Middle East Tension: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों से शुरू हुई जंग अभी तक थमती नजर नहीं आ रही है. मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बना हुआ है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अभी भी पहले की तरह मालवाहक जहाजों की आवाजाही नहीं हो पा रही है. यह स्थिति अब अमेरिका के लिए भी बड़ी चुनौती बन गई है. अमेरिका लगातार दावा कर रहा है कि होर्मुज को जल्द ही खोल दिया जाएगा, लेकिन अभी तक यह समुद्री गलियारा नहीं खुल पाया है. अगर अमेरिका होर्मुज को पूरी तरह खुलवाए बिना युद्ध को एकतरफा तरीके से खत्म करता है, तो इसे उसके लिए बड़ी रणनीतिक हार के तौर पर देखा जा सकता है. वहीं, ईरान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री गलियारे को पहले की तरह नहीं खोलने वाला है. ईरान का कहना है कि उसकी अनुमति के बिना यहां से कोई भी जहाज यहां से गुजर नहीं सकता. होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय से जारी गतिरोध का असर उन देशों पर भी पड़ रहा है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मध्य पूर्व पर काफी हद तक निर्भर हैं. तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच इन देशों की आर्थिक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं.
दूसरी ओर जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी के आखिर में ईरान के साथ युद्ध शुरू किया था, तब उन्होंने अनुमान लगाया था कि यह संघर्ष चार से पांच सप्ताह तक चलेगा. लेकिन छह महीने बाद भी युद्ध खत्म होने का कोई स्पष्ट रास्ता नजर नहीं आ रहा है. ट्रंप लगातार युद्ध में जीत का दावा करते रहे हैं और यह भी कहते रहे हैं कि संघर्ष को खत्म करने के लिए समझौता लगभग तैयार है. जून में युद्ध समाप्त करने की दिशा में एक समझौता ज्ञापन (MOU) भी तैयार किया गया था, लेकिन इस पर आम सहमति नहीं बन सकी.

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होर्मुज खुलवाना है एकमात्र लक्ष्य
दूसरी तरफ पिछले छह महीनों में जैसे-जैसे युद्ध का स्वरूप बदला है, वैसे-वैसे इस संघर्ष के लक्ष्य भी बदले हैं. अब ट्रंप के मुख्य लक्ष्यों में से एक है कि जल्द से जल्द होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाए. यह समुद्री गलियारा काफी महत्वपूर्ण रास्ता है और यहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है. हालांकि, ईरान ने अभी तक इस रास्ते का कूटनीतिक इस्तेमाल किया है और यही वजह है कि युद्ध शुरू होने के बाद से यह काफी हद तक बंद रहा है. इसके कारण खेतों के लिए जरूरी ईंधन और खाद की कीमतें बढ़ गई हैं. ट्रंप पर आर्थिक व राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है. ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लक्ष्यों में अमेरिका को रणनीतिक सफलता मिली है. लेकिन संघर्ष की शुरुआत में ट्रंप ने जो अन्य अहम लक्ष्य तय किए थे, उनमें से कुछ अभी तक हासिल नहीं कर पाएं हैं. पिछले जून में ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को पूरी तरह खत्म कर दिया है. लेकिन जब लड़ाई शुरू हुई, तो उनके सहयोगियों ने हमलों को सही ठहराते हुए चेतावनी दी कि ईरान बम बनाने से बस कुछ ही हफ्ते दूर था.
ईरान से एनरिच्ड यूरेनियम लेना खतरनाक मिशन
अब सवाल है कि 70 पाउंड एनरिच्ड यूरेनियम के भंडार का क्या किया जाएगा, जिसका इस्तेमाल तेहरान हथियार बनाने के लिए कर सकता है? माना जा रहा है कि यह मटीरियल उन तीन जगहों के नीचे दबा हुआ है जिन पर पिछले साल अमेरिका और इजरायल ने बमबारी की थी. ट्रंप ने 29 मई को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा था कि इसे अमेरिका इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान और इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के साथ मिलकर हासिल करेगा. इसके बाद इसे खत्म कर देगा. जानकारों का कहना है कि ईरान की मंजूरी के लिए बिना इसे जब्त करना एक खतरनाक मिशन होगा, जिसके लिए देश में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों को तैनात करना होगा. अधिकारियों ने बताया कि तेहरान ने जून के समझौते में फिर से कहा कि वह न्यूक्लियर हथियार हासिल नहीं करेगा और न ही बनाएगा. समझौते में ईरान से अपने ज़्यादा एनरिच्ड यूरेनियम के भंडार को कम करने के लिए कहा गया था. लेकिन ईरान के प्रोग्राम के बारे में कई अन्य विवरण भविष्य की बातचीत के लिए छोड़ दिए गए थे और अब यह साफ नहीं है कि बातचीत के जल्दी ही रुकने से पहले कितनी प्रगति हुई.

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क्या तेहरान खत्म कर पाएगा नाकेबंदी
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और तेहरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी को खत्म करना शामिल होगा, लेकिन कई बार उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग किसी तरह अमेरिकी इलाका बन जाएगा. साथ ही अमेरिका वहां से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगा सकता है. ट्रंप ने बार-बार यह भी कहा है कि यह जलडमरूमध्य खुला हुआ है. उन्होंने बुधवार को कंजर्वेटिव कमेंटेटर ग्लेन बेक के रेडियो शो में दिए एक इंटरव्यू में भी यही बात कही. ट्रंप ने कहा कि यह एक चालू जलडमरूमध्य है. कभी-कभार कोई ड्रोन या रॉकेट दागा जा सकता है. साथ ही हमारा मकसद है कि ईरान की मिसाइलों को नष्ट करना और उनके मिसाइल उद्योग को पूरी तरह खत्म कर देना. इससे पहले मार्च के आखिर में ट्रंप ने कहा था कि ईरान की मिसाइलें काफी हद तक खत्म हो चुकी हैं और उनकी 90 प्रतिशत मिसाइलें बेकार हो गईं हैं. मई के मध्य तक यह अनुमान थोड़ा बदल गया. राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान की 82 प्रतिशत मिसाइलें खत्म हो चुकी थीं. ईरान ने इस इलाके में हमले करने की अपनी क्षमता दिखाई है, जिसमें स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर ड्रोन हमले भी शामिल हैं. इसके अलावा जुलाई महीने में अमेरिकी सेना के पास ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला करने के लक्ष्य थे. अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने घोषणा की कि वह ईरान के सैन्य कमांड सेंटरों, एयर डिफेंस और तटीय निगरानी साइटों, समुद्री क्षमताओं, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइटों और संचार नेटवर्क पर हमले कर रही थी.

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डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को भारी नुकसान पहुंचा
जंग की शुरुआत में राष्ट्रपति और उनके प्रशासन ने कभी-कभी इसे एक अलग लक्ष्य के तौर पर गिनाया. वहीं, कई बार इसे उनकी सूची से हटा भी दिया गया. US सेंट्रल कमांड ने कहा है कि ईरान में हमलों के लिए उनके लक्ष्यों में हथियार बनाने और मिसाइल व ड्रोन बनाने वाली जगहें शामिल रही हैं. सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने जून की शुरुआत में सांसदों को बताया कि ईरान के डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को भारी नुकसान पहुंचा है और मिसाइल व ड्रोन बनाने वाली जगहें शामिल रही हैं. सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने जून की शुरुआत में सांसदों को बताया था कि ईरान के डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को भारी नुकसान पहुंचा है और 80 से 90 प्रतिशत तक का नुकसान हुआ है. इसे फिर से बनाने में उन्हें कई साल लगेंगे. रुबियो ने यह भी बताया कि ईरान के पास अभी भी ड्रोन की क्षमता है, लेकिन उसके पास लक्ष्यों पर हमला करने के लिए ड्रोन के झुंड का इस्तेमाल करने की क्षमता नहीं है, जैसा कि उसने ने युद्ध की शुरुआत में किया था. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के पास अब कोई नौसेना नहीं है और वह मशीन गन से लैस छोटी नावों पर निर्भर है जो जहाजों को परेशान करती हैं.

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मिडिल ईस्ट में लाखों सैनिक की तैनाती
ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ईरान की नौसेना और वायु सेना पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं. वहीं, मार्च में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ट्रंप ने अमेरिका के लिए एक और मकसद जोड़ा, जिसमें इजरायल, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत और अन्य देशों समेत मध्य पूर्व में हमारे सहयोगियों की सर्वोच्च स्तर पर सुरक्षा करना. अमेरिका इस इलाके में अपने बेस और अन्य ठिकानों पर हजारों सैनिक तैनात रखता है. हालांकि ट्रंप इस बात को लेकर साफ नहीं रहे हैं कि लंबे समय में मध्य पूर्व के सहयोगियों को खतरों से बचाने के लिए वे किस हद तक जा सकते हैं. अमेरिका ने जून में कहा था कि ईरान ने कुवैत और बहरीन पर मिसाइलें दागी हैं, तो जवाब में अमेरिका ने ईरान पर हमले किए. इसी बीच अमेरिका के एक सहयोगी ओमान को ट्रंप की सुरक्षा की पेशकश का खास फायदा नहीं मिला है. इसके बजाय उसे ट्रंप के गुस्से का सामना करना पड़ा है क्योंकि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के साथ एक समझौते पर बातचीत कर रहा था. अगस्त के मध्य में एक इंटरव्यू में उन्होंने धमकी दी थी कि अगर ओमान रास्ते में आया तो अमेरिका उस पर बम गिरा देगा.
ट्रंप और उनके प्रशासन ने मार्च में बार-बार कहा था कि ईरान के प्रॉक्सी आतंकी नेटवर्क को कमजोर करना हमारा मुख्य लक्ष्य है. राष्ट्रपति ने इस लक्ष्य को लेकर बताया कि यह पक्का करना कि इलाके के आतंकवादी प्रॉक्सी अब इलाके या दुनिया में अस्थिरता न फैला सकें और यह पक्का करना कि ईरानी सरकार अपनी सीमाओं के बाहर आतंकवादी सेनाओं को हथियार, पैसा और निर्देश देना जारी न रख सके. साथ ही यह पक्का करना कि ईरानी सरकार अपनी सीमाओं के बाहर आतंकवादी सेनाओं को हथियार, पैसा और निर्देश देना जारी न रख सके.
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