Strait of Hormuz: अमेरिका और इजरायल ने बीते 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था और इसके साथ ही पश्चिम एशिया में युद्ध की शुरुआत हो गई थी. ईरान भी इसके जवाब में खाड़ी देश जैसे कतर, सऊदी अरब, बहरीन, यूएई आदि पर हमला करने लगा. ईरान ने इन देशों को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि यहां अमेरिकी सेना का बेस है. उसने अधिकतर हमले अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए. इसके साथ ही दोनों ओर से एक-दूसरे के खिलाफ संघर्ष और हमले शुरू हो गए.
बता दें कि अमेरिका व इजरायल के हमले के पीछे तेहरान की सरकार को गिराने और उसके परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने जैसे कई मकसद थे. लेकिन समय के साथ ये मकसद पूरे नहीं हो पाए और अब यह संघर्ष होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जे की लड़ाई में बदल गया है. जानकारी के अनुसार, ईरान के नियंत्रण के दावों और जहाजों पर हमलों के कारण यहां से होने वाला यातायात लगभग ठप हो गया है.
अब होर्मुज को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. जी हां, मिली जानकारी के अनुसार, पश्चिम एशिया में अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पहले की तरह खोलने की तैयारी अपने अंतिम चरण में है. इसको खोलने के लिए ईरान, अमेरिका और ओमान की बड़ी भूमिका बताई जा रही है. होर्मुज को जहाजों की आवाजाही के लिए पहले की तरह खोलने के लिए एक अहम डील की बात सामने आई है. बताया गया कि यह डील लगभग पूरी हो चुकी है. हालांकि, अभी भी कुछ बातें हैं, जहां मामला फंसा हुआ नजर आ रहा है, लेकिन इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज को खोलने के लिए समय सीमा भी बता दी है. आइए जानते हैं पूरी खबर, लेकिन शुरुआत होर्मुज से करेंगे कि आखिरकार यह क्या है और दुनिया पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कितना अहम?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की बात करें तो यह दुनिया का बहुत ही महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. यह जब से ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव में युद्ध का केंद्र बना है, तब से इसने दुनिया की अर्थव्यवस्था को काफी प्रभावित किया है. फारस और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग 33 किमी चौड़ा और करीब 167 किमी लंबा है.
विश्व की एनर्जी सप्लाई इस रास्ते पर बहुत ही अधिक निर्भर है. रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया का करीब 20 से 25 फीसदी तेल और गैस का व्यापार इसी समुद्री मार्ग से होता है. यह रास्ता एशियाई बाजारों तक करीब 80 फीसदी से अधिक तेल की सप्लाई का माध्यम है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से पूरी दुनिया तो प्रभावित हुई ही है और इससे सबसे अधिक एशियाई बाजार प्रभावित हुए हैं.
भारत के लिए भी यह रास्ता बहुत ही अहम है क्योंकि यहां से वह 30 से 50 फीसदी तक कच्चे तेल और गैस का आयात करता है. भारत इसी समुद्री मार्ग से ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात समेत अन्य देशों से तेल का आयात करता है. अब यह समुद्री मार्ग प्रभावित हो गया है तो भारत ने अपने खास मित्र रूस से कच्चे तेल की सप्लाई को और अधिक बढ़ा दी है. हालांकि, ईरान एक मित्र राष्ट्र के नाते भारतीय जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जाने देने की बात कहता रहा है.

होर्मुज बाधित होने से कितनी प्रभावित हुई दुनिया?
ईरान और अमेरिका युद्ध ने विश्व की अर्थव्यवस्था को काफी प्रभावित किया है. इसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की भूमिका कभी न भुलाये जाने वाली है. ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध की शुरुआत एक-दूसरे पर हमले से हुई थी, लेकिन बहुत जल्द ही इस युद्ध का अखाड़ा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बन गया. अमेरिका के द्वारा अपने पर तेज हमले को देखते हुए ईरान ने सबसे पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का फैसला किया था. अभी तक इस युद्ध में जो तनाव केवल ईरान और अमेरिका के बीच था, वह अब होर्मुज के बंद हो जाने से पूरी दुनिया और उसकी अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा.
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से दुनिया भर के प्रमुख देश, जो अर्थव्यवस्था की दृष्टि से काफी मायने रखते हैं, वे प्रभावित होने लगे. भारत समेत विश्व के कई देशों में तेल, गैस की परेशानी होने लगी. कई देशों में इमरजेंसी जैसे हालात हो गए थे, वहीं कई देशों में गैस समेत पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगीं. यह युद्ध और तनाव, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से दुनिया के कई देशों की आम जनता को महंगाई के रूप में परेशान करने लगा. लोग गैस, तेल के लिए लंबी-लंबी कतारें लगाने लगे. कई जगहों पर ब्लैक मार्केटिंग और जमाखोरी की शिकायतें भी आने लगीं. तेल और गैस जैसी महत्वपूर्ण चीजों के लिए सप्लाई चैन प्रभावित होने से दुनिया की अर्थव्यवस्था डगमगाने लगी.
कच्चे तेल के दाम बढ़ने से दुनिया के विभिन्न देशों में पेट्रोल, डीजल की कीमतों में भारी उछाल आया. गैस के दाम बढ़ गए. भारत की बात करें तो यहां कमर्शियल गैस के भाव प्रति सिलेंडर 900 से अधिक रुपये बढ़ गए थे. दुनिया में हवाई जहाज के ईंधन की कीमत भी महंगी हो गई थी. इतना ही नहीं, अमेरिका की स्पिरिट एयरलाइंस ने ईंधन के बढ़ते दाम का हवाला देते हुए अपने ऑपरेशन को बंद कर दिया था. उसने रातोंरात अपनी सभी फ्लाइटें कैंसिल कर दीं थी.
अमेरिका समेत कई देशों में महंगाई बढ़ गई. दुनिया में आर्थिक मंदी का खतरा मंडराने लगा, लेकिन अब होर्मुज पर बात बनती हुई दिख रही है. ताजा मामला यह है कि ईरान और अमेरिका ने एक-दूसरे पर हमले को रोक दिए हैं और वे होर्मुज को पहले की तरह खोलने के लिए समझौते के अंतिम चरण में हैं.

इस हफ्ते हो सकता है समझौते का ऐलान- ट्रंप
न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने बुधवार (5 अगस्त) को कहा कि वह ओमान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर एक समझौते का मसौदा तैयार करने के “आखिरी चरण” में है. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इस हफ्ते किसी समझौते की घोषणा हो सकती है. इससे यह अहम समुद्री रास्ता फिर से खुल सकता है, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव कम हो सकता है और युद्ध को खत्म करने में मदद मिल सकती है.
लेकिन, यह समझौता इस बात पर निर्भर कर सकता है कि अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाए. ट्रंप प्रशासन ने पहले ही किसी भी ऐसे समझौते को खारिज कर दिया है जिससे जलडमरूमध्य पर ईरान का कब्जा और मजबूत हो जाए, क्योंकि यह अमेरिका के लिए एक बड़ा नुकसान होगा और वैश्विक नियमों के खिलाफ होगा.
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ईरान ने जलडमरूमध्य पर कुछ हद तक नियंत्रण बनाए रखने पर जोर दिया है और कहा है कि वह इसे युद्ध से पहले की तरह एक खुला अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता नहीं बनने देगा. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ओमान के साथ समझौते का मसौदा तैयार करने का काम “आखिरी चरण” में है, और “अगर कुछ पक्ष इस प्रक्रिया में बाधा नहीं डालते हैं” तो एक संयुक्त बयान जारी किया जाएगा.

सर्विस फीस पर अमेरिका का कड़ा विरोध
मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार को दो क्षेत्रीय अधिकारियों ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि ईरान और ओमान के बातचीत करने वालों ने होर्मुज को फिर से खोलने के लिए समझौते का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है. वे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं. माना जाता है कि युद्ध की शुरुआती कार्रवाई में खामेनेई घायल हो गए थे और तब से उन्हें सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है.
बातचीत की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने इस संभावित समझौते को जलडमरूमध्य को लेकर चल रहे विवाद का एक अस्थायी समाधान बताया. उन्होंने कहा कि यह जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए उस समझौते से जुड़ा है, जिसका मकसद लड़ाई खत्म करना और जलमार्ग को फिर से खोलना था, लेकिन वह समझौता अंततः विफल हो गया था.
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निजी बातचीत के बारे में बताने के लिए नाम न बताने की शर्त पर बात करने वाले अधिकारियों ने कहा कि यह संभावित समझौता अमेरिका और ईरान के लिए तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत फिर से शुरू करने का रास्ता साफ करेगा.
इससे पहले, उन्होंने कहा था कि संभावित समझौते के तहत जहाज ईरान के नियंत्रण वाले रास्ते से फारस की खाड़ी में प्रवेश करेंगे और ओमान के नियंत्रण वाले रास्ते से बाहर निकलेंगे. अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा प्रदान करने और समुद्री पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए सर्विस फीस ली जाएगी. वहीं, अमेरिका ने कहा है कि वह किसी भी ऐसे समझौते का कड़ा विरोध करता है जिसके तहत ईरान शुल्क वसूलेगा.

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने क्या कहा?
अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि होर्मुज को फिर से खोलने का समझौता होने वाला है. मंगलवार (4 अगस्त) शाम पत्रकारों ने ट्रंप से एक न्यूज साइट की एक रिपोर्ट के बारे में पूछा, जिसमें कहा गया था कि जलडमरूमध्य के बारे में बुधवार को घोषणा की जा सकती है. ट्रंप ने कहा, “ऐसा हो सकता है. कल या परसों. काफी प्रगति हुई है.”
वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बुधवार को माना कि ऐसा लग सकता है कि अमेरिका ईरान के मामले में कोई प्रगति नहीं कर रहा है. उन्होंने युद्ध खत्म करने की कोशिशों को उलझा हुआ बताया और कहा कि इसमें कुछ समय लगेगा. वेंस ने एक अमेरिकी न्यूज चैनल पर शाम को प्रसारित एक इंटरव्यू में कहा कि ईरानी लोग बहुत मुश्किल स्वभाव के हैं और युद्ध को सुलझाने की कोशिशों में कभी-कभी आगे बढ़ने से पहले पीछे भी हटना पड़ता है. बता दें कि हाल के दिनों में, ट्रंप ने कभी बड़े हमले करने की धमकी दी है, तो कभी कूटनीतिक कोशिशों का समर्थन किया है.
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