Nepal Flash Floods: नेपाल इस समय बाढ़ के संकट से जूझ रहा है, जिसने हजारों परिवारों की जिंदगी पूरी तरह बर्बाद कर दी है. भयानक बाढ़ ने कई इलाकों को तबाह कर दिया है. अब तक 332 लोगों के मरने की खबर है, जबकि 1000 से ज्यादा लोग लापता हैं. हर गुजरते घंटे के साथ, अपनों की तलाश और लाशों की संख्या बढ़ती जा रही है . नेपाल से आ रही तस्वीरें और वीडियो इस हादसे की भयावहता दिखा रहे हैं. कही बचावकर्मी मलबे और कीचड़ से लाशें निकालते दिख रहे हैं, तो कहीं कोई बुज़ुर्गों और बच्चों को गाद से निकालते दिख रहा हैं. तस्वीरें इतनी भयानक हैं कि किसी का भी दिल दहल जाए.
इस तबाही के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ है – क्या इस आफत का असर कुछ हद तक कम किया जा सकता था? क्या समय पर चेतावनी मिलने से सैकड़ों जानें बच सकती थीं. इस पूरे संकट में चीन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि अगर नेपाल को समय पर कोई जरूरी मैसेज या चेतावनी मिल जाती, तो शायद हालात इतने बुरे नहीं होते. सवाल है कि चीन ने समय रहते नेपाल को आगाह क्यों नहीं किया. साथ ही जानें नेपाल बाढ़ कैसे आई और तबाही का मंजर क्या है.
कैसे आई बाढ़
नेपाल बाढ़ का भयानक वीडियों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लगता है मानों किसी फिल्म सीन हो. वैज्ञानिकों का कहना है कि शुरू में बाढ़ का कारण भूकंप समझा गया था, लेकिन असल में गिरते ग्लेशियर और चट्टानों से 4.4 से 5.2 मैग्नीट्यूड का झटका रिकॉर्ड किया गया. यह विनाशकारी बाढ़ एक विशाल ग्लेशियर के टूटने के कारण आई है. बुधवार की सुबह 8:37 बजे नेपाल-तिब्बत सीमा पर लांगटांग नेशनल पार्क के पास भयंकर सैलाब आया. हिमालय के ऊंचाई पर स्थित पर ग्लेशियर का लगभग 2,000 फीट चौड़ा निचला हिस्सा अचानक टूटकर नीचे घाटी की ओर गिर गया. लाखों टन बर्फ और मलबे की चट्टान नीचे गिरी और लेंडे खोला नदी के रास्ते में जाकर जमा हो गई, जिससे नदी का रास्ता ब्लॉक हो गया. लेंडे खोला भोटाकोशी नदी की एक सहायक नदी है. देखते ही देखते वहां एक अस्थायी बांध बन गया.
इस बांध के पीछे पानी का दबाव तेजी से बढ़ता गया. मलबे की दीवार वह दबाव झेल नहीं पाई और किसी बड़े बम धमाके की तरह फट गई. ऐसे में पानी का सैलाब अपने साथ कीचड़ और पत्थर लिए भोटेकोशी नदी में आ गिरा. इससे नदी का जलस्तर कुछ ही देर में 9 मीटर तक ऊपर उठ गया. नदी किनारे रहने वाले लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिला. यह सैलाब पहले तिब्बत में आया और फिर नेपाल की ओर बढ़ा. मलबे और पानी के इस बहाव ने घरों, गाड़ियों, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और भारत, नेपाल और चीन को जोड़ने वाले बड़े पुलों को तिनके की तरह बहा दिया.

332 की मौत, 288 भारतीय लापता
बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के तीन जिलों में तबाही मचा दी. नेपाल पुलिस ने गुरुवार को कहा कि भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ में 93 और लाशें मिलने के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 332 हो गई है. नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अबी नारायण काफले के मुताबिक, अब तक मिली लाशों में चितवन में 108, नवलपरासी ईस्ट में 62, धाडिंग में 27, गोरखा में 20, रसुवा में 17, नवलपरासी वेस्ट में 15, नुवाकोट में 12 और तनहुन में नौ लाशें शामिल हैं. वहीं 1000 से 1300 लोग अभी लापता हैं.
भारत ने नेपाल भेजी 10 टन राहत सामग्री, UP-उत्तराखंड समेत 7 राज्यों ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
आधिकारिक तौर पर 288 भारतीयों को लापता की लिस्ट में रखा गया है. इनमें से ज्यादातर लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर आए तीर्थयात्री और टूरिस्ट हैं. नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के जारी डेटा के मुताबिक, अचानक आई बाढ़ में 1000 से ज्यादा लोग लापता हैं. अधिकारियों ने बताया कि नेपाल आर्मी के कम से कम 44, नेपाल पुलिस के 28 और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 13 जवानों का सेंटर से संपर्क टूट गया है. इसी तरह, अलग-अलग हाइड्रोपावर और कस्टम ऑफिस में काम करने वाले करीब 162 लोग लापता हैं. घटना के बाद से विदेशियों समेत करीब 579 टूरिस्ट लापता हैं. अधिकारियों ने बताया कि उनमें से ज़्यादातर तिब्बत में कैलाश मानसरोवर और नेपाल के बागमती प्रांत में गोसाईंकुंदा जा रहे थे. बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में अब तक 73 लोग घायल पाए गए हैं.
चीन कर सकता था आगाह
नेपाल की मीडिया में इस तबाही का जिम्मेदार चीन को बताया जा रहा है. चीन पर आरोप लगाया जा रहा है कि अगर चीन ने समय रहते नेपाल को आगाह कर दिया होता है तो शायद बर्बादी कम हुई होती. सबसे पहले नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटा और तेज कंपन महसूस किया गया. करीब 8: 37 बजे तिब्बत के पहाड़ों पर सैलाब आया. इसके करीब आधे घंटे के बाद बाढ़ की एंट्री नेपाल में हुई. यह भोटेकोशी नदी के रास्ते नेपाल की सीमा में दाखिल हुआ. नेपाली नेताओं और पत्रकारों का आरोप है कि तिब्बत में ग्लेशियर टूटने और नदी में रुकावट के बारे में पता होने के बावजूद, चीन ने नेपाल को समय पर चेतावनी नहीं दी. अगर नेपाल को पहले चेतावनी मिल जाती, तो लोगों को निचले इलाकों से सुरक्षित निकाला जा सकता था, जिससे जान-माल का नुकसान कम होता.
नेपाल की बाढ़ का असर: UP और बिहार में हाई अलर्ट, गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोले गए
इन आरोपों पर चीन ने सीधा स्पष्टीकरण नहीं दिया. चीनी राजदूत झांग माओमिंग ने एक्स पर लिखा- ग्यिरोंग-रासुवागढ़ी बॉर्डर इलाके में आई भयानक कुदरती आफत से बहुत दुख हुआ है, जिससे चीन और नेपाल दोनों तरफ काफी लोग मारे गए हैं और नुकसान हुआ है. जिन लोगों ने अपनी जान गंवाई, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदना है और उनके दुखी परिवारों और सभी प्रभावित लोगों के साथ-साथ नेपाल की सरकार और लोगों के प्रति मेरी सच्ची हमदर्दी है. इस मुश्किल समय में चीन नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है. चीन की तरफ काफी नुकसान होने के बावजूद, चीन ने तुरंत नेपाल को इमरजेंसी सप्लाई और कैश मदद भेजी है और आगे भी मदद देने की पूरी कोशिश करेगा. मुझे यकीन है कि हाथ मिलाकर, हम मुश्किलों को पार कर लेंगे और अपने खूबसूरत घरों को फिर से बनाएंगे.

तिब्बत में भी बरपा कहर
चीन के कब्जे वाले तिब्बत में भी भारी तबाही मची है. करीब 588 लोग लापता बताए जा रहे हैं. सरकारी मीडिया ने गुरुवार को यह जानकारी दी. सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने गुरुवार को मरने वालों की संख्या अपडेट करते हुए बताया कि अब तक दो लोकल गांववालों को बचाया गया है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बुधवार को तिब्बत में चीन-नेपाल बॉर्डर इलाके के पास के गांवों और कस्बों में आई भयानक बाढ़ के बाद लापता लोगों को ढूंढने और बचाने के लिए पूरी कोशिश करने का आदेश दिया.
नेपाल में बाढ़ से भारी तबाहीः 100 की मौत, 105 भारतीयों समेत 750 लापता, बचाव में उतरी सेना
558 लापता लोगों में से लगभग 260 विदेशी नागरिक हैं जो कैलाश मानसरोवर यात्रा या तिब्बत के लिए ट्रेकिंग रूट पर थे. CCTV फुटेज से पता चलता है कि ग्यिरोंग पोर्ट/गेट, जो भारत, नेपाल और चीन के बीच मुख्य ट्रेड बॉर्डर क्रॉसिंग है, पर पानी का इतना बड़ा उछाल आया कि वहां खड़ी दर्जनों गाड़ियां, बसें और सरकारी इमारतें एक पल में पानी में डूब गईं. दूसरी ओर तिब्बत में फंसे 21 भारतीयों को भी बाढ़ से बचा लिया गया है. तिब्बत में लगभग 200 भारतीयों ने मदद मांगी है. इस बीच तिब्बत में भारत-चीन बॉर्डर की देखभाल करने वाली पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) वेस्टर्न थिएटर कमांड के एक डायरेक्टिंग ग्रुप को गुरुवार को नेपाल बॉर्डर के पास प्रभावित ग्यिरोंग काउंटी में मिलिट्री के जवानों के जॉइंट रेस्क्यू ऑपरेशन को कोऑर्डिनेट करने के लिए प्रभावित इलाके में भेजा गया.
भारत ने भेजी मदद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात की और उन्हें हर मुमकिन मानवीय मदद और बचाव काम में तालमेल का भरोसा दिया. भारत ने अब तक नेपाल को कुल 47.5 टन इमरजेंसी राहत सामग्री भेजी है. नेपाल में इस भयानक प्राकृतिक आपदा के बाद, भारत सरकार ने अपनी “नेबरहुड फर्स्ट” पॉलिसी के तहत, मिलिट्री एयरक्राफ्ट से मदद की दो अलग-अलग खेप भेजी हैं. काठमांडू में भारतीय दूतावास और तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों ने प्रभावित भारतीयों और उनके रिश्तेदारों के लिए हेल्पलाइन शुरू की हैं. भारतीय दूतावास ने+977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 जारी किए हैं, जिनपर प्रभावित लोग संपर्क कर सकते हैं.
नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद बिहार और यूपी को हाई अलर्ट पर रखा गया है. बिहार और उत्तर प्रदेश में बुधवार को हाई अलर्ट जारी किया गया. गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) को तैनात किया जा रहा है. सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने भी 1,751 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अपनी सभी यूनिट्स को अलर्ट कर दिया है. बिहार में पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली के अलावा सीतामढ़ी और शिवहर जैसे संवेदनशील जिलों में भी विशेष सतर्कता बरतने के आदेश दिए गए हैं. सीएम योगी ने महराजगंज और कुशीनगर जिलों को किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए.
नेपाल संकट पर मोहन सरकार अलर्ट: दिल्ली के MP भवन में बना कंट्रोल रूम, हेल्पलाइन नंबर जारी
News Source: PTI
