Iran-US Tension: ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया को काफी परेशान कर दिया है. पश्चिम एशिया में जारी इस तनाव की वजह से विश्व की एनर्जी सप्लाई के लिए अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित है. इसकी वजह से दुनिया के कई देशों में तेल और गैस की सप्लाई नहीं हो पा रही है और उनके दाम लगातार बढ़ रहे हैं.
भारत सहित दुनिया के तमाम देश चाहते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव जल्द ही खत्म हो, लेकिन सच्चाई कुछ अलग ही दिख रही है. ताजा मामला ईरान के द्वारा मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका-इजरायल के साथ संघर्ष को खत्म करने के लिए जारी वार्ता को बंद करना है. हालांकि, अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ उनकी बातचीत जारी है. आइए जानते हैं पूरा मामला.
सीजफायर बढ़ाने पर ईरान की बातचीत बंद
न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध में सीजफायर बढ़ाने के बारे में मध्यस्थों से बातचीत करनी बंद कर दी है. मंगलवार को दो अर्ध-सरकारी ईरानी समाचार एजेंसियों ने यह रिपोर्ट दी. ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के करीबी माने जाने वाली समाचार एजेंसियों, फार्स और तसनीम की रिपोर्टें ऐसे समय में आईं जब लेबनान में ईरान समर्थित मिलिशिया हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल की अलग लेकिन संबंधित लड़ाई में तनाव बढ़ गया था.
वहीं, मध्यस्थता में शामिल एक क्षेत्रीय अधिकारी ने वार्ता पर चर्चा करने के लिए नाम न छापने की शर्त पर एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि ईरान ने मंगलवार को बिल्कुल भी संवाद नहीं किया, जबकि पहले उसने कहा था कि बातचीत जारी रखने के लिए लेबनान में युद्धविराम लागू होना आवश्यक है.
हमारे बीच लगातार बातचीत चल रही है- ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत बंद होने या रुकने की खबर को भ्रामक व झूठा बताया है. प्रेसिडेंट ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा, “हमारे बीच लगातार बातचीत चल रही है, जिसमें चार दिन पहले, तीन दिन पहले, दो दिन पहले, एक दिन पहले और आज की बातचीत भी शामिल है.” उन्होंने आगे कहा, “इन बातचीत का क्या नतीजा निकलेगा, यह कोई नहीं जानता, लेकिन जैसा कि मैंने ईरान से कहा, अब समय आ गया है कि आप किसी न किसी तरह से समझौता करें.”
वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने वाशिंगटन में कांग्रेस की सुनवाई में गवाही देते हुए बातचीत में आई कथित रुकावट का जिक्र नहीं किया. इसके बजाय, उन्होंने वार्ता के परमाणु पहलू के बारे में आशावादी रुख अपनाया, साथ ही यह चेतावनी भी दी कि “स्वीकार्य समझौते” तक पहुंचने की कोई गारंटी नहीं है.
ईरान-अमेरिका संघर्ष में लेबनान की बात
जानकारी के अनुसार, ईरान, सीजफायर बातचीत और होर्मुज जलडमरूमध्य व उससे होकर गुजरने वाले तेल, गैस और अन्य वस्तुओं पर इस्लामी गणराज्य के नियंत्रण को ढीला करने के लिए ट्रंप पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. ट्रंप संभावित रूप से इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर अपनी सेनाओं की बढ़त रोकने या धीमी करने के लिए दबाव डाल सकते हैं, जो पिछले 25 वर्षों में किसी भी समय की तुलना में लेबनान में अधिक गहराई तक घुस चुकी हैं.
ये संघर्ष तेजी से एक दूसरे से जुड़ते जा रहे हैं, क्योंकि ईरान इस बात पर जोर दे रहा है कि वहां चल रहे युद्ध में किसी भी संभावित युद्धविराम से लेबनान में चल रही लड़ाई भी समाप्त होनी चाहिए. इजरायल और अमेरिका का कहना है कि लेबनान में चल रही लड़ाई ईरान युद्ध वार्ता से अलग है.
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News Source: PTI
