM IST
Pawan Khera CEC gyanesh kumar safety resigning

SIR Controversy: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है. पार्टी लगातार ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है. शुक्रवार को कांग्रेस ने देशभर में प्रदर्शन किया. इस दौरान कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प और पुलिस कार्रवाई की खबरें सामने आईं. इसी कड़ी में दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया. वहीं, शनिवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ SIT जांच की मांग वाली याचिका के मुद्दे पर निशाना साधा. उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए दावा किया कि अब चुनाव आयोग के भीतर से भी लगातार आवाजें उठ रही हैं.

खुद से इस्तीफा दे देना चाहिए

पवन खेड़ा ने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि अब उन्हें खुद इस्तीफा दे देना चाहिए. उनकी सुरक्षा, उनके हित और उनके भविष्य की सुरक्षा इसी में है. साथ ही जब मैं सुरक्षा शब्द का इस्तेमाल करता हूं तो इसका मतलब है कि उनके भविष्य की सुरक्षा से है और अगर वह सरकारी गवाह बन जाते हैं तो वह सुरक्षित रहेंगे. वहीं, स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) विवाद के बीच CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली सुप्रीम कोर्ट की याचिका पर प्रतिक्रिया देते हुए खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा उनके अपने हित में होगा. यह याचिका ECI में कथित तौर पर एकतरफा फैसला लेने को लेकर दायर की गई थी, जिसमें फॉर्म 6 में बदलाव ECINet के माध्यम से मतदाता सूची डेटा का केंद्रीकरण और ऐसे कदम शामिल हैं जिनके कारण पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए.

इन लोगों का नाम भी शामिल किया गया

इसके अलावा याचिका में वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग, DG-IT सीमा खन्ना और अन्य अधिकारियों का भी नाम है, जिन पर आधिकारिक कर्तव्यों के उल्लंघन का आरोप लगा है. याचिकाकर्ता ने 23 सितंबर को प्रकाशित ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट का हवाला दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नवंबर 2025 और अगस्त 2026 के बीच मतदाता सूची और डेटाबेस एक्सेस से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित असहमति और आपत्तियां दर्ज कराई थी.

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साथ ही याचिका में ये भी आरोप लगाया है कि ECINet पोर्टल पर फॉर्म 6 में बदलाव करके पहली बार वोट देने वालों के लिए पिछले SIR का विवरण देना अनिवार्य कर दिया गया था और दावा किया गया था कि यह कदम ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960’ में औपचारिक संशोधन के बिना उठाया गया था. इसमें वोटर लिस्ट प्रणालियों तक विकेंद्रीकृत पहुंच को बहाल करने और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच या SIT जांच की मांग की गई.

कांग्रेस के आरोपों पर BJP का पलटवार

वहीं, राम कदम ने शनिवार को चुनाव आयोग की आलोचना करने पर विपक्ष पर पलटवार किया. कदम ने कहा कि चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों के पीछे तथ्य और सबूत होने चाहिए. समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में उन्होंने कहा कि बिना सबूत के चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना वोटरों के अधिकारों और जनादेश का अपमान करने जैसा है. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष भविष्य में होने वाली चुनावी हार का बहाना बनाने के लिए अभी से जमीन तैयार कर रहा है. कदम ने कहा कि अगर बिना सबूत के चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर हमला किया जाता है, तो यह करोड़ों वोटरों की समझदारी, अधिकारों और जनादेश पर हमला है. अगर विपक्ष को कोई समस्या है या उनके पास कोई तथ्य या सबूत हैं, तो उन्हें वे सामने रखने चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि राजनीतिक दलों को आरोप लगाने का अधिकार है, लेकिन उन्हें सबूतों के साथ अपनी बात साबित करनी चाहिए.

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