Home Latest News & Updates पैर दबाने में देरी की तो पत्नी को आग लगाकर मार डाला, कोर्ट ने जल्लाद पति को दी उम्रकैद की सजा

पैर दबाने में देरी की तो पत्नी को आग लगाकर मार डाला, कोर्ट ने जल्लाद पति को दी उम्रकैद की सजा

by Neha Singh 18 August 2026, 12:31 PM IST
18 August 2026, 12:31 PM IST
Man Killed Wife

Man Killed Wife: ठाणे सेशंस कोर्ट ने सोमवार को एक 38 साल के आदमी को दोषी ठहराया. उसने मई 2015 में पैर दबाने में देरी को लेकर हुई मामूली कहासुनी के बाद अपनी पत्नी को आग लगाकर मार डाला था. कोर्ट ने मौत से पहले पत्नी के दूसरे बयान को सही ठहराते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई. सेशंस कोर्ट के जज आर. डी. सावंत ने सुभाष वाघमारे को इंडियन पीनल कोड के सेक्शन 302 (हत्या की सजा) के तहत दोषी ठहराते हुए उस पर 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया. अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए दस गवाह पेश किए.

पैर दबाने में हुई देरी तो गुस्साया पति

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, यह घटना 9 मई, 2015 को ठाणे के पास घोड़बंदर गांव में कपल के किराए के घर पर हुई थी. जब वाघमारे ने अपनी पत्नी वैशाली से अपने पैरों दबाने के लिए कहा, तो उसने उससे कहा कि जब तक वह बर्तन साफ ​​न कर ले, तब तक इंतजार करे. उसके इस जवाब से गुस्सा होकर वाघमारे ने उसे कई थप्पड़ मारे. बाद में उस रात जब वह दर्द से कराह रही थी, तब वाघमारे ने उस पर केरोसिन डाला और उसे आग लगा दी. 13 मई, 2015 को डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर हॉस्पिटल में उसकी मौत हो गई.

पति के डर के कारण बोला झूठ

बचाव पक्ष ने दलील दी कि वैशाली ने कान और पेट में असहनीय दर्द के कारण आत्महत्या की थी और 10 मई को रिकॉर्ड किए गए उसके शुरुआती मरने से पहले के बयान की ओर इशारा किया. हालांकि, 11 मई को स्पेशल एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और पुलिस द्वारा रिकॉर्ड किए गए दूसरे मरने से पहले के बयान में पीड़िता ने साफ किया कि उसने शुरू में डर के कारण झूठ बोला था, क्योंकि उसका पति हॉस्पिटल में मौजूद था. दो अलग-अलग बयानों की जांच करते हुए, जज आर. डी. सावंत ने बचाव पक्ष की थ्योरी को खारिज कर दिया और दूसरे बयान की विश्वसनीयता को बरकरार रखा.

कोर्ट का आदेश

जज ने कहा वैशाली ने अपने दूसरे डाइंग डिक्लेरेशन में जो सफाई दी है, वह सच्ची और भरोसेमंद लगती है. 10.05.2015 को, मृतक को डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. आरोपी हॉस्पिटल में मौजूद था और उसने दूसरे डाइंग डिक्लेरेशन में इसका कारण बताया है. इस तरह पहले डाइंग डिक्लेरेशन की भी सफाई मिल जाती है. जज ने कहा “मुझे 10.05.2015 का पहला डाइंग डिक्लेरेशन सच्चा और भरोसेमंद नहीं लगता. इसलिए बचाव पक्ष की यह थ्योरी भी खारिज हो जाती है कि वैशाली की मौत आत्महत्या थी.” कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ आरोपों को बिना किसी शक के साबित कर दिया है.”

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News Source: PTI

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