Home Latest News & Updates ‘भीड़ थी, फिर भी घटना संभव है…’ नाबालिग से यौन शोषण के दोषी को 20 साल की सजा, पालघर कोर्ट की टिप्पणी

‘भीड़ थी, फिर भी घटना संभव है…’ नाबालिग से यौन शोषण के दोषी को 20 साल की सजा, पालघर कोर्ट की टिप्पणी

by Sachin Kumar 24 September 2026, 2:18 PM IST
24 September 2026, 2:18 PM IST
Palghar Man 20-year sexually assaulting minor boy

Palghar News: पालघर में नाबालिग लड़की के यौन शोषण के मामले में अदालत ने आरोपी के खिलाफ कठोर फैसला सुनाते हुए उसे 20 साल की कैद की सजा सुनाई है. अदालत ने बचाव पक्ष के उस दावे को खारिज कर दिया कि भीड़भाड़ वाले इलाके में ऐसी घटना होना मुश्किल है. कोर्ट ने कहा कि आसपास मौजूद लोगों की बेरुखी पीड़िता के बयान को गलत साबित नहीं कर सकती. अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और पीड़िता के बयान को ध्यान में रखते हुए आरोपी को दोषी ठहराया और 20 साल की सजा सुनाई.

छोटे कबूतरों को दिखाने के बहाने ले गया

स्पेशल जज एएच काशीकर ने 41 साल के आरोपी मधु धर्म को IPC और POCSO के प्रावधानों के तहत दोषी पाया है. अभियोजन पक्ष के अनुसार, 12 दिसंबर 2020 को पीड़िता (14 साल) अपने घर के पास कबूतरों को दाना खिला रही थी. तभी उसका पड़ोसी नाबालिग को छोटे कबूतर दिखाने के बहाने अपनी छत पर ले गया. इसके बाद आरोपी ने लड़की का मुंह बंद कर दिया और उसे कमरे में खींचकर ले गया. इसके बाद लड़की के हाथ बांध दिए और उसका यौन शोषण किया. फिर आरोपी घटना वहां से भाग गया. आरोपी की धमकियों और पैसे के लालच के बावजूद पीड़िता ने अपनी मौसी के बारे में घटना के बारे में बताया, जिसके बाद उसी दिन FIR दर्ज की गई.

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आरोपी और पीड़ित दोनों थे छत पर

अदालत ने बचाव पक्ष की इस अपील को सिरे से खारिज कर दिया कि घनी आबादी वाले इलाके में ऐसी घटना नहीं हो सकती है. अदालत का स्पष्ट कहना था कि आज कल ऐसी घटना आसपास के लोगों की बेरुखी की वजह से आम है. साथ ही इस अपील से पीड़िता के बयान की विश्वसनीयता कम नहीं हो जाएगी. कोर्ट ने कहा कि सबूतों से साबित होता है कि पीड़ित और आरोपी दोनों छत पर साथ थे, जिससे आरोपी का दावा खुद-ब-खुद गलत साबित हो जाता है. आरोपी के वीर्य के दाग पीड़िता के कपड़ों पर मिले, जिसे कोर्ट ने हमले का पक्का सबूत माना. साथ ही नाबिलग की सहमति भी कानूनी रूप से कोई मायने नहीं रखती है.

देरी से केस कमजोर नहीं हो जाता

इसके अलावा कोर्ट ने माना कि छोटी-मोटी देरी से केस कमजोर नहीं हो जाता है. कई बार पीड़ित के भरोसेमंद बयान की पुष्टि हालात और फोरेंसिक सबूतों से पूरी तरह होती है. जज ने यह भी कहा कि परिवारों के बीच पहले से चल रहा झगड़ा या दुश्मनी भी अपराध करने की वजह से हो सकती है, न कि सिर्फ किसी को झूठा फंसाने की कोशिश.

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