Home Top News बाजार से गायब होंगी घटिया और नकली दवाएं, अब 1 जुलाई से कैंसर की दवाओं पर QR कोड अनिवार्य

बाजार से गायब होंगी घटिया और नकली दवाएं, अब 1 जुलाई से कैंसर की दवाओं पर QR कोड अनिवार्य

by Sanjay Kumar Srivastava 25 June 2026, 4:14 PM IST (Updated 26 June 2026, 10:29 AM IST)
25 June 2026, 4:14 PM IST (Updated 26 June 2026, 10:29 AM IST)
बाजार से गायब होंगी घटिया और नकली दवाएंः अब 1 जुलाई से कैंसर की दवाओं पर QR कोड अनिवार्य

QR Code on Cancer Drugs: सरकार नकली दवाओं पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाने जा रही है. बाजार में नकली व घटिया दवाओं की बिक्री पर रोकथाम के लिए सरकार ने कैंसर की दवाओं पर QR कोड लगाना अनिवार्य कर दिया है. सरकार का मानना है कि नकली दवाओं के सेवन से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ने के साथ-साथ जान भी चली जाती है. सरकार ने नकली और घटिया दवाओं से सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए QR कोड-आधारित ट्रैक-एंड-ट्रेस सिस्टम का दायरा बढ़ा दिया है. इसमें सभी एंटीमाइक्रोबियल, वैक्सीन, कैंसररोधी दवाएं और नशीली व साइकोट्रोपिक दवाएं शामिल हैं.

ड्रग्स रूल्स, 1945 में हुआ बदलाव

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में बदलाव की सूचना जारी की है. इसके तहत इन दवाओं को ‘शेड्यूल H2’ में शामिल किया गया है, जिसके लिए प्रोडक्ट की पहचान और वेरिफिकेशन के लिए बारकोड या क्विक रिस्पॉन्स (QR) कोड का इस्तेमाल ज़रूरी है. मंत्रालय ने कहा कि बदले हुए नियमों के तहत मैन्युफैक्चरर्स को दवा के प्राइमरी पैकेजिंग लेबल पर या जगह की कमी होने पर सेकेंडरी पैकेजिंग पर बारकोड या QR कोड प्रिंट करना या लगाना होगा. यह कोड पूरी सप्लाई चेन में सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन के ज़रिए दवाओं की प्रमाणिकता और वेरिफिकेशन में मदद करेगा.

कोड से मिलेगी सारी जानकारी

मंत्रालय के अनुसार, QR कोड में प्रोडक्ट से जुड़ी ज़रूरी जानकारी होगी, जैसे कि यूनिक प्रोडक्ट आइडेंटिफिकेशन कोड, जेनेरिक और ब्रांड नाम, मैन्युफैक्चरर का नाम और पता, बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी की तारीखें, मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस नंबर और जहां लागू हो, वहां एक्सीपिएंट्स (सहायक पदार्थों) की जानकारी. मंत्रालय ने कहा कि यह नियम पहले देश के सिर्फ़ टॉप 300 फ़ार्मास्युटिकल ब्रांड्स पर लागू होता था. हालिया बदलाव के साथ इसके दायरे को काफ़ी बढ़ा दिया गया है. अब इसमें सभी वैक्सीन, एंटीमाइक्रोबियल, कैंसर-रोधी दवाएं और नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985 के तहत आने वाली नशीली और साइकोट्रोपिक दवाएं भी शामिल हैं.

उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई

मंत्रालय का कहना है कि बेहतर ट्रेसेबिलिटी फ़्रेमवर्क से सप्लाई चेन के अलग-अलग चरणों में उत्पादों की प्रमाणिकता और सत्यापन संभव होगा, जिससे नकली और घटिया दवाओं के ख़िलाफ़ सुरक्षा मज़बूत होने की उम्मीद है. मंत्रालय ने कहा कि यह कदम नकली दवाओं के वितरण को रोकने के प्रयासों में भी मदद करेगा. साथ ही, नकली और घटिया एंटीमाइक्रोबियल उत्पादों की बेहतर पहचान और निगरानी को आसान बनाकर एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के ख़िलाफ़ भारत की लड़ाई में भी योगदान देगा.

इसे लागू करने के लिए पर्याप्त समय देने के मकसद से सरकार ने नियमों का पालन करने के लिए अलग-अलग चरणों में समय-सीमा तय की है. नोटिफिकेशन के मुताबिक, वैक्सीन, कैंसर-रोधी दवाओं और नशीली व साइकोट्रोपिक दवाओं से जुड़े नियम इस साल 1 जुलाई से लागू होंगे, जबकि एंटीमाइक्रोबियल दवाओं से जुड़े नियम 1 जुलाई, 2028 से प्रभावी होंगे. सरकार ने कहा कि नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

बच्चों में बढ़ रहा डायबिटीज का खतरा, स्वास्थ्य मंत्रालय ने पहली बार जारी की गाइडलाइंस

News Source: PTI

You may also like

Live Times logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?