Iran US Conflict Timeline: बीते 28 फरवरी से पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष अब समझौते के साथ खत्म हो रहा है. इस डील की जानकारी अमेरिका, ईरान के साथ इन दोनों देशों के बीच मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी दी है. आज 15 जून को अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी घोषणा करते हुए ट्रूथ सोशल पर कहा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो गया है. सभी को बधाई!” आने वाले शुक्रवार को दोनों देश स्विट्जरलैंड में व्यक्तिगत रूप से शांति समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे. इसके साथ ही इन दोनों के बीच युद्ध और संघर्ष आधिकारिक रूप से समाप्त हो जाएंगे.
वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा, “हमें अमेरिका और ईरान के बीच गहन चर्चा के बाद एक शांति समझौते पर पहुंचने की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है. दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान की तत्काल और स्थायी समाप्ति की घोषणा की है.”
समझौते पर भारत ने क्या कहा?
ईरान और अमेरिका के इस शांति समझौते का भारत ने भी स्वागत किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक पोस्ट करके कहा, “मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता हूं. इस संघर्ष के कारण दुनिया भर में गंभीर आर्थिक उथल-पुथल हुई है और कई देशों में जान-माल का नुकसान हुआ है.”
उन्होंने आगे कहा, “भारत को उम्मीद है कि इस सहमति को लागू करने से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी और आवाजाही व व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी. हम उम्मीद करते हैं कि बाकी मुद्दों पर बातचीत से एक टिकाऊ और अंतिम समझौता हो सकेगा.”

खत्म हुआ ईरान-अमेरिका युद्ध, 107 दिनों के संघर्ष के बाद शांति समझौता; इस दिन से खुलेगा होर्मुज
पश्चिम एशिया में युद्ध और संघर्ष की शुरुआत
बता दें कि बीते 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के द्वारा ईरान पर संयुक्त हमले के बाद पश्चिम एशिया में युद्ध और संघर्ष की शुरुआत हुई थी. यह तनाव करीब 107 दिनों तक चला और अब इसपर विराम लगने का ऐलान कर दिया गया है. इस संघर्ष ने भारत सहित दुनिया के तमाम देशों की अर्थव्यवस्था को काफी प्रभावित किया. इसकी वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित रहा और तेल, गैसों की आवाजाही होने में काफी दिक्कत हुई. इसके कारण भारत समेत दुनिया के कई देशों में तेल, गैस के दाम भी बढ़ाए गए. कारण यह भी था कि होर्मुज बाधित होने से कच्चे तेल के दाम 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गए थे. अब इनकी कीमतों में काफी गिरावट आई है. अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 83.88 डॉलर प्रति बैरल हो गई है. अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड की कीमत गिरकर 80.93 डॉलर प्रति बैरल हो गई है.
अब आइए ईरान और अमेरिका के बीच पिछले 107 दिनों से जारी रहे इस संघर्ष की टाइमलाइन को देखते हैं. हम इसमें जानेंगे कि 28 फरवरी से लेकर अभी तक यानी कि 15 जून तक कब-कब क्या हुआ. इसकी हम A TO Z कहानी को आसान भाषा में बिंदुवार तरीके से भी जानेंगे. शुरुआत हम ट्रंप के ऐलान और समझौते की शर्तों व बातों से करेंगे.

ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो गया- ट्रंप
अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष को खत्म करने और शांति समझौते की जानकारी दी है. उन्होंने आज 15 जून को अपने आधिकारिक ट्रूथ सोशल पर पोस्ट करके लिखा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो गया है. सभी को बधाई! मैं इसके जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बिना किसी रोक-टोक के खोलने की पूरी मंजूरी देता हूं.” ट्रंप ने पोस्ट में आगे कहा, “और साथ ही, अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने का भी आदेश देता हूं. दुनिया भर के जहाजों, अपने इंजन चालू करो. तेल का फ्लो शुरू होने दो!”
अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप ने अपने एक अन्य ट्रूथ सोशल पोस्ट में कहा, “यह शानदार डील पूरे इलाके में शांति और सुरक्षा लाएगी. कई राष्ट्रपतियों ने ईरान के साथ शांति बनाने की कोशिश की, लेकिन वे सभी मुझसे पहले नाकाम रहे. इलाके के नेताओं को पहली बार ऐसा राष्ट्रपति मिला है जो उन्हें असली शांति पाने में मदद कर सकता है.” ट्रंप ने आगे कहा, “शुक्रवार को डील पर साइन होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुलने और बारूदी सुरंगें हटाने के काम के साथ, इलाके और दुनिया के लिए दोनों तरफ से फिर से तेल की सप्लाई शुरू हो जाएगी!”

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शांति समझौते के 14 प्रमुख बातें
ईरान और अमेरिका के बीच इस शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे. बताया गया कि दोनों पक्ष (ईरान और अमेरिका) शुक्रवार को जिनेवा में समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए मिलेंगे. अब आइए जानते हैं कि इन दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर बनी सहमति में क्या-क्या शर्तें और बातें हैं.
- युद्ध पर पूरी रोक: लेबनान सहित सभी सक्रिय मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करना.
- नाकाबंदी हटाना: हस्ताक्षर होने के 30 दिनों के भीतर ईरानी बंदरगाहों से अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को पूरी तरह हटाना.
- अमेरिकी सेना की वापसी: ईरान के आस-पास के क्षेत्रों से अमेरिकी सैन्य बलों को पीछे हटाने की प्रतिबद्धता.
- आंतरिक मामलों में दखल नहीं: ईरान के संप्रभु आंतरिक मामलों में दखल न देने का अमेरिका का औपचारिक वादा.
- क्षेत्रीय सेना पर नियंत्रण: बातचीत के दौरान मध्य पूर्व (Middle East) क्षेत्र में अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों को तैनात न करने की प्रतिबद्धता.
- होर्मुज जलडमरू: बीते कई दिनों से बाधित होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलना.
- शिपिंग फिर से शुरू करना: स्थानीय “ईरानी व्यवस्था” के तहत 30 दिनों के भीतर महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को फिर से शुरू करना.
- तेल प्रतिबंधों पर रोक: ईरान के रेवेन्यू फ्लो को बहाल करने के लिए तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और संबंधित ऊर्जा निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को हटाना.
- फ्रीज की गई संपत्ति की रिहाई: बातचीत की अवधि के दौरान कुल $24 बिलियन (24 अरब डॉलर) की ईरानी संपत्ति को अनफ्रीज (मुक्त) करना.
- बातचीत से पहले फंड की उपलब्धता: अंतिम बातचीत शुरू होने से पहले ही फ्रीज किए गए फंड का आधा हिस्सा ($12 बिलियन) ईरान को सौंपना.
- आर्थिक पुनर्निर्माण योजना: अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा ईरान के लिए कम से कम $300 बिलियन (300 अरब डॉलर) के आर्थिक पुनर्निर्माण के प्रस्ताव पेश करना.
- परमाणु हथियार न बनाने की शर्तें: परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत ईरान का यह दोहराना कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा या हासिल नहीं करेगा.
- 60 दिनों की समय सीमा: अमेरिकी प्रतिबंधों, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के नियमों और IAEA के प्रस्तावों को अंतिम रूप देने के लिए 60 दिनों की सख्त समय सीमा तय करना.
- एजेंडे से बाहर की शर्तें: ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय समूहों के लिए उसके वित्तीय/सामग्री समर्थन को सभी बातचीत के एजेंडे से पूरी तरह बाहर रखना.

अमेरिका-ईरान संघर्ष: प्रमुख घटनाओं की टाइमलाइन
- 28 फरवरी: अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई और कई शीर्ष कमांडरों की मौत हो गई.
- 1 मार्च: ईरान ने मिसाइल हमलों से जवाबी कार्रवाई की, जिसके परिणामस्वरूप संयुक्त अरब अमीरात में तीन लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक भारतीय भी शामिल था.
- 2 मार्च: कुवैत ने गलती से तीन अमेरिकी जेट विमानों को मार गिराया.
- 4 मार्च: हिंद महासागर में अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी नौसेना के फ्रिगेट IRIS Dena को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया गया.
- 5 मार्च: ईरान ने इजरायल, अमेरिकी ठिकानों और क्षेत्र के आसपास के देशों के खिलाफ हमलों की एक नई लहर शुरू की.
- 6 मार्च: अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की मांग की.
- 7 मार्च: ईरान ने ट्रंप की आत्मसमर्पण की मांग को खारिज कर दिया.
- 8 मार्च: सऊदी अरब में एक रेजिडेंशियल एरिया में एक मिसाइल गिली, जिससे एक भारतीय सहित दो लोगों की मौत हो गई.
- 9 मार्च: अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अपने दिवंगत पिता के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में पदभार संभाला.
- 12 मार्च: ईरान के नए सर्वोच्च नेता ने अपना पहला सार्वजनिक बयान जारी किया और हमलों को जारी रखने की कसम खाई.
- 13 मार्च: ट्रंप ने जी7 नेताओं से कहा कि ईरान आत्मसमर्पण करने वाला है.
- 17 मार्च: अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी की हत्या कर दी गई.
- 18 मार्च: ईरानी सरकारी मीडिया ने कहा कि ईरान के विशाल अपतटीय दक्षिण पार्स प्राकृतिक गैस क्षेत्र से संबंधित सुविधाओं पर हमला हुआ. इसके बाद ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब की हत्या कर दी गई.
- 20 मार्च: भारतीय दूतावास ने घोषणा की कि सऊदी अरब में “18 मार्च की हालिया घटनाओं” के कारण एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई.
- 21 मार्च: अमेरिका ने समुद्र में फंसे ईरानी तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटाने की घोषणा की.
- 23 मार्च: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति से बात की. ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने या अपने बिजली संयंत्रों पर हमलों का सामना करने के लिए दी गई समय सीमा को पांच दिन बढ़ा दिया.
- 25 मार्च: ईरान ने अमेरिकी सीजफायर योजना को खारिज कर दिया और अपनी मांगें रखीं.
- 26 मार्च: ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की समय सीमा बढ़ाकर 6 अप्रैल कर दी.
- 27 मार्च: ईरान की परमाणु सुविधाओं पर इजरायली हमले हुए.
- 30 मार्च: ट्रंप ने ईरान के एनर्जी रिसोर्सेज और अन्य महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़े लेवल पर खत्म करने की धमकी दी, यदि युद्ध समाप्त करने के लिए जल्द ही कोई समझौता नहीं हुआ. इसी दिन कुवैत में ईरानी हमलों में एक भारतीय नागरिक मारा गया.
- 31 मार्च: चीन और पाकिस्तान ने युद्ध समाप्त करने के लिए पांच सूत्री शांति प्रस्ताव पेश किया.
- 3 अप्रैल: ईरान में एक अमेरिकी लड़ाकू विमान को मार गिराया गया.
- 6 अप्रैल: ट्रंप ने ईरान को धमकी दी कि अगर वह समझौते पर सहमत नहीं हुआ तो चार घंटे के भीतर उसे पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाएगा. ईरान ने 45 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया.
- 7 अप्रैल: ट्रंप ने धमकी दी कि अगर ईरान समझौता करने की उनकी लेटेस्ट समय सीमा को पूरा करने में विफल रहता है तो “पूरी सभ्यता आज रात नष्ट हो जाएगी.”
- 8 अप्रैल: अमेरिका और ईरान दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमत हुए.
- 11 अप्रैल: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के नेतृत्व में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान में शीर्ष ईरानी वार्ताकारों के साथ ऐतिहासिक आमने-सामने की बातचीत की.
- 12 अप्रैल: पाकिस्तान में हुई वार्ता में अमेरिका और ईरान शांति समझौते पर पहुंचने में विफल रहे. ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के प्रवेश या निकास पर तत्काल नाकाबंदी शुरू करेगी.
- 15 अप्रैल: ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध “समाप्त होने के कगार पर है.”
- 16 अप्रैल: पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने तेहरान में ईरान के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत की.
- 17 अप्रैल: ईरान ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य “पूरी तरह से खुला” है. हालांकि, ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी “पूरी ताकत” से जारी रहेगी.
- 18 अप्रैल: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के अपने फैसले को पलट दिया.
- 20 अप्रैल: अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के ध्वज वाले एक मालवाहक जहाज को जब्त कर लिया.
- 21 अप्रैल: अमेरिकी वार्ता की शर्तों पर तेहरान की प्रतिक्रिया न मिलने के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस की इस्लामाबाद यात्रा स्थगित कर दी गई.
- 22 अप्रैल: ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया. ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन जहाजों पर गोलीबारी की और उनमें से दो को जब्त कर लिया.
- 24 अप्रैल: ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के साथ चर्चा करने के लिए इस्लामाबाद पहुंचे.
- 26 अप्रैल: ईरान के विदेश मंत्री तीन दिनों में दूसरी बार पाकिस्तान पहुंचे और रूस रवाना होने से पहले सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की.
- 27 अप्रैल: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी नाकाबंदी समाप्त करने की पेशकश की, बशर्ते अमेरिका देश पर लगाई गई नाकाबंदी हटा ले और युद्ध समाप्त कर दे.
- 1 मई: ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका को एक नया प्रस्ताव प्रस्तुत किया.
- 4 मई: ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे फंसे हुए जहाजों की सुरक्षा कर रहे अमेरिकी जहाजों पर हमला करता है तो उसे “धरती के नक्शे से मिटा दिया जाएगा.”
- 6 मई: ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए चलाई जा रही “प्रोजेक्ट फ्रीडम” को निलंबित कर दिया.
- 8 मई: अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो ईरानी तेल टैंकरों पर गोलीबारी की और उन्हें निष्क्रिय कर दिया.
- 10 मई: ईरान ने पाकिस्तानी मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका के लेटेस्ट सीजफायर प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया भेजी. ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया.
- 11 मई: ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम “बड़े पैमाने पर लाइफ सपोर्ट” पर है.
- 13 मई: ओमान के तट पर भारतीय ध्वज वाले एक जहाज पर हमला किया गया.
- 16 मई: पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने ईरानी नेताओं से बातचीत करने के लिए तेहरान का दौरा किया.
- 18 मई: ट्रंप ने कहा कि वह ईरान पर सैन्य हमला इसलिए टाल रहे हैं क्योंकि “गंभीर बातचीत” चल रही है.
- 19 मई: ट्रंप ने कहा कि वह ईरान पर हमले फिर से शुरू करने का फैसला करने से सिर्फ एक घंटे दूर थे, लेकिन कतर और यूएई सहित वार्ताकारों से फोन आने के बाद उन्होंने इसे टाल दिया, जिसमें तेहरान के शांति वार्ता में “उचित” होने की बात कही गई थी.
- 20 मई: पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार ईरानी नेताओं से मुलाकात के लिए तेहरान गए.
- 21 मई: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ईरान वार्ता में ‘अच्छे संकेत’ मिलने के बावजूद, ‘अन्य विकल्प’ अभी भी खुले हैं.
- 23 मई: पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने तेहरान में ईरान के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की और शांति समझौते को हासिल करने के प्रयासों में तेजी लाने पर चर्चा की.
- 24 मई: ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का समझौता काफी हद तक बातचीत के बाद पूरा हो गया था.
- 26 मई: अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने ईरान में मिसाइल लॉन्च साइट पर ‘आत्मरक्षा’ के लिए नए हमले किए.
- 28 मई: अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ एक और हमला किया.
- 1 जून: अमेरिकी सेना ने कहा कि तेहरान द्वारा एक अमेरिकी एमक्यू-1 प्रीडेटर ड्रोन को मार गिराए जाने के बाद उसने ईरान में स्थित रडार और ड्रोन कंट्रोल साइट्स को निशाना बनाया. इसके जवाब में ईरान ने कुवैत में अमेरिकी सैनिकों को मिसाइलों से निशाना बनाया.
- 3 जून: ईरानी ड्रोन ने कुवैत हवाई अड्डे पर हमला किया, जिसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई.
- 6 जून: ईरान ने बहरीन और कुवैत की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे.
- 7 जून: पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी अमेरिका-ईरान वार्ता को फिर से शुरू करने के लिए तेहरान गए.
- 8 जून: इजरायल और ईरान ने एक-दूसरे पर हमले किए, जिससे क्षेत्र में पूर्ण पैमाने पर युद्ध छिड़ने का खतरा पैदा हो गया.
- 9 जून: ट्रंप ने कहा कि ईरान द्वारा अमेरिकी सेना के हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के बाद अमेरिका को जवाब देना होगा.
- 10 जून: अमेरिका ने ईरान पर हमला किया और पलाऊ ध्वज वाले एक टैंकर को निशाना बनाया, जिसमें जहाज पर सवार 24 भारतीय नाविकों में से तीन मारे गए.
- 11 जून: अमेरिका ने ईरान पर दोबारा गोलीबारी शुरू होने के दूसरे दिन हमला किया और ईरान ने खाड़ी देशों और जॉर्डन पर जवाबी कार्रवाई की.
- 15 जून: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया है.

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किसे फायदा और किसे नुकसान?
डील के मसौदा को देखने पर मालूम होता है कि अमेरिका से अधिक फायदा ईरान को हो रहा है. अमेरिका और इजरायल ने बीते 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था. इसकी कई वजहें थीं, इनमें से एक वजह ईरान को परमाणु हथियार न बनाने देना और कुछ बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को भी पूरा नहीं होने देना था. लेकिन इस शांति समझौते में आप देख सकते हैं कि परमाणु हथियार वाले मामले में ईरान अमेरिका की बात मान गया है लेकिन बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को इस समझौते से बाहर रखा गया है. इसे एक तरह से ईरान की जीत बताई जा रही है.

इतना ही नहीं, अमेरिका ईरान को और भी कई मामलों में राहत देता हुआ दिख रहा है. इनमें तेल प्रतिबंधों पर रोक को हटाना, फ्रीज की गई संपत्ति की रिहाई करना, ईरान के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देना, ईरान के आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के प्रस्ताव पर बात बनना समेत अन्य चीजें शामिल हैं. आप यह देख सकते हैं कि अमेरिका, ईरान को परमाणु हथियार न बनाने की बातों पर राजी कर चुका है, बाकी के अन्य बातों या यूं कहें कि शर्तों पर ईरान भारी पड़ता हुआ दिखा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी एक तरह से ईरान की निगरानी में ही रहेगा. हालांकि, समुद्री नियम के तहत वह इस रास्ते पर कोई टोल नहीं वसूल सकेगा, जो एक समय पर कहा जा रहा था कि ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टैक्स ले सकता है.
