Home Top News इटली की राजनीति में मेलोनी युग: बर्लुस्कोनी का तोड़ा रिकॉर्ड, बनाई अब तक की सबसे टिकाऊ सरकार

इटली की राजनीति में मेलोनी युग: बर्लुस्कोनी का तोड़ा रिकॉर्ड, बनाई अब तक की सबसे टिकाऊ सरकार

by Sanjay Kumar Srivastava 3 September 2026, 9:40 PM IST (Updated 3 September 2026, 9:43 PM IST)
3 September 2026, 9:40 PM IST (Updated 3 September 2026, 9:43 PM IST)
बर्लुस्कोनी का रिकॉर्ड तोड़ मेलोनी ने ऐसे तय किया 1,413 दिनों का सफर, रचा नया कीर्तिमान

Italy Meloni: अपनी अस्थिर सरकारों के लिए मशहूर इटली में प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी की कंज़र्वेटिव सरकार ने नया इतिहास रच दिया है. गुरुवार को मेलोनी सरकार ने लगातार 1,413 दिनों का कार्यकाल पूरा कर लिया. इसके साथ ही यह दूसरे विश्व युद्ध के बाद से इटली में बिना रुके सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार बन गई है. मेलोनी ने दिवंगत सिल्वियो बर्लुस्कोनी का रिकॉर्ड तोड़ा है, जिनकी सरकार ने 2001 से 2005 के बीच यह कीर्तिमान बनाया था.

4 सितंबर को पार्टी मनाएगी जश्न

इटली की राजनीति में जहां सरकारें अक्सर बहुत कम समय में गिर जाती हैं, वहां मेलोनी की इस सफलता का श्रेय उनके नीतिगत कार्यों से ज्यादा उनकी राजनीतिक सूझबूझ और टिके रहने के हुनर को दिया जा रहा है. इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए मेलोनी और उनकी पार्टी ‘ब्रदर्स ऑफ इटली’ शुक्रवार (4 सितंबर) को दक्षिणी शहर बारी में आगामी चुनाव से पहले एक बड़ी रैली का आयोजन करेगी. हालांकि, एक्सपर्ट्स ने उन्हें आने वाली चुनौतियों के प्रति आगाह भी किया है. जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशंस की प्रोफेसर नताली टोची का कहना है कि सिर्फ टिके रहना काफी नहीं है. अगर आप पांच साल तक सत्ता में रहते हैं और अंत में वोटर्स को दिखाने के लिए आपके पास कोई ठोस काम नहीं होता, तो यह बात चुनाव में आपके खिलाफ भी जा सकती है.

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राजनीतिक संकटों का भी किया सामना

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अपनी व्यावहारिक सोच के बल पर उन राजनीतिक संकटों और पार्टी विवादों का सफलतापूर्व सामना किया है, जिनकी वजह से पिछली सरकारें गिर गई थीं. जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नताली टोची के अनुसार, यदि पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद मेलोनी मतदाताओं को दिखाने के लिए कोई ठोस उपलब्धि पेश नहीं कर पाती हैं, तो यह स्थिति उनके राजनीतिक भविष्य के खिलाफ जा सकती है.

मेलोनी ने किया था यूक्रेन का समर्थन

जब मेलोनी ने अक्टूबर 2022 में पद संभाला, तो वह इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं. उनकी सरकार ऐसी पहली सरकार थी जिसका नेतृत्व नियो-फ़ासिस्ट जड़ों वाली पार्टी ने किया था, और यूरोप के सहयोगी देशों और फ़ाइनेंशियल मार्केट ने मेलोनी को शक की नज़र से देखा था. लेकिन मेलोनी ने काफ़ी हद तक व्यावहारिक रूप से शासन किया. रूस के बड़े हमले के बाद उन्होंने यूक्रेन का लगातार समर्थन किया. यूरोपीय संस्थाओं के साथ मिलकर काम किया और वित्तीय अनुशासन को अपनाया.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनके संबंध उनकी विदेश नीति की सबसे अहम खूबियों में से एक बन गए. जबकि यूरोप के दूसरे देशों जैसे यूनाइटेड किंगडम और फ़्रांस में राजनीतिक अस्थिरता के कारण सरकारें बदलीं. मेलोनी ने पद संभालने के बाद से ही उसी गठबंधन को बनाए रखा है. आधुनिक इटली की राजनीति में ऐसा कम ही देखने को मिलता है और यह उनके दोबारा चुने जाने की कोशिश का एक मुख्य आधार है.

रक्षा मंत्री ने कहा- मेलोनी को मिला अपनी मेहनत का फल

रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने बुधवार को ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि मेलोनी को अपनी मेहनत का फल मिल रहा है, क्योंकि मैं बहुत कम ऐसे लोगों को जानता हूं जो इतने पक्के इरादे वाले, मेहनती, सटीक और बारीकियों पर ध्यान देने वाले हों, और जिन्होंने संस्थाओं की सेवा के लिए अपनी निजी ज़िंदगी और निजी दायरे की भी कुर्बानी दी हो.

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उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैसी ही विश्वसनीयता मिल रही है जिसकी वह हकदार हैं. लेकिन इटली के स्तर पर उन्हें वैसा फ़ायदा नहीं मिल रहा है. 2027 के आखिर में होने वाले अगले चुनाव की ओर बढ़ते हुए, अब इस बात पर कोई बहस नहीं है कि मेलोनी सरकार चला सकती हैं. सवाल यह है कि क्या वोटर मानते हैं कि उनकी सरकार ने इतना काम किया है कि उन्हें एक और कार्यकाल मिलना चाहिए.

आलोचकों ने कहा- देश में बढ़ी महंगाई

समर्थक बेहतर सरकारी वित्तीय स्थिति, महंगे उपायों को वापस लेने, 10 लाख से ज़्यादा नई नौकरियां मिलने और बेरोज़गारी दर 6 प्रतिशत से कम होने का ज़िक्र करते हैं. वे प्रवासियों के आने में आई भारी कमी का भी हवाला देते हैं. रक्षा मंत्री क्रोसेटो ने कहा कि कार्यकाल की अवधि का मतलब नतीजे नहीं होता, लेकिन ये अहम बातें हैं. हालांकि, मेलोनी के ज़्यादा उदारवादी बनने की इच्छा ने ज़्यादा रूढ़िवादी चुनौतियों के लिए जगह बना दी है. जबकि आलोचकों का कहना है कि देश के भीतर उनका असर उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है, जहां सुस्त अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई की समस्या बनी हुई है, और उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियां यूरोप के मंच पर रही हैं. मेलोनी अभी भी उस मुकाम को हासिल करने की कोशिश कर रही हैं जिसे बर्लुस्कोनी हासिल करना चाहते थे. एक ही सरकार के तौर पर लगातार पांच साल का कार्यकाल. बर्लुस्कोनी का एक कार्यकाल दो दिन कम रह गया था, क्योंकि खराब क्षेत्रीय चुनावी नतीजों के बाद उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

मेलोनी का दावा- 12 लाख लोगों को मिलीं नौकरियां

मेलोनी ने बार-बार कहा है कि बिज़नेस और नौकरी देने वालों की मदद करने से ठोस नतीजे मिले हैं. उन्होंने कहा कि उनकी नीतियों की वजह से 12 लाख (1.2 मिलियन) पक्की नौकरियां पैदा हुईं और कुल मिलाकर तथा युवाओं में बेरोज़गारी ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर आ गई. अपनी सरकार के कामकाज का बचाव करते हुए मेलोनी ने हाल ही में लेबर से जुड़े एक कार्यक्रम में कहा कि सरकार की रणनीति उन लोगों की मदद करने पर केंद्रित रही है जो संपत्ति और नौकरियां पैदा करते हैं. हमने रोज़गार के मामले में रिकॉर्ड स्तर हासिल किया है.

हेल्थकेयर, शिक्षा पर सरकार का ध्यान नहीं

हालांकि मेलोनी और उनके समर्थक नौकरियों, वित्तीय अनुशासन और राजनीतिक स्थिरता की बात करते हैं, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इटली की कई पुरानी समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं. कम प्रोडक्टिविटी, आबादी में गिरावट और हेल्थकेयर, शिक्षा और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में लंबे समय से चली आ रही कमियों पर ज़्यादातर कोई ध्यान नहीं दिया गया है. पॉलिटिकल एनालिस्ट और पोलस्टर लोरेंजो प्रेग्लियास्को ने कहा कि मेलोनी सरकार निश्चित रूप से स्थिर रही है और लंबे समय तक चली है, लेकिन ढांचागत सुधार के मामले में उसने कुछ खास हासिल नहीं किया है. विपक्ष के नेताओं का कहना है कि मेलोनी सरकार अभी तक पब्लिक डेट (सरकारी कर्ज) और सरकारी घाटे को कंट्रोल करने के अलावा लंबे समय तक चलने वाली आर्थिक ग्रोथ को बढ़ावा देने के ठोस तरीके नहीं ढूंढ पाई है.

ग्लोबल स्तर पर अपनी पहचान को राजनीतिक फायदे में बदला

पूर्व प्रधानमंत्री और ‘फाइव स्टार मूवमेंट’ (जो मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ है) के नेता तथा चुनावों में संभावित प्रतिद्वंद्वी ग्यूसेप कोंटे ने बढ़ती महंगाई की ओर इशारा किया. कोंटे ने संसद के बाहर हाल ही में दिए एक भाषण में कहा कि सरकार जश्न मना रही है, लेकिन इटली के लोग नहीं. कुछ लोगों का कहना है कि मेलोनी के कार्यकाल का सबसे मज़बूत नतीजा विदेश में देखने को मिला है. रोम की LUISS यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स के एक्सपर्ट और प्रोफ़ेसर स्टेफ़ानो मंज़ोची ने कहा कि इटली ने यूरोप में ‘ब्लैक शीप’ (अलग-थलग या समस्या पैदा करने वाले देश) वाली अपनी छवि को काफ़ी हद तक बदल लिया है.

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मेलोनी ने निवेशकों और यूरोप के नेताओं का जीता भरोसा

ट्रंप के साथ हालिया तनाव के दौरान संतुलन बनाए रखने की उनकी काबिलियत साफ़ दिखी. फ्रांस में G7 समिट के दौरान ट्रंप के इस दावे पर कि मेलोनी ने उनसे फ़ोटो खिंचवाने की ‘भीख मांगी’ थी, मेलोनी ने कड़ा जवाब दिया: ‘इटली भीख नहीं मांगता’. इससे इटली के लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ी. उन्होंने इसे इस बात के सबूत के तौर पर देखा कि वह सार्वजनिक रूप से इटली और यूरोप का बचाव करते हुए भी वॉशिंगटन के साथ रिश्ते बनाए रख सकती हैं. रोम में 52 साल के टैक्सी ड्राइवर डेविड डेल सार्टो ने कहा कि मुझे मेलोनी पसंद हैं. मुझे उनका व्यक्तित्व पसंद है क्योंकि वह मज़बूत इरादों वाली हैं और किसी को भी खुद पर हावी नहीं होने देतीं.

मेलोनी ने दक्षिणपंथी विचारधारा को मुख्य धारा में किया शामिल

जॉन्स हॉपकिन्स के प्रोफ़ेसर टोची ने बताया कि माइग्रेशन और पहचान के मुद्दों पर राष्ट्रवादी रुख को रणनीतिक समझ के साथ मिलाकर मेलोनी ने यूरोप की ‘हार्ड राइट’ (कट्टर दक्षिणपंथी) विचारधारा को मुख्यधारा में लाने में मदद की. जिन राष्ट्रवादी पार्टियों को कभी राजनीतिक जगत में शक की नज़र से देखा जाता था, उनका सरकारों और यूरोपीय संस्थाओं में असर तेज़ी से बढ़ा. मेलोनी के समर्थक उनके इस बदलाव को इस बात का सबूत मानते हैं कि राष्ट्रवादी कंज़र्वेटिव नेता लोकतांत्रिक संस्थाओं और पश्चिमी गठबंधनों के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए भी ज़िम्मेदारी से सरकार चला सकते हैं. हालांकि, कुछ लोग उनके मुख्यधारा में शामिल होने की इस प्रक्रिया को उनकी कमज़ोरी मानते हैं.

वन्नाची का उदय और मेलोनी को चुनौती

रिटायर्ड आर्मी जनरल रॉबर्टो वन्नाची , जो इमिग्रेशन और राष्ट्रीय पहचान पर अपने कट्टर रुख के लिए जाने जाते हैं , इटली की ‘फ़ार राइट’ (अति दक्षिणपंथी) राजनीति में एक अहम आवाज़ बनकर उभरे हैं. उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी शुरू करके मेलोनी के लिए चुनौती खड़ी कर दी है. उनका तर्क है कि मेलोनी ने उन आक्रामक वादों को छोड़ दिया है जिनसे उनके राजनीतिक समर्थकों में जोश आता था. इसके बजाय उन्होंने यूरोप और अमेरिका के अपने सहयोगियों के सामने एक ऐसी कंज़र्वेटिव छवि पेश की है जो संस्थाओं के अनुकूल है. इससे उन कंज़र्वेटिव वोटरों और सांसदों को अपनी ओर खींचने में कामयाबी मिल सकती है, जिन्हें लगता है कि स्थिरता लाने की कोशिश में मेलोनी का रुख बहुत ज़्यादा नरम हो गया है.

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