Korea Tension: कोरियाई प्रायद्वीप में बढ़ते तनाव के बीच दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने के लिए एक व्यावहारिक, चरण-दर-चरण रणनीति का प्रस्ताव रखा है. दक्षिण कोरिया का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में उत्तर कोरिया से तुरंत और पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग करना अव्यावहारिक है. इसलिए, सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पहले छोटे और ठोस कदम उठाए जाने चाहिए.
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परमाणु कार्यक्रम खत्म करने का तीन चरणीय तरीका
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने इस रणनीति को मुख्य रूप से तीन चरणों में विभाजित किया है.
परमाणु कार्यक्रम पर रोक: पहले चरण के तहत उत्तर कोरिया द्वारा नए परमाणु हथियारों, मिसाइलों और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) तकनीक के विकास व उत्पादन पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी. इसके बदले में उसे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी.
हथियारों में कमी : दूसरे चरण में दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास बढ़ने पर उत्तर कोरिया के मौजूदा परमाणु भंडार और हथियारों की संख्या को धीरे-धीरे कम किया जाएगा.
पूर्ण निरस्त्रीकरण: अंतिम चरण के रूप में जब उत्तर कोरिया खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करेगा, तब उसके सभी परमाणु प्रतिष्ठानों को स्थायी रूप से नष्ट कर दिया जाएगा.
इस तरीके पर क्यों जोर दे रहा है दक्षिण कोरिया?
दक्षिण कोरिया इस व्यावहारिक दृष्टिकोण पर इसलिए जोर दे रहा है क्योंकि कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम रुका नहीं है. दक्षिण कोरियाई खुफिया आकलन के अनुसार, उत्तर कोरिया वर्तमान में हर साल 10 से 20 अतिरिक्त परमाणु हथियार बनाने में सक्षम है. सियोल का मानना है कि यदि इस कार्यक्रम को तुरंत ‘फ्रीज’ नहीं किया गया, तो उत्तर कोरिया भविष्य में और अधिक घातक मिसाइलें बना लेगा और आर्थिक तंगी के कारण इन परमाणु तकनीकों को अन्य देशों या तत्वों को निर्यात (बेचने) की कोशिश भी कर सकता है, जो दुनिया के लिए बेहद खतरनाक होगा.

अमेरिका से बातचीत की अपील क्यों?
दक्षिण कोरिया चाहता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सीधे उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग के साथ इस ‘फ्रीज-फॉर-सैंक्शंस’ (प्रतिबंधों में ढील के बदले परमाणु रोक) समझौते पर बातचीत शुरू करें. दक्षिण कोरिया का मानना है कि उत्तर कोरिया केवल अमेरिका को ही अपनी सुरक्षा की गारंटी देने वाला एकमात्र देश मानता है, और अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील के बिना वह किसी मेज पर नहीं आएगा. पूर्व में ट्रंप और किम जोंग के बीच रही व्यक्तिगत कूटनीति का हवाला देते हुए दक्षिण कोरिया को उम्मीद है कि अमेरिका के दखल से ही इस घातक गतिरोध को तोड़ा जा सकता है और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित की जा सकती है.
उत्तर कोरिया को आर्थिक रियायतों का प्रस्ताव
उत्तर कोरिया के बढ़ते मिसाइल परीक्षणों और कूटनीति से इनकार के बीच, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने परमाणु गतिरोध को सुलझाने के लिए एक ‘चरण-दर-चरण’ योजना का प्रस्ताव रखा है. ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (AP) को दिए एक साक्षात्कार में राष्ट्रपति ली ने अपनी इस रणनीति का खुलासा किया. इस रणनीति का प्राथमिक उद्देश्य उत्तर कोरिया की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं के विस्तार को तत्काल रोकना है. इसके बाद अगले चरणों में हथियारों के जखीरे को कम करने और अंततः उसे पूरी तरह नष्ट करने पर काम किया जाएगा. प्रोत्साहन के रूप में उत्तर कोरिया को हर सकारात्मक कदम पर राजनीतिक और आर्थिक रियायतें दी जाएंगी.
उत्तर कोरिया ने तेज की सैन्य गतिविधियां
हालांकि, दक्षिण कोरिया द्वारा प्रस्तावित इस योजना के सामने बड़ी चुनौतियां हैं. उत्तर कोरिया अपनी तानाशाही सरकार की सुरक्षा के लिए इन हथियारों को एकमात्र गारंटी मानता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया प्रयासों के बावजूद उत्तर कोरिया ने बातचीत में शामिल होने से इनकार करते हुए अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं. राष्ट्रपति ली इस सप्ताह न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठकों में इस योजना को वैश्विक नेताओं के सामने रखेंगे.
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उनका कहना है कि दक्षिण कोरिया (सियोल) और अमेरिका (वाशिंगटन) दोनों ही उत्तर कोरिया (प्योंगयांग) के साथ फिर से बातचीत शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. सोमवार को अमेरिका रवाना होने से पहले सवालों के जवाब में ली ने कहा कि चलती हुई गाड़ी की दिशा बदलने के लिए उसे पहले रोकना ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि रोकने, कम करने और खत्म करने का चरणबद्ध तरीका उत्तर कोरिया के परमाणु मुद्दे को प्रभावी ढंग से सुलझाने का एक व्यावहारिक रास्ता है.
उत्तर कोरिया के पास 57 न्यूक्लियर हथियार
उत्तर कोरिया के बढ़ते न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या उसके न्यूक्लियर हथियारों को खत्म करने का काम एक ही बार में पूरा किया जा सकता है या ऐसा हो भी पाएगा या नहीं. ट्रंप ने पिछले महीने कहा था कि उत्तर कोरिया के पास 57 न्यूक्लियर हथियार हैं, जबकि कुछ जानकारों का कहना है कि उसके पास 100 से ज़्यादा वॉरहेड हैं.

कई देशों ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि उत्तर कोरिया को आर्थिक और राजनीतिक फ़ायदों के बदले चरणों में अपने न्यूक्लियर हथियार खत्म करने के लिए मनाया जाए. ली ने कहा कि उत्तर कोरिया की न्यूक्लियर और मिसाइल क्षमताएं जिस हद तक बढ़ गई हैं, उसे देखते हुए यह सोचना कि पूरी तरह से न्यूक्लियर हथियार खत्म होने का इंतज़ार किया जाए, कोई व्यावहारिक समाधान नहीं है. ऐसा इसलिए है क्योंकि इस बीच उत्तर कोरिया की न्यूक्लियर क्षमताएं बढ़ती रहेंगी, जिससे खतरा और बढ़ेगा.
उत्तर कोरिया को लेकर लोगों में संशय
ली ने हाल ही में 1950-53 के कोरियाई युद्ध को औपचारिक रूप से खत्म करने के लिए बातचीत पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि इसके ज़रिए उत्तर कोरिया के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर रोक लगाने के तरीकों पर विचार किया जा सकता है. कुछ लोगों को चिंता है कि ली के इस तरीके से उत्तर कोरिया अपनी मनचाही चीज़ें – जैसे प्रतिबंधों में ढील हासिल करने के बाद अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को पूरी तरह खत्म करने से इनकार कर सकता है. इससे बचने के लिए ली ने कहा कि बातचीत करने वालों को उत्तर कोरिया को यह समझाना होगा कि स्थिर और स्थायी शांति की ओर बढ़ना ही सुरक्षित और समृद्ध भविष्य के लिए एक व्यावहारिक और संभव रास्ता है.
दक्षिण कोरिया और अमेरिका बातचीत के लिए इच्छुक
दक्षिण कोरिया और अमेरिका उत्तर कोरिया के साथ बातचीत फिर से शुरू करना चाहते हैं. चाहे कोई भी तरीका अपनाया जाए, यह पक्का नहीं है कि उत्तर कोरिया जल्द ही बातचीत के लिए वापस आएगा या नहीं. जब ट्रंप ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ बहुत अच्छे रिश्ते का हवाला देते हुए पिछले महीने दक्षिण कोरिया के साथ एक बड़े सैन्य अभ्यास को कम किया तो उत्तर कोरिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति के इस कदम को खारिज कर दिया. उनका कहना था कि अभ्यास के कुछ हिस्सों को कम करने से इसके उकसावे वाले स्वभाव में कोई बदलाव नहीं आएगा. तब से उत्तर कोरिया ने तीन बार हथियार लॉन्च किए हैं और बार-बार अमेरिका की दुश्मनी की आलोचना की है. जानकारों का कहना है कि उत्तर कोरिया शायद अमेरिका से बड़ी रियायतें चाहता है.
ट्रंप और किम मिलकर खोजें साझा रास्ता
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली ने उत्तर कोरिया के प्रति अमेरिकी रुख को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. राष्ट्रपति ली ने उम्मीद जताई है कि डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग के बीच बातचीत फिर से शुरू होने से दोनों कोरियाई देशों के बीच संवाद का रास्ता खुलेगा. ली ने ट्रंप के हालिया कदमों को यह साफ संदेश देने के लिए जानबूझकर उठाया गया कदम बताया कि अमेरिका का उत्तर कोरिया के प्रति कोई दुश्मनी भरा इरादा नहीं है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि दक्षिण कोरिया और अमेरिका दोनों ही बिना किसी शर्त के उत्तर कोरिया के साथ बातचीत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. राष्ट्रपति ली ने इस बात पर जोर दिया कि अब इस मामले में नेताओं के स्तर पर एक बड़े राजनीतिक फैसले की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि दोनों शीर्ष नेताओं को आपस में भरोसा कायम करना चाहिए और आमने-सामने बैठकर एक साझा रास्ता खोजने के लिए मिलकर काम करना चाहिए.
अमेरिका से संबंध मजबूत करना चाहते हैं ली
ट्रंप ने दक्षिण कोरिया से पहले से कोई बातचीत किए बिना ही इस सैन्य अभ्यास को छोटा करने के बारे में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया. इसमें इस बात का भी ज़िक्र था कि ईरान के परमाणु निरस्त्रीकरण के मामले में अमेरिका का साथ देने से ली ने इनकार कर दिया था. इससे अमेरिका-दक्षिण कोरिया गठबंधन को लेकर चिंताएं पैदा हुईं. ली ने माना कि ट्रंप का फ़ैसला कुछ हद तक अप्रत्याशित था. लेकिन ली ने कहा कि ट्रंप ने ऐसे हालात बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई है जिनसे बातचीत का रास्ता खुले और वे कोरियाई प्रायद्वीप में टकराव कम करना चाहते हैं.

अदन की खाड़ी में नौसेना तैनात करेगी दक्षिण कोरिया
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली ने कहा कि दक्षिण कोरिया और अमेरिका के रणनीतिक हित कई क्षेत्रों में गहराई से जुड़े हुए हैं और वे ट्रंप के कार्यकाल के बचे हुए समय में एक-दूसरे के लिए ज़्यादा फ़ायदेमंद साझेदारी बनाना चाहते हैं. उदाहरण के लिए, ली ने कहा कि जहाज़ बनाने के क्षेत्र में प्रस्तावित सहयोग न केवल अमेरिका की जहाज़ निर्माण और नौसैनिक ताकत को नई जान देगा, बल्कि दक्षिण कोरियाई व्यवसायों के लिए विकास के नए अवसर भी पैदा करेगा. ली ने कहा कि वे अपनी सेना को ईरान युद्ध में नहीं घसीटने देंगे. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार दक्षिण कोरियाई जहाज़ों और तेल शिपिंग रूट की सुरक्षा के लिए अदन की खाड़ी में तैनात नौसैनिक यूनिट के ऑपरेशन का दायरा बढ़ाने पर विचार कर रही है.
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