Home Top News पूरी कमाई आपकी और टैक्स जीरो! जानें भारत में 10 टैक्स-फ्री इनकम सोर्स, देखें लिस्ट

पूरी कमाई आपकी और टैक्स जीरो! जानें भारत में 10 टैक्स-फ्री इनकम सोर्स, देखें लिस्ट

by Neha Singh 16 June 2026, 7:23 PM IST
16 June 2026, 7:23 PM IST
Tax Free Income Sources

Tax Free Income Sources: भारतीय टैक्स व्यवस्था में आमतौर पर इनकम बढ़ने के साथ आपका टैक्स भी बढ़ता है. हालांकि कुछ ऐसे भी प्रावधान हैं, जिसमें आपको अपनी कमाई पर एक भी रुपए टैक्स नहीं देना पड़ता. लोग आम तौर पर यह मानते हैं कि सभी तरह की इनकम पर टैक्स देना होता है, लेकिन इनकम टैक्स कानूनों में कुछ खास इनकम सोर्स बताए गए हैं, जो या तो पूरी तरह से टैक्स-फ्री हैं या कुछ शर्तों के तहत टैक्स से छूट देते हैं. सही जानकारी और समझ के साथ इन ऑप्शन्स का फायदा उठाकर, आप अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा बचा सकते हैं.

भारत में टैक्स-फ्री आय के कई सोर्स हैं, जैसे खेती से होने वाली आय और कुछ सरकारी योजनाओं पर मिलने वाला ब्याज से लेकर उपहार, विरासत में मिली संपत्ति और खास निवेशों पर मिलने वाला रिटर्न, जो या तो टैक्स-फ्री हैं या इन्हें छूट मिलती है. हालांकि, इनका फायदा उठाने के लिए नियमों और शर्तों को समझना बहुत जरूरी है. अगर आप अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग को बेहतर बनाना चाहते हैं और यह जानना चाहते हैं कि इनकम के कौन से सोर्स कानूनी रूप से टैक्स-फ्री हैं, तो यह खबर आपके काम आएगी. यहां जानें भारत में आय के ऐसे 10 टैक्स-फ्री सोर्स, जिसमें आपको अपनी कमाई पर टैक्स देने की चिंता करने की जरूरत नहीं होगी.

खेती की इनकम है टैक्स-फ्री

भारतीय इनकम टैक्स कानून के मुताबिक, भारत में खेती पर होने वाली कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगता है. इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 10 (1) के तहत देश में कृषि से होने वाली पूरी तरह से टैक्स फ्री होती है, फिर चाहे आपकी इनकम कितनी भी ज्यादा क्यों न हो. फसल, अनाज, फलों, सब्जियों और फूलों की खेती से होने वाली कमाई टैक्स फ्री है. इसके अलावा अगर आप अपनी जमीन को खेती के लिए किराए पर देते हैं, तो उससे मिलने वाले पैसे पर भी कोई टैक्स नहीं लगता है. इसके अलावा अगर आप नर्सरी चलाते हैं, तो पौधों को उगाने और बेचने पर आपको टैक्स नहीं देना होगा.

ध्यान रहे कि अगर आपकी खेती की जमीन शहरी सीमा के अंदर आती है और आप उसे बेचते हैं, तो उस पर लॉन्ग टर्म या शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगेगा. इसके अलावा, अगर आपकी जमीन भारत से बाहर है, तो उससे होने वाली कमाई पर भी आपको टैक्स देना होगा. इसके साथ ही पशुपालन जैसे दूध बेचना, गाय-भैंस को पालना, पोल्ट्री फॉर्म और मछली पालन से होने वाली कमाई पर भी टैक्स लगता है.

दोस्तों या रिश्तेदारों से मिले तोहफे

अगर आप गाड़ी या घर खरीदते हैं, तो उस पर आपको टैक्स देना पड़ता है, लेकिन अगर यही चीजें आपको किसी रिश्तेदार से तोहफे में मिलती हैं, तो उस पर कोई टैक्स नहीं लगता. भारत में इनकम टैक्स एक्ट की धारा 56(2) के तहत रिश्तेदारों से मिले तोहफे पूरी तरह टैक्स-फ्री होते हैं. जबकि दोस्तों से मिले तोहफों पर 50,000 की लिमिट के बाद टैक्स लगता है.

परिभाषा के हिसाब से, रिश्तेदारों में मिलने वाले तोहफों में नकद, चेक, सोना या प्रॉपर्टी पर कोई टैक्स नहीं लगता है. इसकी कोई लिमिट भी नहीं होती है. कानूनी रूप से आपकी पत्नी या पति, आपके सगे भाई या बहन, जीवनसाथी के भाई या बहन, आपके माता-पिता के भाई बहन , आपके जीवनसाथी के माता-पिता ही आपके रिश्तेदार माने जाते हैं. यानी आप अपने इन रिश्तेदारों से कितना भी महंगा गिफ्ट ले सकते हैं. इस बात का ध्यान रखें कि रिश्तेदारों या माता-पिता से मिले तोहफे टैक्स फ्री हैं, लेकिन आप उनसे 2 लाख से ज्यादा कैश नहीं ले सकते, यह प्रतिबंधित है.

दोस्तों से मिले गिफ्ट्स पर सीमा होती है. अगर आपके सभी दोस्तों से मिले सालाना तोहफों की कीमत 50 हजार या उससे कम है, तो उस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. लेकिन अगर तोहफों की कीमत 50 हजार रुपए से एक रुपए भी ज्यादा होती है, तो उस पूरे मूल्य पर इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा. बता दें, शादी पर दोस्तों से मिले गिफ्ट्स भी टैक्स फ्री होते हैं, फिर चाहे वो कितने भी महंगे हो.

स्कॉलरशिप भी है टैक्स फ्री

भारत में पढ़ाई के लिए मिलने वाली स्कॉलरशिप पर कोई टैक्स नहीं लगता. इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(16) के तहत, शिक्षा के लिए मिलने वाली किसी भी स्कॉलरशिप पर कोई टैक्स नहीं देना होता है. चाहे स्कॉलरशिप भारत सरकार, राज्य सरकार, यूनिवर्सिटी, विदेशी संस्था या प्राइवेट ट्रस्ट/कंपनी (CSR के तहत) से मिली हो, यह पूरी तरह टैक्स-फ्री है. भारत में पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप के अलावा, विदेश में हायर एजुकेशन के लिए फेलोशिप या स्कॉलरशिप भी टैक्स-फ्री होती है. स्कॉलरशिप पर कोई लिमिट नहीं होती है, बशर्ते वह पढ़ाई के खर्चों को पूरा करने के लिए मिली हो.

ग्रेच्यूटी

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(10) के तहत रिटायरमेंट, इस्तीफे या मृत्यु के बाद सरकारी कर्मचारियों को मिली ग्रेच्यूटी पर कोई टैक्स नहीं लगता है. इसके लिए कोई लिमिट नहीं है. वहीं, प्राइवेट जॉब करने वाले कर्मचारियों के लिए 20 लाख रुपए तक की ग्रेच्यूटी पर टैक्स छूट मिलती है. इससे ज्यादा ग्रेच्यूटी होने पर इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार आपको टैक्स देना होगा.

बता दें, ग्रेच्यूटी कर्मचारी को रिटायरमेंट या इस्तीफा देने पर कंपनी की तरफ से मिलती है. ग्रेच्यूटी राशि लंबे समय तक सेवा देने और वफादार रहने के लिए कंपनी की तरफ से दिया जाने वाला वित्तीय इनाम होता है. इसके लिए कर्मचारी का कंपनी में 5 साल तक लगातार काम करना अनिवार्य है.

लीव इनकैशमेंट भी है टैक्स फ्री

ग्रेच्यूटी के अलावा कर्मचारी को रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने के समय मिलने वाले लीव इनकैशमेंट भी मिलता है, जिसपर टैक्स में छूट मिलती है. लीव इनकैशमेंट का मतलब होता है, कर्मचारी को अपनी बची हुई छुट्टियों के बदले कंपनी से कैश मिलता है. जब कर्मचारी कंपनी छोड़ता है, तो उसे उसकी बची हुई छुट्टियों के पैसे मिल जाते हैं. कुछ कंपनियां यह भी ऑप्शन देती हैं कि कर्मचारी हर साल बची हुई छुट्टियां सरेंडर करके पैसे ले सकते हैं.

केंद्र सरकार या राज्य सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाले लीव इनकैशमेंट पर पूरी तरह टैक्स छूट मिलती है. इस पर कोई टैक्स नहीं लगता. वहीं, प्राइवेट कंपनी के कर्मचारियों के लिए 25 लाख रुपए तक का लीव इनकैशमेंट टैक्स-फ्री होता है, इससे ज्यादा होने पर टैक्स लगेगा. प्राइवेट कर्मचारी अगर नौकरी करते हुए बीचे में ही छुट्टियां सरेंडर करके पैसा लेते हैं, तो उस पर टैक्स लगता है.

पार्टनरशिप फर्म से होने वाले प्रॉफिट पर जीरो टैक्स

पार्टनरशिप फर्म या एलएलपी के पार्टनर्स को होने वाले फायदा पूरी तरह टैक्स फ्री है, चाहे उन्हें कितना भी फायदा हो. पार्टनरशिप फर्म या एलएलपी को कानूनी तौर पर एक अलग कर इकाई माना जाता है. इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(2ए) के तहत भागीदारों को दिए गए इस प्रॉफिट पर फिर से टैक्स नहीं लगता है. इसका कारण यह है कि फर्म पहले से ही अपने कुल शुद्ध प्रॉफिट पर 30% की फ्लैट दर से सरकार को टैक्स का भुगतान करती है. फर्म के प्रॉफिट पर पहले ही कर लगाया जा चुका है, इसलिए जब पार्टनर्स के बीच प्रॉफिट शेयरिंग की जाती है, तो उस पर दोबारा टैक्स नहीं लगता. ध्यान रहे कि फर्म चलाने के लिए पार्टनर्स को मिलने वाली सैलरी पर पूरी तरह से इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगाया जाता है.

इन योजनाओं से मिलने वाले ब्याज पर नहीं लगता टैक्स

कुछ सरकारी योजनाओं द्वारा मिलने वाले ब्याज भी टैक्स फ्री होता है, हालांकि इनके साथ कुछ शर्तें भी जुड़ी हैं.

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF): इस स्कीम पर मिलने वाला सालाना ब्याज इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 10(11) के तहत पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है.

सुकन्या समृद्धि योजना (SSY): बेटियों के लिए इस स्कीम पर मिलने वाला ब्याज सेक्शन 10(11A) के तहत 100% टैक्स-फ्री होता है.

पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट: इस सिंपल सेविंग्स अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज धारा10(15)(i) के तहत पूरी तरह टैक्स-फ्री है, लेकिन इसमें एक इंडिविजुअल अकाउंट के लिए ₹3,500 सालाना तक और जॉइंट अकाउंट के लिए ₹7,000 सालाना तक की लिमिट है. इससे ज्यादा होने पर एक्सट्रा ब्याज पर स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा.

PF निकालने पर भी नहीं लगेगा टैक्स

प्रोविडेंट फंड निकालने पर आपको टैक्स नहीं देना होगा, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आप लागातार पांच साल नौकरी पूरी करने के बाद ही पीएफ निकालें. अगर प्राइवेट नौकरी वाले 5 साल की लगातार सर्विस के बाद अपना PF फंड निकालते हैं, तो पूरी रकम 100% टैक्स-फ्री होती है. लेकिन अगर वे 5 साल की सर्विस पूरी करने से पहले अपना PF फंड निकालते हैं, तो TDS और टैक्स स्लैब दोनों नियम लागू होते हैं. 50,000 की रकम पर कोई टीडीएस नहीं काटा जाता, लेकिन आईटीआर भरते समय उसपर आपको टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा. वहीं 50,000 रुपए से ज्यादा निकालने पर 10 प्रतिशत का टीडीएस काटा जाता है.

सरकारी कर्मचारियों के लिए ऐसी कोई पांच साल की लिमिट नहीं है. वे अपनी सर्विस के दौरान GPF से कोई भी एडवांस या नॉन-रिफंडेबल फंड निकाल सकते हैं, उस पर कोई टैक्स या टीडीएस नहीं लगता है.

लाइफ इंश्योरेंस मैच्योरिटी से मिलने वाली रकम

लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम भी टैक्स-फ्री होती है. इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(10D) के तहत उस पर कोई टैक्स नहीं लगता. हालांकि अगर आपका सालाना प्रीमियम सरकार द्वारा तय की गई सीमा से ज्यादा है तो आपको चुकाना होगा.

हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (HUF) से मिली रकम

हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (HUF) के सदस्य के तौर पर किसी व्यक्ति को मिली रकम पर टैक्स नहीं लगता है. कानून की नजर में HUF को एक अलग व्यक्ति माना जाता है, जिसका अपना PAN कार्ड और बैंक अकाउंट होता है. इस हिसाब से पूरे पारिवारिक बिजनेस का जो भी टोटल प्रॉफिट होगा, उस पर टैक्स लगेगा. इसके बाद जब यह प्रॉफिट सभी सदस्यों को मिलेगा तो उस पर दोबारा टैक्स कोई नहीं देना पड़ता है. HUF का मतलब है कि परिवार का अपना एक बिजनेस या प्रॉपर्टी है, जिससे पूरे परिवार की कमाई होती है.

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