Congo Ebola: अफ्रीकी देश पूर्वी कांगो में तेजी से फैल रहे इबोला की चपेट में आने से 1,700 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. सरकार की ताज़ा जानकारी के अनुसार, मंगलवार तक 3,802 मामले दर्ज किए गए थे और 1,707 लोगों की मौत हुई थी. अफ्रीका CDC के डायरेक्टर जनरल डॉ. जीन कासेया ने मंगलवार को प्रभावित बुनिया शहर के अपने दूसरे दौरे के दौरान कहा कि यह साफ़ नहीं है कि प्रकोप कब अपने चरम पर पहुंचेगा. कासेया ने चेतावनी दी कि नए मामलों में से लगभग 80 प्रतिशत मामले कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग से नहीं बल्कि कम्युनिटी स्प्रेड (समुदाय में फैलने) से सामने आ रहे हैं. 15 मई को घोषित इस प्रकोप का संबंध बुंडीबुग्यो वायरस से है, जिसके लिए देश में कोई वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है.
किसंगानी सहित पांच अन्य प्रांतों में भी फैला
अफ्रीका CDC का कहना है कि कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में देरी, प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में मुश्किलें, समुदायों का अविश्वास और हथियारबंद समूहों व कुछ निवासियों द्वारा की गई हिंसा ने इस स्थिति से निपटने के प्रयासों में बाधा डाली है. यह प्रकोप मुख्य रूप से पूर्वी कांगो के दूर-दराज़ के इतुरी प्रांत में फैला हुआ है, जहां लगभग 90 प्रतिशत मामले सामने आए हैं. लेकिन देश के सबसे बड़े शहरों में से एक, किसंगानी सहित पांच अन्य प्रांतों में भी मामलों की पुष्टि हुई है. पड़ोसी देश युगांडा ने जून के मध्य में अपने आखिरी मरीज़ के ठीक होकर घर जाने के बाद खुद को इबोला मुक्त घोषित कर दिया था.
हड़ताल पर गए हेल्थकेयर वर्कर
सोमवार को बुरी तरह प्रभावित शहर मोंगबवालु में हेल्थकेयर वर्कर्स ने बकाया वेतन को लेकर अल्टीमेटम जारी करते हुए कहा कि अगर 24 घंटे के भीतर कुछ नहीं किया गया, तो हम अपना विरोध और तेज़ कर देंगे. एक बड़ी चुनौती यह है कि इस प्रकोप में ‘पेशेंट ज़ीरो’ (बीमारी फैलाने वाला पहला व्यक्ति) की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है. साथ ही, इलाके में चल रहे संघर्ष और गैर-कानूनी माइनिंग की वजह से लोगों के विस्थापन ने उन हज़ारों लोगों का पता लगाना मुश्किल बना दिया है जो संक्रमित लोगों के संपर्क में आए थे. इससे पहले बूनिया में हेल्थकेयर वर्कर वेतन न मिलने और काम की खतरनाक स्थितियों के कारण हड़ताल पर चले गए थे.
100 से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि प्रकोप की शुरुआत से अब तक 100 से ज़्यादा स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हो चुके हैं. ताज़ा मामले में पहले के किसी भी प्रकोप की तुलना में तेज़ी से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है. इसमें 2014-2016 का प्रकोप भी शामिल है, जब 28,000 मामले सामने आए थे और 11,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई थी. उस प्रकोप में 1,000 मौतें होने में लगभग आठ महीने लगे थे. फंडिंग की कमी, हेल्थ सेंटरों पर हमले, पूर्वी कांगो में चल रहे संघर्ष और स्थानीय समुदायों के बीच अविश्वास के कारण भी इस स्थिति से निपटने के प्रयासों में बाधा आ रही है. हाल ही में इतुरी में इबोला के दो संभावित इलाज के तरीकों पर एक बहु प्रतीक्षित स्टडी के लिए लोगों को शामिल करने का काम शुरू हुआ है.
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News Source: PTI
