Home Latest News & Updates कागजों पर 14 अगस्त, दिलों में 11 अगस्त: पाकिस्तान से 3 दिन पहले आजाद बलूचियों के संघर्ष की दास्तान

कागजों पर 14 अगस्त, दिलों में 11 अगस्त: पाकिस्तान से 3 दिन पहले आजाद बलूचियों के संघर्ष की दास्तान

by Sanjay Kumar Srivastava 13 August 2026, 2:37 PM IST (Updated 13 August 2026, 2:47 PM IST)
13 August 2026, 2:37 PM IST (Updated 13 August 2026, 2:47 PM IST)
कागजों पर 14 अगस्त, दिलों में 11 अगस्त: पाकिस्तान से 3 दिन पहले आजाद बलूच राष्ट्रवादियों के संघर्ष और आजादी की पूरी दास्तान

Balochistan Independence Day: बलूचिस्तान के लोगों ने 11 अगस्त को अपना आजादी का जश्न मनाया. बलूचिस्तान ने 11 अगस्त, 1947 को अंग्रेजों से अपनी आजादी की घोषणा की थी. 1947 में जब अंग्रेज़ भारत छोड़कर गए तो पाकिस्तान और बांग्लादेश अपने मौजूदा स्वरूप में नहीं थे, लेकिन बलूचिस्तान प्रांत का अस्तित्व था. इसके बाद बलूचिस्तान ने 11 अगस्त 1947 को अंग्रेज़ों से अपनी आज़ादी की घोषणा कर दी. तभी से बलूचिस्तान के लोग 11 अगस्त को अपनी आजादी और स्वतंत्रता का जश्न मनाते हैं. इतिहास के नज़रिए से 11 अगस्त का अपना महत्व है, भले ही पाकिस्तान में इसे आधिकारिक तौर पर मान्यता न मिली हो. इसी तारीख को भारत में रहने वाले बलूच मूल के लोगों ने बलूचिस्तान का आज़ादी का जश्न मनाया.

कलात के शासक को मिला धोखा

कोई भी सोच सकता है कि पाकिस्तान का एक प्रांत अपना आज़ादी का दिन क्यों मना रहा है, जबकि वहां दशकों से जबरदस्त सशस्त्र संघर्ष और शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन चल रहा है. और 11 अगस्त ही क्यों? क्या इस तारीख का पाकिस्तान के 14 अगस्त या भारत के 15 अगस्त से कोई संबंध है? असल में, 11 अगस्त को बलूच राष्ट्रवादी बलूचिस्तान का स्वतंत्रता दिवस मानते हैं. यह दिन उस घटना की याद दिलाता है जब 1947 में ब्रिटिश शासन खत्म होने पर ‘खानत-ए-कलात’ (मौजूदा बलूचिस्तान वाले इलाके में राज करने वाला एक राज्य) ने अपनी संप्रभुता का ऐलान किया था. कलात सात महीने से कुछ ज़्यादा समय तक पाकिस्तान से बाहर रहा. फिर, कलात के शासक मीर अहमद यार खान को मुहम्मद अली जिन्ना ने धोखा दिया और उन्हें 27 मार्च, 1948 को ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ एक्सेशन’ (विलय पत्र) पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया.

स्वतंत्र देश के तौर पर मिले मान्यता

इतिहास के नज़रिए से 11 अगस्त का अपना महत्व है, भले ही पाकिस्तान में इसे आधिकारिक तौर पर मान्यता न मिली हो. वहां 14 अगस्त को ही स्वतंत्रता दिवस माना जाता है (बलूचिस्तान प्रांत में भी). उदाहरण के लिए, बलूचिस्तान हाई कोर्ट के 2026 के सरकारी छुट्टियों के कैलेंडर में 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के तौर पर दिखाया गया है, न कि 11 अगस्त को. अलग देश की मांग करने वाले बलूच राष्ट्रवादियों और अलगाववादियों के लिए 11 अगस्त उस संप्रभुता का प्रतीक है जो उनके अनुसार 1948 में खो गई थी. मीर यार बलोच नाम के एक नेता ने दावा किया कि बलोचिस्तान पाकिस्तान का प्रांत नहीं है और मांग की कि दुनिया इसे एक आज़ाद देश के तौर पर मान्यता दे.

पाबंदियों के बावजूद मनाया जश्न

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित ‘रिपब्लिक ऑफ़ बलोचिस्तान’ जल्द ही पासपोर्ट, करेंसी और दूतावासों की औपचारिक शुरुआत करेगा. उन्होंने दावा किया कि बलोचिस्तान ने पांच लाख लोगों की सेना तैयार कर ली है और वहां पचास ट्रिलियन डॉलर मूल्य के रेयर अर्थ मिनरल्स और ऊर्जा संसाधन मौजूद हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने 11 अगस्त के जश्न को रोकने के लिए मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थीं, लेकिन दावा किया कि पाबंदियों के बावजूद लोगों ने जश्न मनाया.

बलूचिस्तान का निकलना पाकिस्तान के लिए होगा झटका

‘वर्ल्ड पीस यूनाइटेड’ के एंबेसडर डॉ. परविंदर सिंह कहते हैं कि बलूचिस्तान की जमीन खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों, जैसे सोना और कीमती पत्थरों से बहुत समृद्ध है. अगर बलूचिस्तान पाकिस्तान से अलग हो जाता है तो पाकिस्तान को अपने आर्थिक आधार का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा गंवाना पड़ सकता है, क्योंकि यह इलाका चीन और दूसरे देशों को खनिजों के निर्यात का मुख्य स्रोत है. बलूचिस्तान का हाथ से निकलना पाकिस्तान के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा, और यही वजह है कि पाकिस्तान उस पर से अपना नियंत्रण नहीं छोड़ना चाहता. आज 56 से ज़्यादा देश बलूचिस्तान की आज़ादी का समर्थन करते हैं.

बलोच राष्ट्रवादियों के लिए क्यों अहम है 11 अगस्त ?

यह कहानी उपमहाद्वीप में ब्रिटिश राज के आखिरी उथल-पुथल भरे दिनों की है. औपनिवेशिक शासन के दौरान कलात राज्य के अंग्रेजों के साथ एक खास संधि वाला रिश्ता था. 11 अगस्त 1947 को कलात और मुस्लिम लीग के बीच हुए एक समझौते में कलात को एक स्वतंत्र राज्य के तौर पर मान्यता दी गई. इसके बाद कलात ने अपनी आज़ादी का ऐलान किया, अपना पारंपरिक झंडा फहराया और नेता यानी खान के नाम पर खुतबा पढ़ा गया. बलूच नेशनल मूवमेंट (BNM) ने 11 अगस्त को बलूचिस्तान की संप्रभुता और ब्रिटिश शासन से आज़ादी का दिन बताया. यह भावना भारत में भी देखी जाती है. मुंबई के रहने वाले मुनाफ़ बलूच, जिनके पूर्वज बलूचिस्तान से थे, ने PTI को बताया कि मुंबई में लगभग 1500 बलूच लोग रहते हैं.

आजादी की बात से ही मिलती है खुशी

उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान की आज़ादी के बारे में सोचने से बहुत खुशी मिलती है क्योंकि अभी हमारे पास वीज़ा की उचित सुविधाएं नहीं हैं. हम भारत-पाकिस्तान संबंधों की वजह से भी सीमित हैं. 11 अगस्त को आजादी का जश्न मनाने का मतलब यह नहीं है कि बलूचिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त एक स्वतंत्र देश है, और न ही यह पूरे प्रांत के निर्विवाद इतिहास को दर्शाता है. लेकिन कलात द्वारा अपनी आज़ादी के थोड़े समय के दावे के 79 साल बाद भी यह तारीख बलूच राष्ट्रवादियों के लिए एक मज़बूत राजनीतिक प्रतीक है और पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस से ठीक तीन दिन पहले आने वाली 11 अगस्त की तारीख इस बात की याद दिलाती है कि बलूचिस्तान क्या था, क्या बन गया और बलूच राष्ट्रवादियों के अनुसार उसे क्या होना चाहिए.

न्यूजीलैंड में बड़ा सियासी उलटफेर: चुनाव से पहले PM लक्सन की कुर्सी बची, रक्षा मंत्री बर्खास्त

News Source: PTI

You may also like

Live Times logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?