Home Top News शव मिलने की उम्मीद नहीं, पुतलों का अंतिम संस्कार कर रहे परिवार, नेपाल में अब तक 1,252 की मौत

शव मिलने की उम्मीद नहीं, पुतलों का अंतिम संस्कार कर रहे परिवार, नेपाल में अब तक 1,252 की मौत

by Neha Singh 3 September 2026, 2:32 PM IST (Updated 3 September 2026, 2:34 PM IST)
3 September 2026, 2:32 PM IST (Updated 3 September 2026, 2:34 PM IST)
Nepal Flood Death Toll

Nepal Flood Death Toll: नेपाल में जलप्रलय को आज एक सप्ताह हो गया है. पिछले गुरुवार को आई बाढ़ के बाद हर दिन मृतकों और रोते-बिलखते लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है. अब तक 1,252 लोगों के शव मिले हैं, जबकि 4,800 से ज्यादा अभी भी लापता हैं. 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत बॉर्डर के पास बर्फ-चट्टान के हिमस्खलन से आई अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया और बर्बादी के निशान छोड़ गई. अब भोटेकोशी नदी के ऊपरी इलाकों में लगातार बारिश के कारण फिर से बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है.

लोगों से सतर्क रहने की अपील

हाइड्रोलॉजी और मौसम विज्ञान विभाग के बाढ़ पूर्वानुमान डिवीजन की टेक्नीशियन सरस्वती बिष्टा ने कहा कि गुरुवार को भोटेकोशी नदी के ऊपरी इलाकों में लगातार बारिश हो रही है, इसलिए भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के साथ-साथ रसुवा और नुवाकोट जिलों से बहने वाली छोटी नदियों और नालों में पानी का लेवल बढ़ने की संभावना है. उन्होंने कहा कि आसपास के इलाकों और नदी के निचले हिस्से में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है. उन्होंने कहा कि कई जिलों, खासकर पहाड़ी इलाकों, जैसे तप्लेजंग, पंचथर, तेरहथुम, धनकुटा, संखुवासभा, ओखलढुंगा, उदयपुर, चितावन, गोरखा, तनहू, लामजंग, मनांग, मुस्तांग, म्याग्दी, कास्की, स्यांगजा, काठमांडू, ललितपुर और भक्तपुर में मौजूद नदियों में अचानक बाढ़ आने का खतरा है. इसी तरह, कालीकोट, हुमला, जुमला, दैलेख, दारचुला, बैतड़ी और कालीकोट जिलों समेत पहाड़ी इलाकों में मौजूद नदियां भी उफान पर हैं.

बाढ़ ने बदला नजारा

नेपाल आर्मी के नेतृत्व में जॉइंट रेस्क्यू टीमों ने गुरुवार को सातवें दिन भी अपनी खोज और बचाव की कोशिशें जारी रखी हैं. काठमांडू पोस्ट अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ ने रसुवा और नुवाकोट घाटियों का नजारा बदल दिया है, हेलीकॉप्टर पायलट खड़ी ढलानों पर चलने के लिए अपने डिसिप्लिन और समझदारी पर भरोसा कर रहे हैं क्योंकि नदी के किनारे और जानी-पहचानी जगहें गायब हो गई हैं. प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बुधवार को कहा कि इस आपदा का जलवायु परिवर्तन से जुड़े होने का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सामने जोरदार तरीके से उठाया जाना चाहिए.

पुतले बनाकर हो रहा अंतिम संस्कार

शव मिलने की उम्मीद खो चुके लापता लोगों के परिवार पुतले बनाकर उनका अंतिम संस्कार कर रहे हैं. बुधवार को पशुपति आर्यघाट में एक सामूहिक अंतिम संस्कार में ऐसे दर्जनों पुतलों का अंतिम संस्कार किया गया. अपनों को खो चुके लोगों के लिए अंतिम रस्में निभाना भी मुश्किल हो गया है, क्योंकि कई परिवारों को रहने की जगह और रस्में करने के लिए पुजारी नहीं मिल रहा है.

तिब्बत में 100 नेपाली नागरिक लापता

इस बीच, नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने कहा है कि भयानक बाढ़ के बाद तिब्बत में लगभग 100 नेपाली नागरिक लापता हैं. लगभग 3,000 नेपाली नागरिक जो तीर्थयात्रा और बिजनेस के मकसद से तिब्बत में आए थे, तिब्बत में फंस गए हैं. छेत्री ने कहा कि उनमें से 2,500 से ज्यादा लोग हिल्सा और तातोपानी बॉर्डर पॉइंट से सुरक्षित नेपाल लौट आए हैं और उनमें से कुछ हवाई जहाज से भी लौटे हैं. तिब्बत के केरुंग बॉर्डर पॉइंट पर अभी भी लगभग 1,500 नेपाली नागरिक फंसे हुए हैं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों देशों के अधिकारी उन्हें सुरक्षित नेपाल पहुंचाने के तरीकों पर बातचीत कर रहे हैं.

बाढ़ की विभीषिका से तो बचे, लेकिन अब बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे नेपाल के हजारों नागरिक

News Source: PTI

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