Chand Mera Dil Review: करण जौहर के प्रोडक्शन में बनी और विवेक सोनी के डायरेक्शन में बनी फिल्म चांद मेरा दिल रिलीज हो चुकी है. ये सिर्फ एक लव स्टोरी नहीं है, बल्कि उन इमोशन्स की कहानी है जिन्हें शब्दों में समझाना आसान नहीं होता. अनन्या पांडे और लक्ष्य स्टारर यह फिल्म प्यार, करियर, गलत फैसलों और टूटते रिश्तों के बीच झूलते इमोशन्स को बहुत सिंपल तरीके से दिखाती है. फिल्म देखने के बाद शायद आपको अपने पुराने रिश्ते, अधूरी बातें और कुछ दर्दनाक यादें फिर से याद आ जाएं.
कहानी
इस फिल्म की कहानी है दो यंग इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स आरव और चांदनी की. उनकी मुलाकात हैदराबाद के एक कॉलेज में होती है. पहली मुलाकात में ही दोनों के बीच एक खास कनेक्शन बन जाता है. धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदलती है और सबकुछ किसी खूबसूरत रोमांटिक फिल्म जैसा लगने लगता है. लेकिन जिंदगी इतनी आसान नहीं होती. करियर, खुद को समझने की कोशिश और एक ऐसी गलती, जो उनकी पूरी लव स्टोरी बदल देती है, कहानी को इमोशनल एंगल दे देती है.

ओवरड्रामेटिक से दूर
फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा इसकी सिंपलिसिटी ही है. यहां ओवरड्रामेटिक डायलॉग्स या जरूरत से ज्यादा इमोशनल सीन नहीं हैं. हर सीन बहुत नेचुरल लगता है. डायरेक्टर विवेक सोनी ने छोटे-छोटे पलों को इतनी खूबसूरती से फिल्माया है कि कई बार बिना डायलॉग के भी कैरेक्टर्स के इमोशन समझ आते हैं. स्क्रीन पर इस्तेमाल किए गए कलर्स, लोकेशन्स और कैमरा वर्क फिल्म को विजुअली बहुत खूबसूरत बनाते हैं. इसके अलावा म्यूजिक की बात करें तो करण जौहर की फिल्मों की तरह यहां भी गाने दिल जीत लेते हैं. फिल्म के लगभग हर गाने में ऐसी फीलिंग है जो लंबे टाइम तक याद रहती है. कुछ गाने रोमांटिक हैं तो कुछ सीधे दिल को छू जाते हैं. यही वजह है कि फिल्म खत्म होने के बाद भी इसका म्यूजिक आपके साथ बना रहता है.
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परफॉर्मेंस की बात
परफॉर्मेंस की बात करें तो अनन्या पांडे ने इस फिल्म में खुद को काफी बेहतर साबित किया है. उनके कैरेक्टर चांदनी में कॉन्फिडेंस भी है और इमोशनली वीक भी. अनन्या ने दोनों पहलुओं को काफी ईमानदारी से निभाया है. हालांकि, कुछ जगहों पर उनके किरदार के फैसले थोड़े जल्दबाजी वाले लगते हैं, लेकिन फिर भी वो दर्शकों को अपने साथ जोड़े रखने में कामयाब लगती हैं.

असली सरप्राइज
हालांकि, इस फिल्म का असली सरप्राइज हैं लक्ष्य. उन्होंने आरव के रोल में इतना बेहतरीन काम किया कि कई सीन दिल को हैवी कर देते हैं. खासकर उनका पैनिक अटैक वाल सीन काफी असरदार हैं. लक्ष्य ने हर इमोशन को बहुत बैलेंस तरीके से निभाया है. उनके चेहरे के एक्सप्रेशन, बॉडी लैंग्वेज और आंखों में दिखता दर्द किरदार को पूरी तरह जिंदा बना देता है. वहीं, फिल्म की एक छोटी कमजोरी इसका पहला हाफ है, जो थोड़ा लंबा लगता है. कुछ सीन को छोटा किया जा सकता था. साथ ही चांदनी के कैरेक्टर को और स्ट्रॉन्ग बनाया जा सकता था. लेकिन इसके बावजूद फिल्म अपनी इमोशनल पकड़ बनाए रखती है.
टूटे दिलों के लिए परफेक्ट
चांद मेरा दिल उन लोगों के लिए बड़ी खास फिल्म है जिन्होंने कभी किसी से सच्चा प्यार किया हो. किसी रिश्ते को टूटते देखा हो या फिर जिंदगी में इमोशनल उलझनों का सामना किया हो. वैसे, ऐसा शायद ही कोई होगा, जिसने अपनी लाइफ कभी ना कभी ये एक्सपीरियंस ना किया हो. ये फिल्म आपको सिर्फ कहानी नहीं दिखाती, बल्कि कई जगह खुद से जोड़ देती है. यानी अगर आपको स्लो, इमोशनल और दिल को छू लेने वाली लव स्टोरीज़ पसंद हैं, तो अनन्या पांडे और लक्ष्य की ये फिल्म आपका वीकेंड खास बना सकती है.
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